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नोटबंदी की मार: आलू बेशुमार फिर भी रोटी की दरकार, 1500 करोड़ रुपए अटके
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Tue, 21 Feb 2017 01:23 AM IST
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आलू बेशुमार फिर भी रोटी की दरकार
- फोटो : File Photo
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आलू उगाने वाले रोटी के लिए तरसने लगे हैं। वजह है नोटबंदी। इसके चलते 1500 करोड़ की दो फसलें फंसी हुई हैं। उत्पादकों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे संघर्ष तेज करने पर मजबूर होंगे।
पोटैटो ग्रोअर एसोसिएशन ने समस्या का हल निकालने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन के महासचिव जसविंदर सिंह संघा ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर कहा कि नोटबंदी से आलू उत्पादकों की 1500 करोड़ रुपये की दो फसलें फंसी हुई हैं। नवंबर के पहले हफ्ते में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में आलू की खेप भेजी गई थी, लेकिन 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा कर दी।
इस वजह से फसल का पैसा बीच में ही अटक गया। आलू उत्पादकों के 900 करोड़ इस वजह से फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि अगली फसल तैयार हो चुकी है, जिसकी पूरी कीमत या खरीदार नहीं हैं, क्योंकि मार्केट में पैसा नहीं है। वहीं, बैंकों में अब तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में आलू उत्पादकों की आर्थिक हालत बदतर होती जा रही है।
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पोटैटो ग्रोअर एसोसिएशन ने समस्या का हल निकालने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन के महासचिव जसविंदर सिंह संघा ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर कहा कि नोटबंदी से आलू उत्पादकों की 1500 करोड़ रुपये की दो फसलें फंसी हुई हैं। नवंबर के पहले हफ्ते में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में आलू की खेप भेजी गई थी, लेकिन 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा कर दी।
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इस वजह से फसल का पैसा बीच में ही अटक गया। आलू उत्पादकों के 900 करोड़ इस वजह से फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि अगली फसल तैयार हो चुकी है, जिसकी पूरी कीमत या खरीदार नहीं हैं, क्योंकि मार्केट में पैसा नहीं है। वहीं, बैंकों में अब तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में आलू उत्पादकों की आर्थिक हालत बदतर होती जा रही है।
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बरनाला के किसानों ने मांगा मुआवजा
Punjab farmer
- फोटो : File Photo
मूल और ब्याज दोनों माफ हों
एसोसिएशन के प्रधान रघुबीर सिंह ने कहा कि यदि हालात जल्द ठीक न हुए तो उनके पास अपना संघर्ष तेज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि आलू उत्पादक किसान फसल के लिए गए ऋण के मूल को भी वापस करने में सक्षम नहीं है। इसलिए मूल और ब्याज दोनों माफ किए जाएं। एसोसिएशन ने मांग की है कि आलू की फसल को केंद्र सरकार नेफड, मार्कफैड जैसी सरकारी एजेंसियों के माध्यम से खरीदे। उत्पादकों को सिंगापुर, मलयेशिया, मिडल ईस्ट, रूस और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में फसल एक्सपोर्ट करने की अनुमति दें।
नहीं मिली सरकारी मदद
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि सूबा और केंद्र सरकार ने आलू उत्पादकों को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार आलू को स्कूलों में मिड-डे मील के तहत भेजती है। इस तरह पंजाब में फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए।
बरनाला के किसानों ने मांगा मुआवजा
आलू के भाव में गिरावट आने से किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों को उनकी अपेक्षा के अनुसार आलू का भाव नहीं मिल पा रहा। पूर्व सरपंच हरभूपिंदरजीत सिंह लाडी ने कहा कि अबकी बार आलू के भाव में गिरावट आने की वजह पिछले बर्ष की तरह उत्तर प्रदेश से आलू की खरीददारी के लिए व्यापारियों का न आना है। उन्होंने कहा कि सरकार को मुआवजा देना चाहिए। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के नेताओं जगसीर सिंह छीनीवालकलां, गुरध्यान सिंह, मलकीत सिंह , हरभजन सिंह कलाला ने सरकार से मांग की कि आर्थिक परेशानी से जूझ रहे किसानों को आलू की फसल का मुआवजा दिया जाए।
एसोसिएशन के प्रधान रघुबीर सिंह ने कहा कि यदि हालात जल्द ठीक न हुए तो उनके पास अपना संघर्ष तेज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि आलू उत्पादक किसान फसल के लिए गए ऋण के मूल को भी वापस करने में सक्षम नहीं है। इसलिए मूल और ब्याज दोनों माफ किए जाएं। एसोसिएशन ने मांग की है कि आलू की फसल को केंद्र सरकार नेफड, मार्कफैड जैसी सरकारी एजेंसियों के माध्यम से खरीदे। उत्पादकों को सिंगापुर, मलयेशिया, मिडल ईस्ट, रूस और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में फसल एक्सपोर्ट करने की अनुमति दें।
नहीं मिली सरकारी मदद
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि सूबा और केंद्र सरकार ने आलू उत्पादकों को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार आलू को स्कूलों में मिड-डे मील के तहत भेजती है। इस तरह पंजाब में फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए।
बरनाला के किसानों ने मांगा मुआवजा
आलू के भाव में गिरावट आने से किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों को उनकी अपेक्षा के अनुसार आलू का भाव नहीं मिल पा रहा। पूर्व सरपंच हरभूपिंदरजीत सिंह लाडी ने कहा कि अबकी बार आलू के भाव में गिरावट आने की वजह पिछले बर्ष की तरह उत्तर प्रदेश से आलू की खरीददारी के लिए व्यापारियों का न आना है। उन्होंने कहा कि सरकार को मुआवजा देना चाहिए। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के नेताओं जगसीर सिंह छीनीवालकलां, गुरध्यान सिंह, मलकीत सिंह , हरभजन सिंह कलाला ने सरकार से मांग की कि आर्थिक परेशानी से जूझ रहे किसानों को आलू की फसल का मुआवजा दिया जाए।