गजब मोबाइल एप, बच्चे की सुनाएगा धड़कन
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अब हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों में शिशु की जांच कराने के लिए भागदौड़ नहीं करनी होगी। ऐसा संभव होगा रिमोट फीटल मॉनीटरिंग तकनीक से। इसके माध्यम से गर्भवती महिला खुद ही गर्भ में पल रहे शिशु की मॉनीटरिंग कर सकेगी और सारा डाटा डॉक्टर के पास एक मोबाइल एप से पहुंच जाएगा। इस तकनीक का इस्तेमाल फोर्टिस अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट गायनोकोलॉजिस्ट और आब्सेट्रिक्स डॉ. प्रीति जिंदल ने किया है।
चंडीगढ़ के होटल माउंट व्यू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. जिंदल ने बताया कि इस तकनीक का इस्तेमाल अब तक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों में किया गया है और एक महिला का प्रेग्नेंसी टाइम पूरा होने के बाद सुरक्षित डिलीवरी कराई गई। इस तकनीक की मदद से फुल टर्म डिलीवरी संभव हो सकी है। इसमें शिशु का वजन 2.8 किलोग्राम निकला है।
यह है तकनीक
इस तकनीक के लिए खास साफ्टवेयर एक बड़ी आईटी कंपनी ने विकसित किया है। इस एप्लीकेशन को स्मार्ट फोन पर गूगल प्ले से डाउनलोड किया जा सकता है। गूगल प्ले पर यह एप एएचएमसीएसपीए के नाम से है। डॉक्टर मरीज को यह डिवाइस दे देते हैं। इस डिवाइस से इलेक्ट्रोड डिवाइस को कनेक्ट कर दिया जाता है।
इलेक्ट्रोड डिवाइस को महिला के पेट पर लगाया जाता है और डिवाइस में इलेक्ट्रोड के माध्यम से सुरक्षित किया गया डाटा मोबाइल एप से डॉक्टर के मोबाइल पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसे देखकर डॉक्टर गर्भवती महिला को उपाय बता सकती हैं। इस एप्लीकेशन को डॉक्टर और मरीज अपने मोबाइल से डाउनलोड कर लेते हैं। यह डिवाइस छोटा है, इसलिए इसे कहीं भी लेकर जाया जा सकता है।
एक सप्ताह का खर्च 15 हजार
डा. प्रीति के मुताबिक, इस डिवाइस को अपने पास रखने के लिए एक सप्ताह के लिए पंद्रह हजार रुपये का खर्च आता है।