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हड्डियों को खोखला बना रही डायबिटीज: पीजीआई के शोध में खुलासा, फ्रैक्चर से बचना है तो शुगर कंट्रोल करें

Sat, 17 Jan 2026 12:26 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 17 Jan 2026 12:26 PM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज मरीजों को यह मानकर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए कि बोन मिनरल डेंसिटी रिपोर्ट ठीक है तो हड्डियां सुरक्षित हैं। शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह से जरूरत पड़ने पर ट्रैबेक्युलर बोन स्कोर जैसी उन्नत जांच करानी चाहिए।

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type 2 diabetes Department of Endocrinology at PGI diabetes is weakening bones
हड्डियों की समस्या - फोटो : istock

विस्तार

टाइप-2 डायबिटीज को सिर्फ शुगर की बीमारी समझना बड़ी भूल हो सकती है। पीजीआई के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के शोध में खुलासा हुआ है कि डायबिटीज हड्डियों को अंदर से कमजोर कर रहा है, भले ही सामान्य जांच में वे मजबूत दिखाई दें। खासकर रजोनिवृत्ति (पोस्टमेनोपॉजल) के बाद की महिलाओं में यह खतरा कहीं ज्यादा पाया गया है। 
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विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज मरीजों को यह मानकर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए कि बोन मिनरल डेंसिटी रिपोर्ट ठीक है तो हड्डियां सुरक्षित हैं। शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह से जरूरत पड़ने पर ट्रैबेक्युलर बोन स्कोर जैसी उन्नत जांच करानी चाहिए। कैल्शियम, विटामिन-डी, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को जीवनशैली में शामिल करना चाहिए और गिरने से बचाव के उपाय अपनाने चाहिए। 
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इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में 2025 में प्रकाशित इस शोध को एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय के भडाडा ने किया। रिसर्च टीम में डॉ. तनुशी अग्रवाल, डॉ. रिमेश पाल, डॉ. रवि शाह, डॉ. आशु रस्तोगी और डॉ. वीणु सिंगला शामिल रहे।
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प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि यह एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी थी जो जुलाई 2021 से दिसंबर 2022 के बीच पीजीआई के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में की गई। इसमें कुल 202 पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं को शामिल किया गया। 101 महिलाएं टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित थीं। 43 महिलाएं प्री-डायबिटीज श्रेणी में थीं। 58 महिलाएं सामान्य शुगर स्तर वाली थीं। 


सभी प्रतिभागियों की विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री ली गई, खून की जांच की गई और डेक्सा स्कैन के जरिये हड्डियों की जांच की गई। इसमें दो तरह की जांच शामिल थीं। बोन मिनरल डेंसिटी, जो आमतौर पर हड्डियों की मजबूती जानने के लिए की जाती है और ट्रैबेक्युलर बोन स्कोर, जो हड्डियों की अंदरूनी संरचना और गुणवत्ता को दर्शाता है।
 
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