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Chandigarh News: 2002 में भर्ती एचसीएस अधिकारियों की उत्तर पुस्तिकाओं की ओरिजिनल काॅपी के लिए विजिलेंस को करना होगा इंतजार

Sat, 05 Oct 2024 08:22 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2024 08:22 PM IST
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Vigilance will have to wait for the original copies of answer sheets of HCS officers recruited in 2002.
सरकार ने कहा मामले में चालान पेश हो चुका है, एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए ओरिजिनल कापी जरूरी
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याचिकाकर्ता को प्रस्तुत किए गए चालान का अध्ययन करने के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवेदन करने की सलाह दी
हाईकोर्ट ने विजिलेंस की मांग पर कोई राहत ने देते हुए सुनवाई 27 नवंबर तक स्थगित की

चंडीगढ़। 2002 में चौटाला शासन काल में 65 एचसीएस अधिकारियों की नियुक्तियों का ओरिजनल रिकाॅर्ड मांगने की हरियाणा सरकार की मांग पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 27 नवंबर तक स्थगित कर दी है। इन अधिकारियों की उत्तर पुस्तिकाओं की ओरिजिनल काॅपी के लिए विजिलेंस को अब इंतजार करना होगा। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को जानकारी दी गई कि इस मामले में चालान पेश किया जा चुका है और एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए ओरिजिनल काॅपी जरूरी है, जो हाईकोर्ट के पास रिकाॅर्ड में रखी गई है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सलाह दी कि वह प्रस्तुत किए गए चालान का अध्ययन करने के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवेदन करे। इसी के साथ कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
यह मामला लगभग 22 साल से हाईकोर्ट में विचाराधीन है। 2002 में जब एचसीएस पदों के लिए नियुक्ति हुई थी, तब इन नियुक्तियों को कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। इस विवाद के हाईकोर्ट में आने के बाद इन उत्तर पुस्तिकाओं की ओरिजिनल काॅपी हाईकोर्ट में मंगवा ली थी। 2009 में विजिलेंस के अनुरोध पर उनकी फोटो कॉपी विजिलेंस को उपलब्ध करवाई गई थी। विजिलेंस ने एक अर्जी दायर कर 35 एचसीएस अधिकारियों की 54 उत्तर पुस्तिकाओं की ओरिजिनल काॅपी मांगी थी। अर्जी में विजिलेंस ने हाई कोर्ट को विश्वास दिलाया था कि लैब में इनकी जांच के बाद इसे हाईकोर्ट को वापस कर दिया जाएगा। मामले में विजिलेंस ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर कर कहा था कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए ओरिजनल उत्तर पुस्तिकाओं की जरूरत है। उत्तर पुस्तिकाओं में कांट-छांट, जोड़ना-घटाना, स्याही आदि की जांच फॉरेंसिक लैब में होगी तो जांच को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
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आरोप लगाए गए थे कि तत्कालीन चौटाला सरकार ने नियमों का उल्लंघन कर अपने चहेतों को नियुक्ति दे दी, जिनके परीक्षा में कम अंक थे।इन्हें इंटरव्यू में अधिक नंबर देकर नियुक्त कर दिया। मामले में की गई जांच में भी धांधली सामने आई थी। 2013 में हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन इसी बीच वह सुप्रीम कोर्ट चले गए और यह केस फिर सुनवाई पर आ गया। तब से लेकर अब तक हाईकोर्ट की विभिन्न खंडपीठों में इस केस की सुनवाई चलती रही।
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