वाड्रा लैंड डील: हरियाणा सरकार से जवाब-जलब
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हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले राबर्ट वाड्रा लैंड डील का मुद्दा फिर से प्रदेश में राजनीति का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने हरियाणा सरकार से इस मामले में जवाब तलब कर लिया है। चकबंदी और राजस्व विभाग के अधिकारी अब जवाब तैयार करने में जुट गए हैं।
उधर, इस मामले का राजनीतिकरण होता देख गुड़गांव के डीसी शेखर विद्यार्थी ने इस प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया है। लिहाजा इस मामले में आईएएस अशोक खेमका के आदेश सही हैं या गुड़गांव के डीसी का हस्तक्षेप, इस बारे में चर्चा शुरू होने की बजाए सरकारी अमला अपने बचाव में जुट गया है।
गुड़गांव के डीसी शेखर विद्यार्थी का कहना है कि उनकी इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। यह मामला चकबंदी अधिकारी से संबंधित है। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से कोई आदेश नहीं दिया गया है। शेखर ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव को रिपोर्ट भेजकर एक पोस्टमैन की भूमिका अदा की थी। चकबंदी के मामलों में निर्णय लेने के अधिकार उपायुक्त के पास नहीं होते हैं।
चुनाव आयोग पहुंचा 'लैंड डील'
चुनाव आयोग इस मामले में यह देखना चाह रहा है कि आदेश 16 जुलाई के हैं या उसके बाद के। हरियाणा में 12 सितंबर से चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।
मामले पर पीके गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व ने बताया कि मुझसे इस संदर्भ में चुनाव आयोग ने रिपोर्ट मांगी है। हम अतिशीघ्र अपनी रिपोर्ट आयोग को भेज देंगे।
वहीं मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत वालगद के अनुसार अभी तक की जानकारी से हमें पता चला है कि आदेश 14 जुलाई के हैं। यदि हरियाणा में आचार संहिता लागू होने के दौरान कोई आदेश दिए गए हैं तो यह मामला चुनाव आयोग के कार्यक्षेत्र का बनेगा। अन्यथा हम इस मामले में क्या हस्तक्षेप करेंगे?