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वार्ड आरक्षण मामला: प्रशासन ने कहा- निगम चुनाव पर रोक लगाना सही नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 08 Nov 2016 12:48 AM IST
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नगर निगम, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ में नगर निगम के चुनाव में वार्डों को आरक्षित करने में अनियमितताओं के आरोपों को चंडीगढ़ प्रशासन ने खारिज कर दिया है। स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त सचिव ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि वार्ड आरक्षित करते हुए पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। तय प्रावधानों के अनुरूप ही सारा कार्य किया गया है। प्रशासन की ओर से कहा गया कि यह याचिका औचित्यविहीन है और ऐसे में इसे खारिज किया जाए।
प्रशासन की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि रोटेशन पॉलिसी के अनुरूप ही वार्ड आरक्षित हुए हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस स्थिति में चुनाव पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। प्रशासन ने यह भी कहा कि याची पक्ष की ओर से दलील दी जा रही थी कि उनकी रिप्रेजेंटेशन पर फैसला नहीं लिया गया है, जो सही नहीं है। प्रशासन अपनी ओर से रिप्रेजेंटेशन पर जवाब दे चुका है। जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन के इस जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए आगे कोई भी निर्देश न जारी कर सुनवाई 22 नवंबर तक स्थगित कर दी है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए डॉ. सतपाल गोयल व अन्य ने कहा कि आगामी निगम चुनावों के लिए वार्ड को आरक्षित करने की जो प्रक्त्रिस्या अपनाई जा रही है वह सही नहीं है। प्रशासन द्वारा 10 अक्तूबर की नोटिफिकेशन के माध्यम से कुछ वार्डों को आरक्षित करने का फैसला लिया गया है। याची ने कहा कि जो नोटिफिकेशन निकाली गई है वह राजनीतिक लाभ देने की मंशा से निकाली गई है।
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पूर्व में जिन वार्डों को आरक्षित घोषित किया गया था, अभी भी उन्हें आरक्षित श्रेणी में रखा गया है जो सही नहीं है। याची ने कहा कि वह सामान्य श्रेणी से हैं और अपने वार्ड से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वार्ड 23 को पहले अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया था अगले चुनाव में इसे महिला के लिए आरक्षित किया गया और इस बार इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
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प्रशासन की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि रोटेशन पॉलिसी के अनुरूप ही वार्ड आरक्षित हुए हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस स्थिति में चुनाव पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। प्रशासन ने यह भी कहा कि याची पक्ष की ओर से दलील दी जा रही थी कि उनकी रिप्रेजेंटेशन पर फैसला नहीं लिया गया है, जो सही नहीं है। प्रशासन अपनी ओर से रिप्रेजेंटेशन पर जवाब दे चुका है। जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन के इस जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए आगे कोई भी निर्देश न जारी कर सुनवाई 22 नवंबर तक स्थगित कर दी है।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए डॉ. सतपाल गोयल व अन्य ने कहा कि आगामी निगम चुनावों के लिए वार्ड को आरक्षित करने की जो प्रक्त्रिस्या अपनाई जा रही है वह सही नहीं है। प्रशासन द्वारा 10 अक्तूबर की नोटिफिकेशन के माध्यम से कुछ वार्डों को आरक्षित करने का फैसला लिया गया है। याची ने कहा कि जो नोटिफिकेशन निकाली गई है वह राजनीतिक लाभ देने की मंशा से निकाली गई है।
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पूर्व में जिन वार्डों को आरक्षित घोषित किया गया था, अभी भी उन्हें आरक्षित श्रेणी में रखा गया है जो सही नहीं है। याची ने कहा कि वह सामान्य श्रेणी से हैं और अपने वार्ड से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वार्ड 23 को पहले अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया था अगले चुनाव में इसे महिला के लिए आरक्षित किया गया और इस बार इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।