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Chandigarh News: बाल यौन शोषण मामलों में एमएलआर के लिए नए प्रारुप का करें प्रयोग
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चंडीगढ़। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सदस्य प्रीति भारद्वाज दलाल ने सोमवार को चंडीगढ़ का दौरा किया। सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में बाल अधिकारों की समीक्षा बैठक में उन्होंने विभिन्न विभागों को बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में कई दिशा-निर्देश दिए। उनके साथ उनके सलाहकारों की टीम संदीप चौधरी, स्वर्णिमा पांडे और रितु टंडन भी मौजूद रहीं।
बैठक के दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, किशोर न्याय, बाल श्रम, यौन शोषण और बाल विवाह से सुरक्षा जैसे विषयों पर हो रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों में मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) तैयार करते समय एम्स की तरफ से विकसित और अपनाए गए प्रारूप का उपयोग किया जाए। यह प्रारूप न केवल विस्तृत है, बल्कि इसमें पीड़ित की शारीरिक और मानसिक स्थिति से संबंधित सभी आवश्यक तथ्यों को वैज्ञानिक और संवेदनशील तरीके से दर्ज करने की व्यवस्था है। यह प्रारूप चिकित्सकों को रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भी आवश्यक जानकारी को छोड़ने से रोकता है और जांच एजेंसियों को साक्ष्य जुटाने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होता है। दलाल ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर बल देते हुए कहा कि इससे बाल संरक्षण तंत्र और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
लोक अभियोजकों को पॉक्सो अधिनियम की धाराओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए
उन्होंने शिक्षा विभाग को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया। इसके अलावा यह भी निर्देश दिए कि बलात्कार के मामलों को संभालने वाले विशेष लोक अभियोजकों को पॉक्सो अधिनियम की धाराओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। दौरे के अंत में एक शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बाल विवाह रोकथाम को लेकर एनसीपीसीआर की ओर से संकल्प दिलाया गया। बैठक में सीसीपीसीआर की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल, समाज कल्याण विभाग की निदेशक डॉ. पलिका अरोड़ा व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक के दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, किशोर न्याय, बाल श्रम, यौन शोषण और बाल विवाह से सुरक्षा जैसे विषयों पर हो रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों में मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) तैयार करते समय एम्स की तरफ से विकसित और अपनाए गए प्रारूप का उपयोग किया जाए। यह प्रारूप न केवल विस्तृत है, बल्कि इसमें पीड़ित की शारीरिक और मानसिक स्थिति से संबंधित सभी आवश्यक तथ्यों को वैज्ञानिक और संवेदनशील तरीके से दर्ज करने की व्यवस्था है। यह प्रारूप चिकित्सकों को रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भी आवश्यक जानकारी को छोड़ने से रोकता है और जांच एजेंसियों को साक्ष्य जुटाने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होता है। दलाल ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर बल देते हुए कहा कि इससे बाल संरक्षण तंत्र और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
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लोक अभियोजकों को पॉक्सो अधिनियम की धाराओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए
उन्होंने शिक्षा विभाग को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया। इसके अलावा यह भी निर्देश दिए कि बलात्कार के मामलों को संभालने वाले विशेष लोक अभियोजकों को पॉक्सो अधिनियम की धाराओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। दौरे के अंत में एक शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बाल विवाह रोकथाम को लेकर एनसीपीसीआर की ओर से संकल्प दिलाया गया। बैठक में सीसीपीसीआर की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल, समाज कल्याण विभाग की निदेशक डॉ. पलिका अरोड़ा व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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