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Ground Report: बिट्टू का फैसला सही या वडिंग भारी... विरासत और शहादत पर विवाद; दोनों साख की लड़ाई में फंसे

Wed, 29 May 2024 01:33 PM IST
शाहरुख खान प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, लुधियाना
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, लुधियाना Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 29 May 2024 01:33 PM IST
सार

पंजाब की लुधियाना सीट पर तीन बार के कांग्रेसी सांसद रहे रवनीत बिट्टू चौथी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। मुकाबले के लिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग खुद मैदान में हैं। दोनों साख की लड़ाई में फंसे हैं।

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UP Lok Sabha Election 2024 Congress Amarinder Singh put in all its efforts to defeat BJP Ravneet Singh Bittu
UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शख्स कांग्रेस की आंख का तारा था, अचानक किरकिरी बन गया। पार्टी के नेता उन्हें गद्दार कहने लगे हैं। जनता में सवाल उछाले जा रहे हैं कि जो पार्टी का न हुआ, आपका क्या होगा? सवाल जनता भी कर रही है कि पार्टी छोड़ते ही वह शख्स इतना बुरा कैसे हो गया? जनता ने जिसे दो बार जिताया, वह फैसला गलत कैसे हो गया? 
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कांग्रेस ने कथित गद्दार को हर हाल में हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मुकाबले के लिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग खुद मैदान में हैं। पंजाब की आर्थिक राजधानी में चुनावी मुद्दे गौण हैं। जुबानी जंग हावी है। पहली बार अकेले लड़ रही भाजपा विरोधियों के ताकतवर हथियार से ही उन्हें मात देने की रणनीति पर काम कर रही है। 
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प्रतिद्वंद्वियों के खेमे से आए ताकतवर मोहरे साथ में जनाधार भी लाते हैं और सामने वाले को कमजोर भी करते हैं। कांग्रेस के खिलाफ खम ठोक रहे प्रत्याशी रवनीत सिंह बिट्टू इसी रणनीति का हिस्सा हैं। वे खांटी कांग्रेसी रहे हैं। एक बार आनंदपुर साहिब व दो बार लुधियाना से सांसद बने। 
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बदले हालात में यह चुनाव न भाजपा के लिए आसान है, न बिट्टू के लिए। उनका पार्टी में ही बाहरी होने का विरोध है। चुनाव आसान तो कांग्रेस के लिए भी नहीं है। बड़ी चुनौती तो उन्हीं के नेता बने हैं। 

40 साल तक वफादार रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह, पत्नी परनीत व बेटी जयइंदर कौर, भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ जैसे नेता अब भगवा चोले में हैं। कह सकते हैं कि कांग्रेस के प्रति वफादारी की हरियाली अब भगवा ओढ़ हो रही हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने अस्तित्व का संकट है, तो भाजपा के सामने उपस्थिति दर्ज करवाने की चुनौती।

विरासत और शहादत पर विवाद
भाजपा प्रत्याशी रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और टकसाली कांग्रेसी सरदार बेअंत सिंह के पोते हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए बेअंत सिंह की बम से उड़ाकर हत्या कर दी गई थी। बिट्टू कांग्रेस छोड़ने के बाद अपनी चुनावी रैलियों में अपने दादा की कुर्बानी का जिक्र करते हैं। कांग्रेस को यह नागवार लग रहा है। बिट्टू से मुकाबिल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने उनके खिलाफ जुबानी मोर्चा खोल दिया। राजा वडिंग कहते हैं कि पार्टी से गद्दारी करने वाला शख्स वफादार बेअंत सिंह को तो बख्श दे। अपने साथ नाम जोड़कर उन्हें बदनाम न करे। 
 

  • इस पर बिट्टू ने कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। जवाब दिया कि कांग्रेस ने उनके दादा की शहादत को हमेशा नजरअंदाज किया। उनकी कुर्बानी को कभी मान्यता नहीं दी। चुनाव या पार्टी के प्रोग्राम में उनकी कुर्बानी का जिक्र कभी नहीं किया। चंडीगढ़ कांग्रेस भवन के सामने से उनकी प्रतिमा भी हटवा दी। वे अपने दादा की उपेक्षा नहीं सहेंगे। अब देखना ये है कि जनता इसे किस नजरिये से देखती है।

आप और शिअद तलाश रहे जनाधार
15 साल से यहां कांग्रेस का सांसद है। 1952 में पहले लोकसभा चुनाव के बाद लगातार 10 साल और फिर बीच-बीच में भी कांग्रेस का सांसद चुना गया। भाजपा व शिअद साथ थे, तो ताकत भी दिखाई, मगर इस बार अकेले लड़ रही शिअद ने 2012 में लुधियाना पूर्वी हलके से विधायक रहे रणजीत सिंह ढिल्लों को उतारा है।
 

गांवों के जाट मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है। आप को अभी लुधियाना में खाता खोलना है। आप ने कांग्रेस से आए अशोक परासर पप्पी को टिकट दिया है। यहां शिअद व आप दोनों अपना जनाधार तलाश रहे हैं। 

बैंस ब्रदर्स पर घिर रही कांग्रेस
मतदान से चंद दिन पहले पूर्व विधायक सिमरनजीत सिंह बैंस के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी की आलोचना हो रही है। बैंस ने 2009 में लुधियाना सदर के तत्कालीन तहसीलदार मेजर गुरविंदर सिंह बेनीपाल को उनके ऑफिस में ही नग्न कर पीटा था। तब पंजाब के राजस्व व प्रशासनिक अधिकारी हड़ताल पर चले गए थे।

इस मामले में बैंस छह महीने जेल में रहे। 2019 में बैंस पर गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर को धमकाने और गाली देने का केस दर्ज हुआ। 2021 में दुष्कर्म मामले में भी बैंस को जेल जाना पड़ा। पीड़ित महिला ने 16 मई को राजा वडिंग और बैंस के कार्यक्रम में पहुंचकर हंगामा किया।

प्रवासी मतदाताओं का रुख तय करेगा नतीजा
उद्योगों की नगरी लुधियाना प्रवासी कामगारों का प्रमुख स्थल है। यहां यूपी, बिहार, राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के 15 लाख लोग स्थायी निवासी हैं। जो दल इन्हें बाहरी कहकर चिढ़ाते थे, वे प्रवासी बस्तियों के चक्कर काट रहे हैं। भाजपा इन्हें अपना कैडर वोट मानती है। औद्योगिक क्षेत्र फोकल प्वाइंट-3 में फैक्टरी से निकले सुल्तानपुर के राजकरन कहते हैं कि राममंदिर बनने की खुशी मन में गहरे समाई है।

यहां यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की खूब चर्चा है। बिहार के खुशहाल शेखर कहते हैं कि पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी की गलत टिप्पणी को हम भूले नहीं हैं। कुछ दिन पहले सुखपाल खैरा ने भी कामगारों पर गलत बयानी कर दी। इसे लेकर कामगारों में कांग्रेस से नाराजगी है।
 
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