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चंडीगढ़: बिजली विभाग के निजीकरण का रास्ता हुआ साफ, हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
Tue, 29 Jun 2021 02:39 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 29 Jun 2021 02:39 AM IST
सार
पिछले साल बिजली के निजीकरण के फैसले पर हाईकोर्ट ने एक दिसंबर को रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी और याचिका का तीन माह में निपटारा करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने 10 जून को फिर निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी। सुप्रीम ने कोर्ट अब दोबारा हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें हाईकोर्ट ने शहर के बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब निजीकरण की प्रक्रिया का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है।
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यूटी पावर मैन यूनियन ने चंडीगढ़ प्रशासन के उस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसके तहत शहर के बिजली विभाग का निजीकरण करना तय किया गया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के निर्णय पर 1 दिसंबर को रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ यूटी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और हाईकोर्ट को याचिका का 3 माह में निपटारा करने का आदेश दिया था।
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इस बीच यूनियन ने मई में हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर याचिका लंबित रहते निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक की मांग की थी। याची ने कहा था कि याचिका पर सुनवाई लंबी चल रही है जिसका फायदा उठाकर यूटी प्रशासन इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहता है। हाईकोर्ट ने 10 जून को इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए निजीकरण की प्रक्रिया पर फिर से रोक लगा दी थी।
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अब यूटी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा चुका है तो कैसे हाईकोर्ट दोबारा निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक का आदेश जारी कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यूटी प्रशासन की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले में हाईकोर्ट के 10 जून के आदेश पर रोक लगा दी है।