'इराक से आ गए, न मोदी ने खर्चा दिया, न बादल ने'
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इराक में फंसे जिले के गांव खियाली के दो नौजवान वापस अपने गांव पहुंच गए हैं। इन नौजवानों ने कहा कि उनके भारत आने में न तो मोदी सरकार और न ही राज्य की बादल सरकार ने कोई मदद की है। वहीं उनके आने की खुशी में जहां उनके परिजन फूले नहीं समा रहे थे वहीं गांव के लोगों में भी खुशी की लहर थी।
शनिवार को इराक से यहां पहुंचे गुरनाम सिंह और दविंदर सिंह के मुताबिक वे तीन साल से डोरसी कंपनी में कार्य कर रहे थे, लेकिन जब उनके परिजनों को पता चला कि इराक में जंग का माहौल पैदा हो गया है तो वे काफी सहमे हुए थे।
परिजनों द्वारा भेजे रुपयों से टिकट लेकर लौटे
वे खुद भी भय भरी जिंदगी व्यतीत कर रहे थे और किसी तरह वापस अपने गांव लौटना चाहते थे। बड़ी मुश्किल से लोगों और परिजनों की दुआ से वे घर लौटे हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र व बादल सरकार ने इराक से घर तक का खर्च उठाने का वादा किया था, लेकिन उन्हें यह खर्च नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट से घर तक का खर्च करने का वादा करने वाली सरकार का यह वादा खोखला निकला है। उनको एयरपोर्ट से घर तक छोड़ने के कोई प्रबंध नहीं किया गया, जबकि इराक से भारत तक भी वे अपने परिजनों द्वारा भेजे रुपयों से टिकट लेकर लौटे हैं।
तीन महीनों की तनख्वाह भी नहीं मिली
गुरनाम सिंह ने बताया कि कंपनी ने उसकी तीन महीनों की तनख्वाह भी नहीं दी। दविंदर सिंह के मुताबिक उसको भी उसकी मेहनताना नहीं दिया गया।
उन्होंने राज्य व केंद्र सरकार को कहा कि वे सिर्फ बयानबाजी तक सीमित न रहें। इराक में फंसे नौजवानों को वापस लाने के लिए ठोस यत्न किए जाएं और उनका खर्च उठाने के वादों को भी अमली रूप दिया जाए।