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Chandigarh News: 116 करोड़ के स्मार्ट सिटी घोटाले पर निगम सदन में हंगामा, सीबीआई जांच की सिफारिश
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चंडीगढ़। नगर निगम सदन की बुधवार को मेयर सौरभ जोशी की अध्यक्षता में सदन की 360वीं बैठक 116 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी घोटाले का मुद्दा जोर-शोर से उठा। इस मामले को लेकर सदन में तीखा हंगामा हुआ और अधिकारियों की लापरवाही भी खुलकर सामने आई। सभी दलों के पार्षदों ने एकमत से इस प्रकरण की सीबीआई जांच की सिफारिश की जिसे मेयर ने हाथ उठाकर पारित करवा दिया। अब इस पर अंतिम निर्णय यूटी प्रशासन को लेना है।
बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षद नारे लिखे प्लेकार्ड लेकर पहुंचे और घोटाले के विरोध में नारेबाजी की। पार्षदों के तीखे सवालों के सामने अधिकारी जवाब देने में असहज नजर आए। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने माना कि मामले में लापरवाही हुई है और जांच जारी है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण का स्पेशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। सदन की बैठक में करीब 37 करोड़ के विकास कार्य पास हुए।
डेटा एंट्री ऑपरेटर को कैसे मिली वित्तीय ताकत? तरुणा मेहता के सवालों पर घिरे अधिकारी
पूर्व डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ने कई अहम सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कांट्रैक्टर के डेटा एंट्री ऑपरेटर को इतनी बड़ी वित्तीय शक्ति किसने दी और उसके मोबाइल पर बैंक का ओटीपी कैसे आ रहा था। इस पर अकाउंट अफसर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। मेहता ने दोषियों को बचाने के बजाय सख्त कार्रवाई की मांग की। कमिश्नर ने बताया कि संबंधित अकाउंट अफसर के खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। तरुणा मेहता ने यह भी सवाल उठाया कि जब तीन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी तो तीसरे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस पर कमिश्नर ने बताया कि संबंधित अधिकारी यूटी फाइनेंस डिपार्टमेंट से जुड़ा है और वहां कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। पार्षद गुरबक्श रावत ने भी कड़े तेवर दिखाए।
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बैठक के दौरान मेयर सौरभ जोशी के निर्देश पर इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र सदन में रखा गया लेकिन पार्षदों का आक्रोश कम नहीं हुआ। जीरो आवर्स में भी इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। एफडी और ब्याज को लेकर भी अधिकारी स्पष्ट आंकड़े नहीं दे सके। पहले 116 करोड़ की एफडी और 13 करोड़ रुपये ब्याज बताया गया, जिसे बाद में 10 करोड़ कहा गया। हालांकि निगम के हस्तक्षेप के बाद बैंक ने 121 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं और अंतिम मिलान अभी जारी है।
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बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षद नारे लिखे प्लेकार्ड लेकर पहुंचे और घोटाले के विरोध में नारेबाजी की। पार्षदों के तीखे सवालों के सामने अधिकारी जवाब देने में असहज नजर आए। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने माना कि मामले में लापरवाही हुई है और जांच जारी है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण का स्पेशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। सदन की बैठक में करीब 37 करोड़ के विकास कार्य पास हुए।
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डेटा एंट्री ऑपरेटर को कैसे मिली वित्तीय ताकत? तरुणा मेहता के सवालों पर घिरे अधिकारी
पूर्व डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ने कई अहम सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कांट्रैक्टर के डेटा एंट्री ऑपरेटर को इतनी बड़ी वित्तीय शक्ति किसने दी और उसके मोबाइल पर बैंक का ओटीपी कैसे आ रहा था। इस पर अकाउंट अफसर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। मेहता ने दोषियों को बचाने के बजाय सख्त कार्रवाई की मांग की। कमिश्नर ने बताया कि संबंधित अकाउंट अफसर के खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। तरुणा मेहता ने यह भी सवाल उठाया कि जब तीन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी तो तीसरे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस पर कमिश्नर ने बताया कि संबंधित अधिकारी यूटी फाइनेंस डिपार्टमेंट से जुड़ा है और वहां कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। पार्षद गुरबक्श रावत ने भी कड़े तेवर दिखाए।
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बैठक के दौरान मेयर सौरभ जोशी के निर्देश पर इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र सदन में रखा गया लेकिन पार्षदों का आक्रोश कम नहीं हुआ। जीरो आवर्स में भी इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। एफडी और ब्याज को लेकर भी अधिकारी स्पष्ट आंकड़े नहीं दे सके। पहले 116 करोड़ की एफडी और 13 करोड़ रुपये ब्याज बताया गया, जिसे बाद में 10 करोड़ कहा गया। हालांकि निगम के हस्तक्षेप के बाद बैंक ने 121 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं और अंतिम मिलान अभी जारी है।