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ट्राइसिटी के झकझोर देने वाले मर्डर केस... जिन्हे आजतक पुलिस नहीं कर पाई सॉल्व
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 21 Oct 2017 08:41 PM IST
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Chandigarh Murder Mystery
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देश को झकझोर देने वाला नोएडा का आरुषि हेमराज मर्डर केस फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई विशेष कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए तलवार दंपति को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अपनी जगह आज भी खड़ा है- आरुषि-हेमराज को किसने मारा। उनके कातिल क्या कभी समाज के सामने आ पाएंगे या इंसाफ इसी तरह अधूरा रह जाएगा। आरुषि-हेमराज हत्याकांड की तरह ही ट्राइसिटी में भी ऐसे चार हाईप्रोफाइल मामले हुए, जिनमें कत्ल तो हुआ लेकिन कातिलों का आज तक पता ही नहीं चला। ये केस आज भी कानून के लंबे हाथों के कमजोर होने की गवाही दे रहे हैं।
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लेकिन सबसे बड़ा सवाल अपनी जगह आज भी खड़ा है- आरुषि-हेमराज को किसने मारा। उनके कातिल क्या कभी समाज के सामने आ पाएंगे या इंसाफ इसी तरह अधूरा रह जाएगा। आरुषि-हेमराज हत्याकांड की तरह ही ट्राइसिटी में भी ऐसे चार हाईप्रोफाइल मामले हुए, जिनमें कत्ल तो हुआ लेकिन कातिलों का आज तक पता ही नहीं चला। ये केस आज भी कानून के लंबे हाथों के कमजोर होने की गवाही दे रहे हैं।
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1- नेहा अहलावत मर्डर केस: 30 जुलाई 2010
नेहा अहलावत मर्डर केस
सेक्टर-38 निवासी छात्रा नेहा की हत्या उसके घर से चंद कदम की दूरी पर की गई थी। मामले की जांच कई यूनिटों को दी गई। नेहा के दोस्तों के गांधीनगर में ब्रेनमैपिंग और नारको टेस्ट करवाए गए लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
2013 में सीएफएसएल रिपोर्ट में उससे दुराचार की भी पुष्टि हुई। पुलिस ने केस की नए सिरे से जांच की, लेकिन कहीं से भी कोई क्लू नहीं मिला। यहां तक कि पुलिस ने केस सुलझाने के लिए एक लाख रुपये का इनाम तक रखा, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। वर्तमान में केस की जांच क्राइम ब्रांच की एक स्पेशल टीम के पास है। लेकिन, केस में कोई प्रोग्रेस नहीं है। कातिल आज भी आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।
2013 में सीएफएसएल रिपोर्ट में उससे दुराचार की भी पुष्टि हुई। पुलिस ने केस की नए सिरे से जांच की, लेकिन कहीं से भी कोई क्लू नहीं मिला। यहां तक कि पुलिस ने केस सुलझाने के लिए एक लाख रुपये का इनाम तक रखा, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। वर्तमान में केस की जांच क्राइम ब्रांच की एक स्पेशल टीम के पास है। लेकिन, केस में कोई प्रोग्रेस नहीं है। कातिल आज भी आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।
2- सिप्पी मर्डर केस: 20 सितंबर 2015 को
सिप्पी सिद्धू मर्डर
- फोटो : file photo
इंटरनेशनल शूटर और एडवोकेट सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी (35) का 20 सितंबर 2015 को सेक्टर-27 के पार्क में शव मिला था। उसकी गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने मामले की परत दर परत जांच की तो इसमें हाईकोर्ट की एक जज की बेटी की भूमिका संदिग्ध पाई।
इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। साथ ही संदिग्ध जज की बेटी को दो बार थाने बुलाकर उससे पूछताछ भी की थी। उसके जांच में सहयोग न करने पर पुलिस ने जिला अदालत में अर्जी तक दायर की थी। सिप्पी के परिजनों के प्रदर्शन और काफी प्रयास के बाद जाकर तत्कालीन पंजाब और हरियाणा के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी ने केस सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। फिलहाल केस की जांच सीबीआई चंडीगढ़ के पास है।
इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। साथ ही संदिग्ध जज की बेटी को दो बार थाने बुलाकर उससे पूछताछ भी की थी। उसके जांच में सहयोग न करने पर पुलिस ने जिला अदालत में अर्जी तक दायर की थी। सिप्पी के परिजनों के प्रदर्शन और काफी प्रयास के बाद जाकर तत्कालीन पंजाब और हरियाणा के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी ने केस सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। फिलहाल केस की जांच सीबीआई चंडीगढ़ के पास है।
3- अनसुलझी रह गई श्याम मॉल के मालिक की हत्या की गुत्थी
श्याम फैशन मॉल के मालिक अमरजीत सिंह खुराना
- फोटो : File Photo
3- अनसुलझी रह गई श्याम मॉल के मालिक की हत्या की गुत्थी
छह मई 2009 को श्याम फैशन मॉल के मालिक अमरजीत सिंह खुराना की सेक्टर-35 स्थित उनके निवास के बाहर रात में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसकी जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी।
अक्तूबर 2010 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। 28 अक्तूबर 2010 को ही सीबीआई ने इस केस में नई एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान सीबीआई को न तो सुबूत मिला और न ही हत्या में शामिल किसी अपराधी को पकड़ पाई। 27 नवंबर 2012 को सीबीआई ने भी अदालत में क्लोजर रिपोर्ट सौंपी। अगस्त 2014 में अदालत ने इसे खारिज कर दिया। जनवरी 2015 में जांच एजेंसी ने दूसरी क्लोजर रिपोर्ट सौंपी। 9 फरवरी 2016 को सीजेएम कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर दी।
4-अपने ही इंस्पेक्टर के हत्यारों को नहीं तलाश कर पाई पुलिस
02 अगस्त 2009 में चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर कश्मीरा सिंह का शव डड्डूमाजरा में लहूलुहान हालत में मिला था। पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई अफसर लगाए, लेकिन हत्यारे तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस को केस में एक संदिग्ध मिला भी, लेकिन उसे पकड़ने में नाकाम रही। उसके केस में अदालत ने भगौड़ा करार दे दिया था। 8 साल बाद भी पुलिस अपने ही इंस्पेक्टर के हत्यारे को नहीं पकड़ सकी।
छह मई 2009 को श्याम फैशन मॉल के मालिक अमरजीत सिंह खुराना की सेक्टर-35 स्थित उनके निवास के बाहर रात में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसकी जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी।
अक्तूबर 2010 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। 28 अक्तूबर 2010 को ही सीबीआई ने इस केस में नई एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान सीबीआई को न तो सुबूत मिला और न ही हत्या में शामिल किसी अपराधी को पकड़ पाई। 27 नवंबर 2012 को सीबीआई ने भी अदालत में क्लोजर रिपोर्ट सौंपी। अगस्त 2014 में अदालत ने इसे खारिज कर दिया। जनवरी 2015 में जांच एजेंसी ने दूसरी क्लोजर रिपोर्ट सौंपी। 9 फरवरी 2016 को सीजेएम कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर दी।
4-अपने ही इंस्पेक्टर के हत्यारों को नहीं तलाश कर पाई पुलिस
02 अगस्त 2009 में चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर कश्मीरा सिंह का शव डड्डूमाजरा में लहूलुहान हालत में मिला था। पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई अफसर लगाए, लेकिन हत्यारे तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस को केस में एक संदिग्ध मिला भी, लेकिन उसे पकड़ने में नाकाम रही। उसके केस में अदालत ने भगौड़ा करार दे दिया था। 8 साल बाद भी पुलिस अपने ही इंस्पेक्टर के हत्यारे को नहीं पकड़ सकी।