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11 हजार कारोबारियों की बढ़ी परेशानी: वैट के तहत नोटिस जारी, तीन हजार करोड़ की वसूली की तैयारी
Tue, 06 May 2025 12:01 PM IST
निवेदिता वर्मा
प्रवीण राय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण राय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 06 May 2025 12:01 PM IST
सार
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा ने बताया कि 11 हजार कारोबारियों को अब तक नोटिस मिल चुका है। छोटी-छोटी गलतियों पर पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। देशभर में ऐसे नोटिसों का समाधान कर दिया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Istock
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विस्तार
चंडीगढ़ के 11 हजार कारोबारियों को वैट के तहत तीन हजार करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है। बड़ी बात यह है कि पैसा नहीं जमा करने पर कारोबारियों का बैंक अकाउंट फ्रीज किया जाने लगा है। इसमें फर्म के नाम से चले रहे अकाउंट के साथ-साथ निजी बैंक अकाउंट शामिल हैं।
जीएसटी विभाग की कार्रवाई से कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। कारोबारी शोषण का आरोप लगाकर विभाग के खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। उनकी दलील है कि देशभर में ओटीएस सिस्टम लागू कर नोटिसों का निपटारा कर दिया गया है। चंडीगढ़ में आश्वासन के बाद भी लागू नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान यह है कि कारोबारियों पर 6 फीसदी का ब्याज भी पड़ रहा है।
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा ने बताया कि 11 हजार कारोबारियों को अब तक नोटिस मिल चुका है। छोटी-छोटी गलतियों पर पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। देशभर में ऐसे नोटिसों का समाधान कर दिया गया है। प्रशासक के आश्वासन के बाद भी मामला जस का तस है। अगर किसी कारोबारी को एक करोड़ रुपये का नोटिस मिला है तो उसको एक साल में ब्याज के तौर पर 6 लाख रुपये देने पड़ जाएंगे।
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जीएसटी विभाग की कार्रवाई से कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। कारोबारी शोषण का आरोप लगाकर विभाग के खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। उनकी दलील है कि देशभर में ओटीएस सिस्टम लागू कर नोटिसों का निपटारा कर दिया गया है। चंडीगढ़ में आश्वासन के बाद भी लागू नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान यह है कि कारोबारियों पर 6 फीसदी का ब्याज भी पड़ रहा है।
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चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा ने बताया कि 11 हजार कारोबारियों को अब तक नोटिस मिल चुका है। छोटी-छोटी गलतियों पर पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। देशभर में ऐसे नोटिसों का समाधान कर दिया गया है। प्रशासक के आश्वासन के बाद भी मामला जस का तस है। अगर किसी कारोबारी को एक करोड़ रुपये का नोटिस मिला है तो उसको एक साल में ब्याज के तौर पर 6 लाख रुपये देने पड़ जाएंगे।
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