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पंजाब: 109 घंटे बाद बोरवेल से निकाले गए दो वर्षीय फतेहवीर की मौत, विरोध में धरने पर बैठे लोग

Wed, 12 Jun 2019 12:15 AM IST
राजेश सैनी अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 12 Jun 2019 12:15 AM IST
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Two year old Fatehveer Singh rescued from borewell in Sangrur after almost 109 hour
बचाव अभियान की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

पंजाब के संगरूर में बोरवेल में गिरे दो वर्षीय बच्चे फतेहवीर सिंह आखिरकार जिंदगी से हार ही गया। पीजीआई चंडीगढ़ में उसकी मौत हो गई। तड़के करीब पांच बजे उसे 109 घंटे बाद बोरवेल से निकाला गया और पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया। वहीं विरोध स्वरूप लोग धरने पर बैठे गए हैं। लोगों ने प्रशासन की लापरवाही, सरकार की अनदेखी, एनडीआरएफ की कारगुजारी और पुरानी तकनीकों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।

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गांव भगवानपुरा निवासी सुखविंदर सिंह का बेटा फतेहवीर गुरुवार शाम को 150 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। 10 साल पुराने बोरवेल को कट्टे से ढककर रखा गया था, लेकिन बारिश पड़ने से वह कमजोर हो चुका था। खेलते-खेलते बच्चे का पैर उस पर आ गया और उसके दबाव से कट्टा बोरवेल में धंसता चला गया। उसके साथ फतेहवीर भी बोरवेल में गिरता चला गया।
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घटना 6 जून दिन वीरवार शाम चार बजे की है। संगरूर जिले में सुनाम के गांव भगवानपुरा निवासी सुखविंदर सिंह का दो साल का बेटा फतेहवीर खेत में बने बोरवेल में मिल गया। 10 साल पुराने बोरवेल को कट्टे से ढककर रखा गया था, लेकिन बारिश पड़ने से वह कमजोर हो चुका था। खेलते-खेलते बच्चे का पैर उस पर आ गया और उसके दबाव से कट्टा बोरवेल में धंसता चला गया। उसके साथ फतेहवीर भी बोरवेल में गिरता चला गया।

फतेहवीर के चिल्लाने की आवाज सुनकर मां-बाप दौड़े आए। मां गगनदीप ने भागकर बच्चे को पकड़ने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह फतेहवीर को केवल छू ही सकी थीं। उसके हाथ में रद्दी हो चुके कट्टे का टुकड़ा आया। वह इसके लिए खुद को कोस रही है। मैं अपने बच्चे को बचा नहीं सकी, ये कहते हुए वह बार-बार बेहोश हो जाती है। वहीं पिता का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वह यही कह रहे हैं कि मैं हाथ धोने न जाता तो फतेहवीर को गिरने से बचा सकता था।

परिजनों ने बताया कि फतेहवीर उनकी इकलौती संतान है। सुखविंदर सिंह और गगनदीप कौर की शादी करीब सात साल पहले हुई थी, जिसके पांच साल बाद कई मन्नतों के बाद फतेहवीर सिंह का जन्म हुआ था। 10 जून को फतेहवीर दो साल का हो गया था। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और डेरा समर्थक टीम (शाह सतनाम फोर्स) ने मोर्चा संभाला हुआ था, लेकिन 109 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद फतेहवीर हार गया।
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