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Chandigarh News: पीजीआई में दो दिनों में दो लोगों का अंगदान, 8 को मिला जीवनदान
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चंडीगढ़। पीजीआई में दो दिनों के अंदर दो परिजनों ने अपने प्रिय का अंगदान करने का निर्णय लेकर जिंदगी मौत से लड़ रहे 8 मरीजों के जीवन को बचाने में अहम योगदान दिया है। अंगदान से मिले अंगों को पीजीआई ने प्रतीक्षा सूची में शामिल चार मरीजों के साथ ही ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अन्य शहरों में जिंदगी मौत के बीच जूझ रहे चार मरीजों तक समय पर पहुंचाया है। अंगदान से प्राप्त अंगों में एक हृदय, एक फेफड़ा, दो लिवर, 4 किडनी और एक अग्नाशय शामिल है। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अंगदाता परिवार को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह निर्णय कठिन समय में भी मानवीय भावना की उदारता को उजागर करता है और अकल्पनीयता का सामना करते हुए उनके निर्णय ने देश भर के हजारों रोगियों के लिए आशा की किरण जगाई है। अंगदान एक ऐसा उपहार है, जो दाता और प्राप्तकर्ता से परे हैं। यह उनके परिवारों, समुदायों और डॉक्टर के जीवन को प्रभावित करता है। हर अंगदाता एक नायक है और इन दो परिवारों की ओर से दिखाया गया साहस वास्तव में प्रेरणादायक है। पीजीआई के अनुसार 22 अक्तूबर को एक 24 वर्ष के युवक को सड़क दुर्घटना के बाद गंभीर स्थिति में पीजीआई भर्ती कराया गया। जहां ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिजनों ने उसके अंगदान का निर्णय लिया। उस अंगदाता के हृदय, फेफड़े और यकृत का कोई मिलान पीजीआई में प्राप्त नहीं था इसलिए रोटो पीजीआई ने नोटो के माध्यम से देश के विभिन्न अस्पतालों से संपर्क साधा। इसके बाद हृदय को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल, फेफड़ों को सिकंदराबाद के केआईएमएस और यकृत को नई दिल्ली के आईएलबीएस भेजा गया। इसके अतिरिक्त पीजीआई में भर्ती दो मरीजों को उसकी एक किडनी और अग्नाशय और दूसरी किडनी प्रत्यारोपित कर उन दोनों की जान बचाई गई है। इस अंगदाता ने पांच लोगों को नया जीवन दिया है। इसी क्रम में 21 अक्तूबर को 18 साल के युवक के इलाज के दौरान पीजीआई में ब्रेनडेड घोषित होने पर उसके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया। उसके अंगों में से लीवर को नई दिल्ली आईएलबीएस भेजा गया, जबकि एक किडनी और अग्नाशय व दूसरी किडनी पीजीआई में भर्ती दो मरीजों में प्रत्यारोपित की गई है।
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दूसरों को जीवन का दिया मौका
एक अंगदाता के पिता का कहना है कि अपने बेटे की याद में हम दूसरों को जीवन का मौका देना चाहते थे इसलिए यह निर्णय लिया। एक अन्य अंगदाता की मां ने कहा कि हमारा दर्द हमेशा रहेगा लेकिन यह जानकर कि वह दूसरों में जीवित है, हमें कुछ शांति मिलेगी। पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि अंगदाता परिवार के नेक निर्णय के साथ चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस का सहयोग सराहनीय है जिसके बल पर समय रहते ग्रीन कॉरिडोर बनाना संभव हुआ। उन्होंने कहा कि दो दिनों में अंगों को समय पर अन्य शहरों तक पहुंचाने के लिए चार ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए जो टीमवर्क को प्रदर्शित करता है।
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दूसरों को जीवन का दिया मौका
एक अंगदाता के पिता का कहना है कि अपने बेटे की याद में हम दूसरों को जीवन का मौका देना चाहते थे इसलिए यह निर्णय लिया। एक अन्य अंगदाता की मां ने कहा कि हमारा दर्द हमेशा रहेगा लेकिन यह जानकर कि वह दूसरों में जीवित है, हमें कुछ शांति मिलेगी। पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि अंगदाता परिवार के नेक निर्णय के साथ चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस का सहयोग सराहनीय है जिसके बल पर समय रहते ग्रीन कॉरिडोर बनाना संभव हुआ। उन्होंने कहा कि दो दिनों में अंगों को समय पर अन्य शहरों तक पहुंचाने के लिए चार ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए जो टीमवर्क को प्रदर्शित करता है।
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