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हाईकोर्ट से की अनोखी मांग, युवक ने लगाई याचिका- नास्तिक प्रमाण पत्र जारी करने का दें आदेश
Wed, 02 Oct 2019 10:53 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 02 Oct 2019 10:53 AM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी तरह का एक अनोखा मामला पहुंचा है। जहां टोहाना निवासी रवि ने हरियाणा सरकार को नास्तिक प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश जारी करने की अपील की है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और वैसे भी याची ने अपने नाम के आगे नास्तिक लगाया हुआ है जो खुद में पर्याप्त है।
याची ने बताया कि वह मूल रूप से टोहाना का रहने वाला है और उसने तहसीलदार से नो कास्ट व नास्तिक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया था। याची ने कहा कि समाज को जाति, धर्म और अन्य तरीकों से बांटा जाता है और याची इस विचारधारा के खिलाफ है। वह आरक्षित वर्ग से है लेकिन वह आरक्षण का लाभ व इसकी व्यवस्था का विरोध करता है और उसने खुद भी ऐसा कोई लाभ नहीं लिया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे देश में हमें कई मामलों में निर्णय लेने की आजादी है, जिनमें जाति और धर्म भी शामिल हैं। ऐसे में याची यह मानने को स्वतंत्र है कि वह किसी जाति से है या नहीं या फिर किसी धर्म से है या नहीं। याची खुद को नास्तिक मानता है यह भी उसकी स्वतंत्रता का ही हिस्सा है लेकिन ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है कि इसके लिए उसे कोई प्रमाण पत्र जारी किया जाए। याचिका को आधारहीन मानते हुए हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
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याची ने बताया कि वह मूल रूप से टोहाना का रहने वाला है और उसने तहसीलदार से नो कास्ट व नास्तिक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया था। याची ने कहा कि समाज को जाति, धर्म और अन्य तरीकों से बांटा जाता है और याची इस विचारधारा के खिलाफ है। वह आरक्षित वर्ग से है लेकिन वह आरक्षण का लाभ व इसकी व्यवस्था का विरोध करता है और उसने खुद भी ऐसा कोई लाभ नहीं लिया है।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे देश में हमें कई मामलों में निर्णय लेने की आजादी है, जिनमें जाति और धर्म भी शामिल हैं। ऐसे में याची यह मानने को स्वतंत्र है कि वह किसी जाति से है या नहीं या फिर किसी धर्म से है या नहीं। याची खुद को नास्तिक मानता है यह भी उसकी स्वतंत्रता का ही हिस्सा है लेकिन ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है कि इसके लिए उसे कोई प्रमाण पत्र जारी किया जाए। याचिका को आधारहीन मानते हुए हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
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