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Punjab: 50 लाख रिश्वत मामले में फंसेंगे आईजी पीके यादव, विजिलेंस को मिले कई अहम सबूत, जल्द दर्ज होगा केस
Sat, 09 Sep 2023 10:15 AM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 09 Sep 2023 10:15 AM IST
सार
विजिलेंस की जांच में मोबाइल कॉल्स की डिटेल में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जांच टीम को ऑडियो रिकार्डिंग भी मिली है, जिसे जांच में शामिल किया गया है। इस केस में नामजद मलकीत दास सरकारी गवाह बन गया है। उसने अपने बयान कोर्ट में दर्ज करवा दिए हैं, जिससे केस की पूरी कहानी सामने आ गई है।
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पंजाब विजिलेंस ब्यूरो।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बहुचर्चित दयालदास हत्याकांड में 50 लाख की रिश्वत मांगने और 20 लाख वसूलने के मामले में फरीदकोट के आईजी पीके यादव के खिलाफ विजिलेंस जल्द केस दर्ज करने की तैयारी में है। विजिलेंस जांच में उनके खिलाफ कई पुख्ता सबूत सामने आए हैं। जांच के अनुसार रिश्वत का पूरा खेल आईजी पीके यादव और उनके अधीन अधिकारियों ने मिल कर खेला था।
विजिलेंस की जांच में मोबाइल कॉल्स की डिटेल में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जांच टीम को ऑडियो रिकार्डिंग भी मिली है, जिसे जांच में शामिल किया गया है। इस केस में नामजद मलकीत दास सरकारी गवाह बन गया है। उसने अपने बयान कोर्ट में दर्ज करवा दिए हैं, जिससे केस की पूरी कहानी सामने आ गई है। जांच में सामने आया है कि पैसों के मामले में मलकीत दास आईजी पीके यादव के पास गया था। डीएसपी ने एक बार फोन पर उसकी बात आईजी से करवाई थी।
यह भी पढ़ें: बड़ा खुलासा: आतंकी रिंदा के जरिये आईएसआई से जुड़ा था तस्कर अमरीक, दो सैनिकों से लिए थे योल कैंट के नक्शे
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यह है पूरा मामला
7 नवंबर, 2019 में मोगा के गांव कोटसुखिया में डेरा प्रमुख बाबा दयालदास की गोलियां मार कर हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपी गांव कपूरे (मोगा) के जरनैल दास को जांच में क्लीन चिट मिल गई थी। जरनैल दास को केस में दोबारा नामजद करने के लिए केस की जांच कर रहे फरीदकोट के एसपी गगनेश कुमार की अगुवाई वाली एसआईटी ने शिकायतकर्ता बाबा गगन दास से तत्कालीन आईजी फरीदकोट प्रदीप कुमार यादव के नाम पर 50 लाख की रिश्वत मांगी और 35 लाख में सौदा कर 20 लाख वसूल लिए। रिश्वत के बावजूद जब कार्रवाई नहीं हुई, तो शिकायतकर्ता ने पैसे मांगने शुरू कर दिए। पैसे वापस न मिलने पर गगन दास ने डीजीपी पंजाब से शिकायत कर दी। शिकायत पर पड़ताल के बाद एसपी गगनेश कुमार, डीएसपी सुशील कुमार व आईजी दफ्तर में तैनात रहे एसआई खेमचंद पराशर के अलावा दो अन्य लोगों महंत मलकीत दास व जसविंदर सिंह जस्सी ठेकेदार पर केस दर्ज हुआ और जांच विजिलेंस को सौंप दी गई।
जांच में सही पाई गई मोबाइल लोकेशन और कॉल्स डिटेल
अदालत में मलकीत दास ने बताया कि 20 लाख की रिश्वत का लेनदेन उसकी गोशाला में हुआ और पुलिस अधिकारियों ने यह पैसा वसूलने से पहले आईजी की उनसे फोन पर बात भी करवाई थी। जो समय और तारीख मलकीत दास ने बताई, वह विजिलेंस की जांच में सही साबित हुई। मोबाइल लोकेशन और कॉल्स डिटेल की जांच में सही पाई गईं।
15 लाख और लेने के लिए आईजी ने मलकीत को बुलाया था
आरोपी एसपी गगनेश कुमार, डीएसपी सुशील व एसआई की ओर से 20 लाख रुपये लेने के बाद आईजी ने मलकीत दास को अपने पास बुलाया था और तय सौदे के मुताबिक बाकी के 15 लाख गगन दास से लेकर बैंक से नोट बदलवा कर उन तक पहुंचाने को कहा था। विजिलेंस ने मलकीत दास के इस बयान की तहकीकात की तो यह तथ्य सही पाया गया। अब विजिलेंस किसी भी समय केस दर्ज कर सकती है।
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विजिलेंस की जांच में मोबाइल कॉल्स की डिटेल में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जांच टीम को ऑडियो रिकार्डिंग भी मिली है, जिसे जांच में शामिल किया गया है। इस केस में नामजद मलकीत दास सरकारी गवाह बन गया है। उसने अपने बयान कोर्ट में दर्ज करवा दिए हैं, जिससे केस की पूरी कहानी सामने आ गई है। जांच में सामने आया है कि पैसों के मामले में मलकीत दास आईजी पीके यादव के पास गया था। डीएसपी ने एक बार फोन पर उसकी बात आईजी से करवाई थी।
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यह है पूरा मामला
7 नवंबर, 2019 में मोगा के गांव कोटसुखिया में डेरा प्रमुख बाबा दयालदास की गोलियां मार कर हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपी गांव कपूरे (मोगा) के जरनैल दास को जांच में क्लीन चिट मिल गई थी। जरनैल दास को केस में दोबारा नामजद करने के लिए केस की जांच कर रहे फरीदकोट के एसपी गगनेश कुमार की अगुवाई वाली एसआईटी ने शिकायतकर्ता बाबा गगन दास से तत्कालीन आईजी फरीदकोट प्रदीप कुमार यादव के नाम पर 50 लाख की रिश्वत मांगी और 35 लाख में सौदा कर 20 लाख वसूल लिए। रिश्वत के बावजूद जब कार्रवाई नहीं हुई, तो शिकायतकर्ता ने पैसे मांगने शुरू कर दिए। पैसे वापस न मिलने पर गगन दास ने डीजीपी पंजाब से शिकायत कर दी। शिकायत पर पड़ताल के बाद एसपी गगनेश कुमार, डीएसपी सुशील कुमार व आईजी दफ्तर में तैनात रहे एसआई खेमचंद पराशर के अलावा दो अन्य लोगों महंत मलकीत दास व जसविंदर सिंह जस्सी ठेकेदार पर केस दर्ज हुआ और जांच विजिलेंस को सौंप दी गई।
जांच में सही पाई गई मोबाइल लोकेशन और कॉल्स डिटेल
अदालत में मलकीत दास ने बताया कि 20 लाख की रिश्वत का लेनदेन उसकी गोशाला में हुआ और पुलिस अधिकारियों ने यह पैसा वसूलने से पहले आईजी की उनसे फोन पर बात भी करवाई थी। जो समय और तारीख मलकीत दास ने बताई, वह विजिलेंस की जांच में सही साबित हुई। मोबाइल लोकेशन और कॉल्स डिटेल की जांच में सही पाई गईं।
15 लाख और लेने के लिए आईजी ने मलकीत को बुलाया था
आरोपी एसपी गगनेश कुमार, डीएसपी सुशील व एसआई की ओर से 20 लाख रुपये लेने के बाद आईजी ने मलकीत दास को अपने पास बुलाया था और तय सौदे के मुताबिक बाकी के 15 लाख गगन दास से लेकर बैंक से नोट बदलवा कर उन तक पहुंचाने को कहा था। विजिलेंस ने मलकीत दास के इस बयान की तहकीकात की तो यह तथ्य सही पाया गया। अब विजिलेंस किसी भी समय केस दर्ज कर सकती है।