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चंडीगढ़ पहुंचे वैंकेंया नायडू, बोले- मेट्रो प्रोजेक्ट रोकने को हमने नहीं लिखी चिट्ठी
विशाल पाठक/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 29 Apr 2017 09:38 AM IST
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वेंकैया नायडू
- फोटो : File Photo
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प्रशासनिक लापरवाही के शिकार मेट्रो प्रोजेक्ट पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेंया नायडू के सकारात्मक बयान से एक उम्मीद की किरण जगी है। शुक्रवार को हरियाणा सरकार के एक कार्यक्रम में पहुंचे नायडू ने कहा कि केंद्र सरकार मेट्रो प्रोजेक्ट के प्रति गंभीर है।
केंद्र सरकार हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर लगातार बातचीत कर इसे शुरू करने के लिए प्रयासरत है। केंद्र की कोशिश है कि चंडीगढ़ में मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए नई रूपरेखा बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मेट्रो प्रोजेक्ट को रोके जाने संबंधी कोई कोई चिट्ठी चंडीगढ़ प्रशासन को नहीं भेजी है। जबकि केंद्र सरकार लगातार हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए नए विकल्प खोजने के लिए कहती आई है।
सांसद किरण ने मेट्रो पर जताया था विरोध
शहर की सांसद किरण खेर कई बार फ्रंट पर आकर मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध कर चुकी हैं। खेर ने मेट्रो प्रोेजेक्ट को शहर के ढांचे के मुताबिक गलत ठहराया है। सांसद किरण खेर शुरू से ही मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए खिलाफ रही हैं। उनका मानना है कि इससे शहर की सुंदरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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मेट्रो प्रोजेक्ट पर यहां फंसा था पेंच
अगस्त 2016 में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के अधिकारियों के बीच अंतिम बैठक हुई थी। मेट्रो प्रोजेक्ट में प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण पेंच फंस गया था। सबसे बड़ी खामी यूटी प्रशासन की रही। वह इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पाया, जबकि यूटी प्रशासन के पास इस समय 600 एकड़ जमीन पड़ी है। जमीन नहीं देने की स्थिति पर यूटी को सालाना एक हजार करोड़ रुपये मेट्रो प्रोजेक्ट केलिए देने को कहा था।
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केंद्र सरकार हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर लगातार बातचीत कर इसे शुरू करने के लिए प्रयासरत है। केंद्र की कोशिश है कि चंडीगढ़ में मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए नई रूपरेखा बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मेट्रो प्रोजेक्ट को रोके जाने संबंधी कोई कोई चिट्ठी चंडीगढ़ प्रशासन को नहीं भेजी है। जबकि केंद्र सरकार लगातार हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए नए विकल्प खोजने के लिए कहती आई है।
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सांसद किरण ने मेट्रो पर जताया था विरोध
शहर की सांसद किरण खेर कई बार फ्रंट पर आकर मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध कर चुकी हैं। खेर ने मेट्रो प्रोेजेक्ट को शहर के ढांचे के मुताबिक गलत ठहराया है। सांसद किरण खेर शुरू से ही मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए खिलाफ रही हैं। उनका मानना है कि इससे शहर की सुंदरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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मेट्रो प्रोजेक्ट पर यहां फंसा था पेंच
अगस्त 2016 में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के अधिकारियों के बीच अंतिम बैठक हुई थी। मेट्रो प्रोजेक्ट में प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण पेंच फंस गया था। सबसे बड़ी खामी यूटी प्रशासन की रही। वह इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पाया, जबकि यूटी प्रशासन के पास इस समय 600 एकड़ जमीन पड़ी है। जमीन नहीं देने की स्थिति पर यूटी को सालाना एक हजार करोड़ रुपये मेट्रो प्रोजेक्ट केलिए देने को कहा था।
इसलिए जरूरी है मेट्रो
मेट्रो प्रोजेक्ट पर दस साल में भी नहीं बन पाई सहमति
मेट्रो प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है। डीपीआर फाइनल होने के बाद वर्ष 2016 में इसका ग्राउंड लेवल पर काम शुरू होना था और 2021 में काम पूरा हो जाना था। लेकिन जुलाई बीतने के बाद अब तक डीपीआर ही फाइनल नहीं हो पाई है। जिस कारण ग्राउंड लेवल पर काम भी नहीं शुरू हो पाया है। इस देरी के चक्कर में एस्टीमेट बजट भी 10 हजार 909 करोड़ से 13 हजार 900 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
इसलिए जरूरी है मेट्रो
1.चंडीगढ़ में हर महीने औसत चार हजार नए वाहन सड़क पर उतरते हैं।
2.ट्राइसिटी की सड़कों पर ट्रैफिक लोड बढ़ता जा रहा है।
3.जाम से छुटकारा पाने के लिए।
4. ट्राइसिटी के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए।
वर्ष 2008 में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर कमेटी बनाई गई थी, राइट्स नाम की कंपनी ने भी अपनी सर्वे रिपोर्ट में मेट्रो को बेहद जरूरी बताया था। लेकिन प्रशासन व मौजूदा सरकार के चलते मेट्रो प्रोजेक्ट अधर में पड़ गया है। मेट्रो से ही शहर को प्रदूषण व जाम मुक्त रखा जा सकता है।
प्रदीप छाबड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस।
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा ने कभी भी कदम पीछे नहीं हटाए , इस पर केंद्र सरकार को हमारी ओर से पूरी सहमति दी गई है।
डीएस ढेसी,चीफ सेक्रेटरी, हरियाणा।
मेट्रो प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है। डीपीआर फाइनल होने के बाद वर्ष 2016 में इसका ग्राउंड लेवल पर काम शुरू होना था और 2021 में काम पूरा हो जाना था। लेकिन जुलाई बीतने के बाद अब तक डीपीआर ही फाइनल नहीं हो पाई है। जिस कारण ग्राउंड लेवल पर काम भी नहीं शुरू हो पाया है। इस देरी के चक्कर में एस्टीमेट बजट भी 10 हजार 909 करोड़ से 13 हजार 900 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
इसलिए जरूरी है मेट्रो
1.चंडीगढ़ में हर महीने औसत चार हजार नए वाहन सड़क पर उतरते हैं।
2.ट्राइसिटी की सड़कों पर ट्रैफिक लोड बढ़ता जा रहा है।
3.जाम से छुटकारा पाने के लिए।
4. ट्राइसिटी के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए।
वर्ष 2008 में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर कमेटी बनाई गई थी, राइट्स नाम की कंपनी ने भी अपनी सर्वे रिपोर्ट में मेट्रो को बेहद जरूरी बताया था। लेकिन प्रशासन व मौजूदा सरकार के चलते मेट्रो प्रोजेक्ट अधर में पड़ गया है। मेट्रो से ही शहर को प्रदूषण व जाम मुक्त रखा जा सकता है।
प्रदीप छाबड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस।
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा ने कभी भी कदम पीछे नहीं हटाए , इस पर केंद्र सरकार को हमारी ओर से पूरी सहमति दी गई है।
डीएस ढेसी,चीफ सेक्रेटरी, हरियाणा।