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'बढ़ रहा मोदी का ग्राफ': किसान नेता की टिप्पणी पर बवाल.. हरियाणा के सीएम बोले-सच्चाई सामने आ रही है
Thu, 15 Feb 2024 08:51 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 15 Feb 2024 08:51 PM IST
सार
भारतीय किसान यूनियन एकता अपने नाम के साथ गैर राजनीतिक शब्द जोड़ती है, जिसके चलते उनके इस बयान पर अधिक सवाल उठ रहे हैं। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने किसान आंदोलन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट डालकर लोग बोल रहे हैं कि ये किसान आंदोलन की असल सच्चाई है। ये राजनीति से प्रेरित आंदोलन है।
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जगजीत डल्लेवाल
- फोटो : twitter
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विस्तार
किसान आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक किसान नेता का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसने नया सियासी संग्राम छेड़ दिया है। ये वीडियो भारतीय किसान यूनियन एकता के प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल का बताया जा रहा है।
वीडियो में किसान नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी कर रहे हैं। वीडियो में वह साथी किसानों के साथ आपसी बातचीत में कह रहे हैं कि उनके पास मौका बहुत थोड़ा है और मोदी का ग्राफ बहुत बड़ा हो गया है।
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उनके इस वीडियो से राजनीति गरमा गई है और सोशल मीडिया पर लोगों को भी किसानों को घेरने का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर लोग जमकर इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं। हालांकि ये साफ नहीं है कि ये वीडियो कब और किस जगह का है।
वीडियो में किसान नेता ये कहते हुए दिख रहे हैं कि राम मंदिर के कारण मोदी का ग्राफ बहुत ऊंचा चला गया है। ये नुक्सान है और इस ग्राफ को कैसे नीचे लाया जा सकता है। मैं बहुत बारी तैयारियां करवाते हुए गांव के लोगों को कहता था कि उनके पास मौका बहुत थोड़ा है और ग्राफ मोदी का बहुत बड़ा है। हमारे पास दिन बहुत थोड़े बचे हैं। ऐसे में इतने कम दिनों में क्या हम उनका ग्राफ कम कर सकते हैं।
भारतीय किसान यूनियन एकता अपने नाम के साथ गैर राजनीतिक शब्द जोड़ती है, जिसके चलते उनके इस बयान पर अधिक सवाल उठ रहे हैं। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने किसान आंदोलन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट डालकर लोग बोल रहे हैं कि ये किसान आंदोलन की असल सच्चाई है। ये राजनीति से प्रेरित आंदोलन है और 2024 लोकसभा चुनाव के लिए स्टेज तैयार की जा रही है। कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि पिछली बार किसानों के पास प्रदर्शन के लिए ठोस कारण था और पूरे देश भर से लोगों ने इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। चुनाव से दो माह पहले इस प्रदर्शन का कोई तुक नहीं है। ये लोग सिर्फ विपक्ष की लड़ाई लड़ रहे हैं।
पिछली बार किसान यूनियन ने लड़ा था पंजाब विधानसभा चुनाव
पिछली बार तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू किए गए किसान आंदोलन के पंजाब से अहम चेहरे बलबीर सिंह राजेवाल थे। उनका संगठन संयुक्त किसान मोर्चा अब राजनीतिक संगठन का रुप ले चुका है, क्योंकि आंदोलन समाप्त होने के बाद ही पंजाब में विधानसभा चुनाव आ गए थे।
राजेवाल ने विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। यही कारण है कि कुछ नेताओं ने इस संगठन से अलग होने का फैसला लिया और भारतीय किसान यूनियन एकता गैर राजनीतिक भी इसमें से एक है, जिसे जगजीत सिंह डल्लेवाल लीड कर रहे हैं। किसान यूनियनों के पिछले इतिहास को देखते हुए भी उनके इस प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं कि ये पूरा प्रदर्शन राजनीति से ही प्रेरित है।
पन्नू के वीडियो ने भी आंदोलन को पहुंचाया नुकसान
किसानों के दिल्ली कूच के फैसले के साथ ही सिख फॉर जस्टिस के खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू का भी आंदोलन को लेकर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह किसानों को भड़का रहे थे। उनके वीडियों ने भी किसानों के प्रदर्शन को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। वीडियो में पन्नू दिल्ली को फतेह करने का नारा लगा रहा था। वह किसानों को कह रहा था कि दिल्ली से मांगना बंद कर दिल्ली पर कब्जा करो और दिल्ली फतेह करो।
तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे वीडियो : गुरमनीत
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य गुरमनीत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन एकता के प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल ने यह कहा था कि राम मंदिर के कारण पीएम मोदी का ग्राफ बढ़ा है। ऐसे में अपनी इसी छवि को आगे बढ़ाते हुए उनको किसानों की सभी मांगों को पूरा करना चाहिए। पिछली बार सरकार की तरफ से भी इन मांगों पर सहमति जताई गई थी। कुछ लोग किसान नेता डल्लेवाल के वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं और उनके प्रदर्शन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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वीडियो में किसान नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी कर रहे हैं। वीडियो में वह साथी किसानों के साथ आपसी बातचीत में कह रहे हैं कि उनके पास मौका बहुत थोड़ा है और मोदी का ग्राफ बहुत बड़ा हो गया है।
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उनके इस वीडियो से राजनीति गरमा गई है और सोशल मीडिया पर लोगों को भी किसानों को घेरने का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर लोग जमकर इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं। हालांकि ये साफ नहीं है कि ये वीडियो कब और किस जगह का है।
वीडियो में किसान नेता ये कहते हुए दिख रहे हैं कि राम मंदिर के कारण मोदी का ग्राफ बहुत ऊंचा चला गया है। ये नुक्सान है और इस ग्राफ को कैसे नीचे लाया जा सकता है। मैं बहुत बारी तैयारियां करवाते हुए गांव के लोगों को कहता था कि उनके पास मौका बहुत थोड़ा है और ग्राफ मोदी का बहुत बड़ा है। हमारे पास दिन बहुत थोड़े बचे हैं। ऐसे में इतने कम दिनों में क्या हम उनका ग्राफ कम कर सकते हैं।
भारतीय किसान यूनियन एकता अपने नाम के साथ गैर राजनीतिक शब्द जोड़ती है, जिसके चलते उनके इस बयान पर अधिक सवाल उठ रहे हैं। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने किसान आंदोलन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट डालकर लोग बोल रहे हैं कि ये किसान आंदोलन की असल सच्चाई है। ये राजनीति से प्रेरित आंदोलन है और 2024 लोकसभा चुनाव के लिए स्टेज तैयार की जा रही है। कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि पिछली बार किसानों के पास प्रदर्शन के लिए ठोस कारण था और पूरे देश भर से लोगों ने इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। चुनाव से दो माह पहले इस प्रदर्शन का कोई तुक नहीं है। ये लोग सिर्फ विपक्ष की लड़ाई लड़ रहे हैं।
पिछली बार किसान यूनियन ने लड़ा था पंजाब विधानसभा चुनाव
पिछली बार तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू किए गए किसान आंदोलन के पंजाब से अहम चेहरे बलबीर सिंह राजेवाल थे। उनका संगठन संयुक्त किसान मोर्चा अब राजनीतिक संगठन का रुप ले चुका है, क्योंकि आंदोलन समाप्त होने के बाद ही पंजाब में विधानसभा चुनाव आ गए थे।
राजेवाल ने विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। यही कारण है कि कुछ नेताओं ने इस संगठन से अलग होने का फैसला लिया और भारतीय किसान यूनियन एकता गैर राजनीतिक भी इसमें से एक है, जिसे जगजीत सिंह डल्लेवाल लीड कर रहे हैं। किसान यूनियनों के पिछले इतिहास को देखते हुए भी उनके इस प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं कि ये पूरा प्रदर्शन राजनीति से ही प्रेरित है।
पन्नू के वीडियो ने भी आंदोलन को पहुंचाया नुकसान
किसानों के दिल्ली कूच के फैसले के साथ ही सिख फॉर जस्टिस के खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू का भी आंदोलन को लेकर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह किसानों को भड़का रहे थे। उनके वीडियों ने भी किसानों के प्रदर्शन को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। वीडियो में पन्नू दिल्ली को फतेह करने का नारा लगा रहा था। वह किसानों को कह रहा था कि दिल्ली से मांगना बंद कर दिल्ली पर कब्जा करो और दिल्ली फतेह करो।
तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे वीडियो : गुरमनीत
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य गुरमनीत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन एकता के प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल ने यह कहा था कि राम मंदिर के कारण पीएम मोदी का ग्राफ बढ़ा है। ऐसे में अपनी इसी छवि को आगे बढ़ाते हुए उनको किसानों की सभी मांगों को पूरा करना चाहिए। पिछली बार सरकार की तरफ से भी इन मांगों पर सहमति जताई गई थी। कुछ लोग किसान नेता डल्लेवाल के वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं और उनके प्रदर्शन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
मोदी का ग्राफ नीचे नहीं आएगा बल्कि बढ़ेगा
पीएम मोदी का ग्राफ नीचे लाने वाले बयान पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा कि इससे उनकी (डल्लेवाल) की सोच का पता चलता है। यह एक राजनीतिक बयान है। जिस तरह से वह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्या उससे पीएम मोदी का समर्थन करना लोग बंद कर देंगे, बल्कि उनका समर्थन बढ़ेगा। क्योंकि उनकी सच्चाई सबके सामने आ रही है और लोग भी उनके तरीके को पसंद नहीं कर रहे हैं।
पीएम मोदी का ग्राफ नीचे लाने वाले बयान पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा कि इससे उनकी (डल्लेवाल) की सोच का पता चलता है। यह एक राजनीतिक बयान है। जिस तरह से वह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्या उससे पीएम मोदी का समर्थन करना लोग बंद कर देंगे, बल्कि उनका समर्थन बढ़ेगा। क्योंकि उनकी सच्चाई सबके सामने आ रही है और लोग भी उनके तरीके को पसंद नहीं कर रहे हैं।