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SYL Dispute: आप बोली- बादल-देवीलाल में हुआ था सौदा, अकाली दल का पलटवार-कांग्रेस के हाथों में न खेले सरकार
Fri, 13 Oct 2023 11:13 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 13 Oct 2023 11:13 AM IST
सार
एसवाईएल पर पंजाब को सुप्रीम कोर्ट से फटकार के बाद से प्रदेश में राजनीति गरमाई हुई है। आम आदमी पार्टी के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोला हुआ है, वहीं सरकार भी अपने बचाव में इतिहास से दस्तावेज निकाल कर लोगों के सामने रख रही है।
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एसवाईएल पर आप और अकाली दल के बीच जुबानी जंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे पर इन दिनों पंजाब में राजनीति गरमाई हुई है। आम आदमी पार्टी पंजाब ने इस मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को घेरते हुए आरोप लगाया है कि पंजाब में एसवाईएल की नींव प्रकाश सिंह बादल और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवीलाल ने मिलकर रखी। दोनों नेताओं के बीच इसके लिए सौदेबाजी भी हुई थी।
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यह भी पढ़ें: Punjab: पूर्व कांग्रेस विधायक कुलबीर जीरा पर केस दर्ज, जबरन बीडीपीओ दफ्तर में घुस सरकारी काम में डाली थी बाधा
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पंजाब आप के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ सीएम भगवंत मान द्वारा आमंत्रित बहस से पीछे हट गए हैं क्योंकि वह संभवतः अपनी पूर्व या वर्तमान पार्टी और सभी में उनकी भूमिका का बचाव नहीं कर सके। कंग ने कहा कि शिअद के नेता कुछ दिन पहले चंडीगढ़ की सड़कों पर ड्रामा करते हुए कह रहे थे कि वे पंजाब के पानी की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने देंगे और एसवाईएल नहर का निर्माण नहीं होने देंगे।
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इसके जवाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अब एसवाईएल नहर के जरिये रावी-ब्यास का पानी हरियाणा को देने के उद्देश्य से केंद्रीय सर्वेक्षण को सफल बनाने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। शिअद की ओर से कहा गया है कि मुख्यमंत्री यह सब कुछ आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के कहने पर कर रहे हैं।
कंग ने दिखाए पुराने दस्तावेज
आप प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 20 फरवरी, 1978 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भूमि अधिग्रहण विधेयक की धारा 4 के तहत एसवाईएल के लिए भूमि अधिग्रहण करने की अधिसूचना जारी की। उनके समकक्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने उनके साथ अपनी दोस्ती की प्रशंसा की। उस दोस्ती की बदौलत उन्होंने प्रकाश सिंह बादल को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करने के लिए राजी किया। कंग ने कहा कि नोटिफिकेशन पंजाब सरकार के रिकॉर्ड में है और देवीलाल का भाषण हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड में है।
कंग ने कहा कि हर कोई जानता है कि बादल परिवार ने व्यक्तिगत लाभ के लिए ऐसा किया। बालासर फॉर्म हाउस और गुरुग्राम का फाइव स्टार होटल उसी डील का नतीजा है। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल पंजाब की स्थिति और अधिकारों से भलीभांति परिचित थे। अकाली दल ने 1972 में आनंदपुर साहिब (आनंदपुर दा मता के नाम से प्रसिद्ध) का प्रस्ताव पारित किया लेकिन बार-बार बादल परिवार पंजाब और उसके अधिकारों की कीमत पर अपने निजी हितों को बढ़ावा दिया।
पंजाब ने किया था भूमि अधिग्रहण का विरोध
कंग ने कहा कि पंजाब के लोगों ने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया और पंजाब के हजारों बेटों ने पंजाब के अधिकार और पानी की रक्षा के लिए जान दे दी। उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बच्चे उस समय अमेरिका में थे, जब यहां पंजाब का युवा अपनी जमीन और पानी को बचाने के लिए मर रहा था। इसी तरह, कृषि कानूनों के समय बतौर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, शिअद ने किसान विरोधी बिलों पर हस्ताक्षर किए। हालांकि बाद में उन बिलों के खिलाफ किसानों के आंदोलन की ताकत को देखते हुए सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
आप प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 20 फरवरी, 1978 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भूमि अधिग्रहण विधेयक की धारा 4 के तहत एसवाईएल के लिए भूमि अधिग्रहण करने की अधिसूचना जारी की। उनके समकक्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने उनके साथ अपनी दोस्ती की प्रशंसा की। उस दोस्ती की बदौलत उन्होंने प्रकाश सिंह बादल को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करने के लिए राजी किया। कंग ने कहा कि नोटिफिकेशन पंजाब सरकार के रिकॉर्ड में है और देवीलाल का भाषण हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड में है।
कंग ने कहा कि हर कोई जानता है कि बादल परिवार ने व्यक्तिगत लाभ के लिए ऐसा किया। बालासर फॉर्म हाउस और गुरुग्राम का फाइव स्टार होटल उसी डील का नतीजा है। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल पंजाब की स्थिति और अधिकारों से भलीभांति परिचित थे। अकाली दल ने 1972 में आनंदपुर साहिब (आनंदपुर दा मता के नाम से प्रसिद्ध) का प्रस्ताव पारित किया लेकिन बार-बार बादल परिवार पंजाब और उसके अधिकारों की कीमत पर अपने निजी हितों को बढ़ावा दिया।
पंजाब ने किया था भूमि अधिग्रहण का विरोध
कंग ने कहा कि पंजाब के लोगों ने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया और पंजाब के हजारों बेटों ने पंजाब के अधिकार और पानी की रक्षा के लिए जान दे दी। उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बच्चे उस समय अमेरिका में थे, जब यहां पंजाब का युवा अपनी जमीन और पानी को बचाने के लिए मर रहा था। इसी तरह, कृषि कानूनों के समय बतौर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, शिअद ने किसान विरोधी बिलों पर हस्ताक्षर किए। हालांकि बाद में उन बिलों के खिलाफ किसानों के आंदोलन की ताकत को देखते हुए सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
अकाली दल बोला-कांग्रेस के सारे अन्याय भूली आप
अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि आप सरकार कांग्रेस द्वारा पंजाब से किए सभी ऐतिहासिक अन्यायों को भूल गई है। भले ही वह 1955 में अपनी नदियों का आधा पानी राजस्थान को देना हो या बाकी बचे पानी का आधा हिस्सा हरियाणा को देने का फैसला हो या 1981,1982 में एसवाईएल की खुदाई का निर्माण और उद्घाटन का निर्णय हो। उन्होंने कहा कि इन अन्यायों का जिक्र करने के साथ-साथ पंजाबियों को यह बताने के बजाय कि वह सुप्रीम कोर्ट में राज्य के मामले का बचाव करने में क्यों विफल रही, आप सरकार ने अकाली दल के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया है। यह राज्य के हित में नहीं है क्योंकि यह पंजाब विरोधी पार्टियों के हाथों में खेलने के समान है जो हमारी नदियों के पानी को छीनना चाहते हैं।
डा. चीमा ने शिअद को बदनाम करने के लिए विधानसभा में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल के भाषण के एक पेज का दस्तावेज का उपयोग करने के लिए भी आप की निंदा की। उन्होंने कहा कि भाषण, जो हरियाणा के विधायकों के लिए दिया गया था, में केवल भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत तीन गांवों में जमीन अधिग्रहण करने की पंजाब सरकार की मंशा के बारे में बात की गई थी। उन्होंने कहा कि आप सरकार भूल गई कि एसवाईएल 122 किलोमीटर में बनाई गई थी और इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी 1977 में ज्ञानी जैल सिंह ने दी थी और इस अवधि के दौरान ज्ञानी जैल सिंह को हरियाणा से एक करोड़ रुपये भी मिले थे।
बादल ने अपने कार्यकाल में नहीं बनने दी नहर
डॉ. चीमा ने कहा कि 1978 में सत्ता संभालने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारा 78 को चुनौती दी थी, जो केंद्र को पंजाब व हरियाणा के बीच नदी जल आवंटित करने की शक्ति देती थी। उन्होंने कहा कि बादल ने भी अपने मुख्यमंत्री काल में एसवाईएल नहर का निर्माण नहीं होने दिया और 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा परियोजना के काम का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कपूरी गांव में एसवाईएल का निर्माण रोकने के लिए एक मोर्चा भी शुरू किया। यह सब रिकॉर्ड का हिस्सा है और स्पष्ट होता है कि बादल दरिया के पानी के असली रक्षक थे।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि आप सरकार कांग्रेस द्वारा पंजाब से किए सभी ऐतिहासिक अन्यायों को भूल गई है। भले ही वह 1955 में अपनी नदियों का आधा पानी राजस्थान को देना हो या बाकी बचे पानी का आधा हिस्सा हरियाणा को देने का फैसला हो या 1981,1982 में एसवाईएल की खुदाई का निर्माण और उद्घाटन का निर्णय हो। उन्होंने कहा कि इन अन्यायों का जिक्र करने के साथ-साथ पंजाबियों को यह बताने के बजाय कि वह सुप्रीम कोर्ट में राज्य के मामले का बचाव करने में क्यों विफल रही, आप सरकार ने अकाली दल के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया है। यह राज्य के हित में नहीं है क्योंकि यह पंजाब विरोधी पार्टियों के हाथों में खेलने के समान है जो हमारी नदियों के पानी को छीनना चाहते हैं।
डा. चीमा ने शिअद को बदनाम करने के लिए विधानसभा में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल के भाषण के एक पेज का दस्तावेज का उपयोग करने के लिए भी आप की निंदा की। उन्होंने कहा कि भाषण, जो हरियाणा के विधायकों के लिए दिया गया था, में केवल भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत तीन गांवों में जमीन अधिग्रहण करने की पंजाब सरकार की मंशा के बारे में बात की गई थी। उन्होंने कहा कि आप सरकार भूल गई कि एसवाईएल 122 किलोमीटर में बनाई गई थी और इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी 1977 में ज्ञानी जैल सिंह ने दी थी और इस अवधि के दौरान ज्ञानी जैल सिंह को हरियाणा से एक करोड़ रुपये भी मिले थे।
बादल ने अपने कार्यकाल में नहीं बनने दी नहर
डॉ. चीमा ने कहा कि 1978 में सत्ता संभालने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारा 78 को चुनौती दी थी, जो केंद्र को पंजाब व हरियाणा के बीच नदी जल आवंटित करने की शक्ति देती थी। उन्होंने कहा कि बादल ने भी अपने मुख्यमंत्री काल में एसवाईएल नहर का निर्माण नहीं होने दिया और 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा परियोजना के काम का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कपूरी गांव में एसवाईएल का निर्माण रोकने के लिए एक मोर्चा भी शुरू किया। यह सब रिकॉर्ड का हिस्सा है और स्पष्ट होता है कि बादल दरिया के पानी के असली रक्षक थे।