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Chandigarh News: चंडीगढ़ की दो बेटियों ने राष्ट्रीय खेलों में जीता रजत और कांस्य पदक
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चंडीगढ़। शहर के वुशू खिलाड़ियों के दल ने उत्तराखंड में चल रहे 38वें राष्ट्रीय खेलों में शानदार शुरुआत की है। इस प्रतियोगिता में शहर के दो खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं, जिन्होंने अपनी श्रेणियों में बेहतरीन प्रतिभा के साथ मुकाबलों में जीत दर्ज की।
कोमल ने 60 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक जीता। उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन यूपी पुलिस की प्रेरणा से कड़ी टक्कर में हार गईं। वहीं, पूजा शर्मा ने भी 65 किलोग्राम श्रेणी में अपनी छाप छोड़ी और कांस्य पदक जीता। उन्होंने सेमीफाइनल में राजस्थान की अनुभवी और अंतरराष्ट्यीय स्तर पर मान्यता प्राप्त निकिता बंसल का सामना किया। चंडीगढ़ वुशू संघ के महासचिव सुदर्शन कुमार ने खिलाड़ियों पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
कबाड़ी का काम करते हैं माता-पिता, पैसे की तंगी के बावजूद कोमल के नहीं मानी हार
रजत पदक जीतने वाली कोमल के माता-पिता कबाड़ी का काम करते है। उनकी मौलीजांगरा के सुदंर नगर में कबाड़ी की दुकान है। माता-पिता के पास बेटी के लिए डाइट के लिए पैसे तक नहीं थे। खेल के प्रति जनून के बाद अब स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया इसका खर्चा उठा रहा है। कोमल ने 14 वर्ष की उम्र में स्कूल में सेल्फ डिफेंस के लिए वुशू के खेल को चुना था। कई बार टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए कोमल के पास डाइट के लिए पैसे नहीं होते थे, लेकिन कोच संदीप मलिक और चंडीगढ़ वुशू एसोसिएशन के सचिव सुर्दशन कुमार ने उनकी काफी मदद की। इसके बाद काेमल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते। कोमल जीएमएसएस सेक्टर- 29 से पास आउट हैं और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीए की पढ़ाई कर रही है। वर्ष 2023 में मास्को में आयोजित वुशू स्टोर इंटरनेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुकी है।
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कोमल ने 60 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक जीता। उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन यूपी पुलिस की प्रेरणा से कड़ी टक्कर में हार गईं। वहीं, पूजा शर्मा ने भी 65 किलोग्राम श्रेणी में अपनी छाप छोड़ी और कांस्य पदक जीता। उन्होंने सेमीफाइनल में राजस्थान की अनुभवी और अंतरराष्ट्यीय स्तर पर मान्यता प्राप्त निकिता बंसल का सामना किया। चंडीगढ़ वुशू संघ के महासचिव सुदर्शन कुमार ने खिलाड़ियों पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
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कबाड़ी का काम करते हैं माता-पिता, पैसे की तंगी के बावजूद कोमल के नहीं मानी हार
रजत पदक जीतने वाली कोमल के माता-पिता कबाड़ी का काम करते है। उनकी मौलीजांगरा के सुदंर नगर में कबाड़ी की दुकान है। माता-पिता के पास बेटी के लिए डाइट के लिए पैसे तक नहीं थे। खेल के प्रति जनून के बाद अब स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया इसका खर्चा उठा रहा है। कोमल ने 14 वर्ष की उम्र में स्कूल में सेल्फ डिफेंस के लिए वुशू के खेल को चुना था। कई बार टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए कोमल के पास डाइट के लिए पैसे नहीं होते थे, लेकिन कोच संदीप मलिक और चंडीगढ़ वुशू एसोसिएशन के सचिव सुर्दशन कुमार ने उनकी काफी मदद की। इसके बाद काेमल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते। कोमल जीएमएसएस सेक्टर- 29 से पास आउट हैं और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीए की पढ़ाई कर रही है। वर्ष 2023 में मास्को में आयोजित वुशू स्टोर इंटरनेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुकी है।
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