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नायाब पहल..गुरुघर की संगत को संक्रमण से बचाएगा डिस्पोजेबल रुमाला
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चंडीगढ़। सेक्टर 19 के गुुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में संगत को सिर ढंकने के लिए कपड़े की जगह अब डिस्पोजेबल रुमाले मिलेंगे। गुरुद्वारे की यह पहल दूसरे धार्मिक स्थलों के लिए भी नजीर बन सकती है। अच्छी बात यह है कि यह डिस्पोजेबल रुमाले झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों से तैयार कराए जा रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक मदद भी पहुंच रही है।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान तेजिंदर पाल सिंह ने कहा कि कोरोना का खौफ अभी लोगों में है। गुरुघरों में कपड़े के रुमाले इस्तेमाल संगत करती रही है। लेकिन जब उन्हें इस तरह के डिस्पोजेबल रुमाले के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे संगत की सुविधा के लिए गुरुद्वारा साहिब में रख लिया। इससे संगत को सिर ढंकने में सहायता मिलेगी और संक्रमण का खतरा भी नहीं रहेगा। श्रद्धालु माथा टेककर इन्हें अपने साथ ही ले जाएंगे।
एनजीओ ने तैयार कराया है डिस्पोजेबल रुमाला
यह रुमाला लालड़ू स्थित एक गैर सरकारी संगठन ने तैयार कराया है। संचालक राजीव बाली ने कहा कि यह रुमाला संक्रमण रहित है। इसे बनाने के लिए पतंग में इस्तेमाल होने वाला कागज और इसकी डोरी को बांधने के लिए कपड़ों में इस्तेमाल होने वाली बुकरम को लगाया गया है। इसे इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाए तो ये जमीन में अपने आप घुल जाएगा।
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गरीब बच्चों का जीवन भी संवर रहा
उन्होंने कहा कि इसे झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की मदद से तैयार किया जा रहा है। इन बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ रुमाला बनाने के लिए प्रति पीस 50 पैसे भी दिए जा रहे हैं ताकि इनकी आर्थिक मदद भी हो सके।
सेक्टर 34 गुरुद्वारे में माथा टेकने के लिए की गई है अच्छी पहल
इससे पहले सेक्टर 34 स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर में भी संगत के लिए कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए अच्छी पहल की गई है। वहां शीशे की शीट श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सामने लगाई गई है। ताकि संगत माथा टेक सके। प्रत्येक श्रद्धालु के माथा टेकने के बाद इसे सैनिटाइज किया जाता है। इसके लिए एक सेवादार की ड्यूटी लगती है।
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गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान तेजिंदर पाल सिंह ने कहा कि कोरोना का खौफ अभी लोगों में है। गुरुघरों में कपड़े के रुमाले इस्तेमाल संगत करती रही है। लेकिन जब उन्हें इस तरह के डिस्पोजेबल रुमाले के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे संगत की सुविधा के लिए गुरुद्वारा साहिब में रख लिया। इससे संगत को सिर ढंकने में सहायता मिलेगी और संक्रमण का खतरा भी नहीं रहेगा। श्रद्धालु माथा टेककर इन्हें अपने साथ ही ले जाएंगे।
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एनजीओ ने तैयार कराया है डिस्पोजेबल रुमाला
यह रुमाला लालड़ू स्थित एक गैर सरकारी संगठन ने तैयार कराया है। संचालक राजीव बाली ने कहा कि यह रुमाला संक्रमण रहित है। इसे बनाने के लिए पतंग में इस्तेमाल होने वाला कागज और इसकी डोरी को बांधने के लिए कपड़ों में इस्तेमाल होने वाली बुकरम को लगाया गया है। इसे इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाए तो ये जमीन में अपने आप घुल जाएगा।
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गरीब बच्चों का जीवन भी संवर रहा
उन्होंने कहा कि इसे झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की मदद से तैयार किया जा रहा है। इन बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ रुमाला बनाने के लिए प्रति पीस 50 पैसे भी दिए जा रहे हैं ताकि इनकी आर्थिक मदद भी हो सके।
सेक्टर 34 गुरुद्वारे में माथा टेकने के लिए की गई है अच्छी पहल
इससे पहले सेक्टर 34 स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर में भी संगत के लिए कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए अच्छी पहल की गई है। वहां शीशे की शीट श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सामने लगाई गई है। ताकि संगत माथा टेक सके। प्रत्येक श्रद्धालु के माथा टेकने के बाद इसे सैनिटाइज किया जाता है। इसके लिए एक सेवादार की ड्यूटी लगती है।