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Chandigarh News: बिना जानकारी एंटीबायोटिक का सेवन कहीं गंभीर बीमारी का इलाज मुश्किल न कर दे
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चंडीगढ़। बिना सोचे समझे एंटीबायोटिक लेने से बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए दी जाने वाली दवाओं का असर कम होता जा रहा है। इस स्थिति को माइक्रोबॉयल रेजिस्टेंस कहा जाता है। मौजूदा समय में कई एंटीबायोटिक दवाइयां संक्रमण पर असरदार साबित नहीं हो रही है। यह कहना है पीजीआई के क्लीनिकल फार्मोकोलॉजी यूनिट की डॉ. नुसरत शफीक का। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक से होने वाले फायदे और नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 18 से 24 नवंबर तक वर्ल्ड एंटीबायोटिक अवेयरनेस वीक मनाया जाता है, जिसे इस बार एंटी माइक्रोबॉयल रेजिस्टेंस अवेयरनेस वीक के रूप में मनाया जा रहा है। इस बार की थीम सब मिलकर प्रिवेंशन की तरफ ध्यान दें रखा गया है।
डॉ. नुसरत ने बताया कि बैक्टीरियल संक्रमण को रोकने और इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयां एंटीबायोटिक हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है, जब इन दवाइयों के उपयोग के जवाब में बैक्टीरिया अपना स्वरूप बदल लेता है। कोई एक प्रकार का एंटीबायोटिक नहीं है, जो हर प्रकार के संक्रमण को ठीक कर सकता हो। एंटीबायोटिक मुख्य रूप से बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों का इलाज करते हैं या तो बैक्टीरिया को मार देते हैं या फिर इस बढ़ने से बचाते हैं। जरूरत से ज्यादा, हाई पावर या गलत एंटीबायोटिक का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे डायरिया जैसी पेट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही कई अन्य परेशानियां जैसे इंफेक्शन का जल्दी ठीक न होना और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का विकसित होना शामिल है। बिना डॉक्टर की सलाह के ली जाने वाले एंटीबायोटिक दवाओं से सबसे प्रभावशाली एंटीबायोटिक दवाइयों का भी बैक्टीरिया पर असर होना बंद हो जाता है। यह बैक्टीरिया अपने आप को इस तरह बदल लेते हैं कि दवाई का उन पर असर ही नहीं होता या बहुत कम असर होता है।
संक्रमण के कारण को ही रोक दें
डॉ. नुसरत का कहना है की एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति जागरूकता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि संक्रमण की स्थिति को ही उत्पन्न न होने दिया जाए। जिससे एंटीबायोटिक लेने की नौबत ना आ सके। इसके लिए हाथ धोने की आदत डालें, साफ पानी पिएं, मानक के अनुसार टीकाकरण, संक्रमण की स्थिति में मास्क पहनें आदि। इसके साथ ही खेतों और खाद्य उद्योग परिसरों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण को मजबूत करना, स्वच्छता और स्वच्छता तक पहुंच सुनिश्चित करना, खाद्य एवं कृषि उत्पादन में सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करना और संबंधित उद्योगों से अपशिष्ट और अपशिष्ट जल के ठोस प्रबंधन को सुनिश्चित करना शामिल है।
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इन स्थितियों में एंटी-माइक्रोबॉयल का साइड-इफेक्ट दिख सकता है
- सही समय पर दवाएं न लेना।
- अपने मुताबिक दवाओं की डोज बढ़ाना और कम करना।
- बिना डॉक्टरी सलाह के दवाओं का सेवन करना।
-एंटी-बायोटिक्स से जुड़ी गलतियां।
-सर्दी-जुकाम होने पर पहले दिन से एंटीबायोटिक दवा लेने पर।
-बिना डॉक्टरी सलाह के घर पर रखी दवाओं का सेवन करना।
- वायरल इंफेक्शन होने पर एंटी-माइक्रोबॉयल दवाओं का सेवन करना।
- डॉक्टर की ओर से दी जाने वाली दवाओं का सेवन समय पर न करना।
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डॉ. नुसरत ने बताया कि बैक्टीरियल संक्रमण को रोकने और इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयां एंटीबायोटिक हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है, जब इन दवाइयों के उपयोग के जवाब में बैक्टीरिया अपना स्वरूप बदल लेता है। कोई एक प्रकार का एंटीबायोटिक नहीं है, जो हर प्रकार के संक्रमण को ठीक कर सकता हो। एंटीबायोटिक मुख्य रूप से बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों का इलाज करते हैं या तो बैक्टीरिया को मार देते हैं या फिर इस बढ़ने से बचाते हैं। जरूरत से ज्यादा, हाई पावर या गलत एंटीबायोटिक का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे डायरिया जैसी पेट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही कई अन्य परेशानियां जैसे इंफेक्शन का जल्दी ठीक न होना और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का विकसित होना शामिल है। बिना डॉक्टर की सलाह के ली जाने वाले एंटीबायोटिक दवाओं से सबसे प्रभावशाली एंटीबायोटिक दवाइयों का भी बैक्टीरिया पर असर होना बंद हो जाता है। यह बैक्टीरिया अपने आप को इस तरह बदल लेते हैं कि दवाई का उन पर असर ही नहीं होता या बहुत कम असर होता है।
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संक्रमण के कारण को ही रोक दें
डॉ. नुसरत का कहना है की एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति जागरूकता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि संक्रमण की स्थिति को ही उत्पन्न न होने दिया जाए। जिससे एंटीबायोटिक लेने की नौबत ना आ सके। इसके लिए हाथ धोने की आदत डालें, साफ पानी पिएं, मानक के अनुसार टीकाकरण, संक्रमण की स्थिति में मास्क पहनें आदि। इसके साथ ही खेतों और खाद्य उद्योग परिसरों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण को मजबूत करना, स्वच्छता और स्वच्छता तक पहुंच सुनिश्चित करना, खाद्य एवं कृषि उत्पादन में सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करना और संबंधित उद्योगों से अपशिष्ट और अपशिष्ट जल के ठोस प्रबंधन को सुनिश्चित करना शामिल है।
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इन स्थितियों में एंटी-माइक्रोबॉयल का साइड-इफेक्ट दिख सकता है
- सही समय पर दवाएं न लेना।
- अपने मुताबिक दवाओं की डोज बढ़ाना और कम करना।
- बिना डॉक्टरी सलाह के दवाओं का सेवन करना।
-एंटी-बायोटिक्स से जुड़ी गलतियां।
-सर्दी-जुकाम होने पर पहले दिन से एंटीबायोटिक दवा लेने पर।
-बिना डॉक्टरी सलाह के घर पर रखी दवाओं का सेवन करना।
- वायरल इंफेक्शन होने पर एंटी-माइक्रोबॉयल दवाओं का सेवन करना।
- डॉक्टर की ओर से दी जाने वाली दवाओं का सेवन समय पर न करना।