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PU रिश्वतकांड: दो पूर्व इंजीनियर को चार-चार साल की सजा, 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी

Mon, 22 Aug 2022 09:23 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 22 Aug 2022 09:23 PM IST
सार

सीबीआई ने यह मामला 2010 में निजी ठेकेदार प्रदीप कुमार की शिकायत पर दर्ज किया था। दोषी सतीश पदम ने प्रदीप कुमार से पीयू में सिविल कामों के बिल को पास करवाने के एवज में 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस पूरे लेनदेन में दोषी नंदलाल कौशल ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी।

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Two former engineers sentenced to four years each in bribery case in Chandigarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

भ्रष्टाचार की बीमारी लगभग सभी विभागों में फैली है और धीरे-धीरे जड़ों में जाकर समाज को दीमक की तरह खा रही है। समय रहते इस बीमारी को ठीक करने की जरूरत है ताकि देश का भविष्य बचाया जा सके। यह बात सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने पीयू रिश्वतकांड के दोषियों को सजा सुनाते समय कही। 

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12 साल पहले पीयू में 35 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में दोषी तत्कालीन कार्यकारी इंजीनियर सतीश पदम और सब डिवीजनल इंजीनियर नंदलाल को अदालत ने चार-चार साल के कारावास और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान दोषियों ने अपनी पारिवारिक और अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से नरम रुख अपनाने की बात कही जिस पर अदालत ने कहा कि दोषी अपने कृत्यों के बारे में जानते थे और यह भी जानते थे कि पकड़े जाने पर उन्हें क्या परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसके बावजूद उन्होंने यह अपराध किया, इसलिए दोषी दया के पात्र नहीं हैं।
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सीबीआई ने यह मामला 2010 में निजी ठेकेदार प्रदीप कुमार की शिकायत पर दर्ज किया था। दोषी सतीश पदम ने प्रदीप कुमार से पीयू में सिविल कामों के बिल को पास करवाने के एवज में 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस पूरे लेनदेन में दोषी नंदलाल कौशल ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। ठेकेदार प्रदीप कुमार को कुल 16 लाख रुपये का भुगतान किया जाना था। 
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प्रदीप ने इसकी शिकायत सीबीआई को दे दी। सीबीआई ने जाल बिछाकर दोषी सतीश पदम को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। सीबीआई ने पीयू में तैनात तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सतीश पदम और सब डिवीजनल ऑफिसर नंदलाल कौशल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 120 बी, 7, 13 (2), 13(1) (डी) के तहत मामला दर्ज किया था।


वर्ष 2018 में हाईकोर्ट से मिला था स्टे
वर्ष 2010 में इस मामले में हुई गिरफ्तारी के दो साल बाद दो जनवरी 2012 को अदालत में चालान पेश हुआ था। ट्रायल शुरू होने के बाद सतीश पदम जुलाई 2018 में हाईकोर्ट पहुंच गया, जहां से इस मामले में उसे स्टे मिल गया था। स्टे मिलने के कुछ महीने पहले मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि किसी भी मामले पर छह माह से अधिक स्टे नहीं लिया जा सकेगा। इसके आधार पर सीबीआई ने अदालत में आवेदन देकर मामले की सुनवाई फिर से शुरू करवाने की मांग की थी। लगभग चार साल तक इस मामले में स्टे रहने के बाद दो महीने पहले मामले की सुनवाई फिर शुरू हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई तेजी से की गई, लिहाजा दो महीने में ही मामले का फैसला हो गया।

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