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अनोखा फैसला: मां को बेसहारा छोड़ा तो बेटे की सैलरी से हर महीने कटेंगे 10 हजार
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
Updated Fri, 08 Dec 2017 09:19 AM IST
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- फोटो : Demo Pics
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बुजुर्ग मां को बेसहारा छोड़ने वाले बेटों के खिलाफ मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने अहम फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने एक बेटे को हर माह अपनी मां को दस हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। यह पैसे बेटे की सैलरी से कट जाएंगे। यह पहला केस है, जिसमें जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी ने बुजुर्ग मां की तरफ से केस लड़ा था। इस मामले में ट्रिब्यूनल ने यह फैसला सुनाया है।
जानकारी के मुताबिक, फेज-एक की एक बुजुर्ग महिला बलजीत को उनके बेटों ने घर से निकाल दिया था। इसके बाद महिला गुरुद्वारे में रहकर अपना जीवनयापन कर रही थी। इसी बीच यह मामला जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के संज्ञान में आया। इसके बाद संस्था के वालंटियरों ने महिला को इलाज के लिए पहले फेज-छह स्थित अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद महिला को सेक्टर-66 पहुंचाया गया था।
महिला के दो बेटे हैं। जिनमें से एक पंजाब के सरकारी विभाग में एसडीओ के पद पर था। जबकि दूसरा विदेश में बसा हुआ था। लेकिन दोनों ही मां को साथ रखने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद दोनों बेटों पर मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत फेज-एक के पुलिस थाने में सितंबर माह में केस दर्ज किया गया था।
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जानकारी के मुताबिक, फेज-एक की एक बुजुर्ग महिला बलजीत को उनके बेटों ने घर से निकाल दिया था। इसके बाद महिला गुरुद्वारे में रहकर अपना जीवनयापन कर रही थी। इसी बीच यह मामला जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के संज्ञान में आया। इसके बाद संस्था के वालंटियरों ने महिला को इलाज के लिए पहले फेज-छह स्थित अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद महिला को सेक्टर-66 पहुंचाया गया था।
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महिला के दो बेटे हैं। जिनमें से एक पंजाब के सरकारी विभाग में एसडीओ के पद पर था। जबकि दूसरा विदेश में बसा हुआ था। लेकिन दोनों ही मां को साथ रखने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद दोनों बेटों पर मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत फेज-एक के पुलिस थाने में सितंबर माह में केस दर्ज किया गया था।
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अदालत ने अपने आदेश में यह लिखा है
अदालत।
- फोटो : File Photo
अदालत ने अपने आदेश में यह लिखा है
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि बुजुर्ग महिला को उसके बेटे की सैलरी से हर माह दस हजार रुपये मिलेंगे। यह रकम बुजुर्ग के खाते में जमा कराई जाएगी। जिस विभाग में बुजुर्ग का बेटा तैनात है, उस विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वह तय समय में खाते में पैसे जमा करवाना सुनिश्चित करे। यदि बेटे का दूसरी जगह तबादला हो जाता है तो इस बारे में भी विभाग द्वारा ट्रिब्यूनल को सूचित करना होगा। वहीं, डिवीजन कमिश्नर को यह आदेश लागू करवाने होंगे।
संपत्ति को बेच नहीं पाएंगे बेटे
ट्रिब्यूनल ने यह भी आदेश दिए हैं कि बुजुर्ग के बेटे संपत्ति को नहीं बेच पाएंगे। इसमें महिला का घर व अन्य कामर्शियल प्रॉपर्टी शामिल है। जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी की सचिव मोनिका लांबा ने बताया कि अथारिटी की तरफ से बुजुर्ग महिला का केस लड़ा गया था। उन्होंने कहा कि अब पैरेंट्स को इस संबंध में फैसला करना होगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि बुजुर्ग महिला को उसके बेटे की सैलरी से हर माह दस हजार रुपये मिलेंगे। यह रकम बुजुर्ग के खाते में जमा कराई जाएगी। जिस विभाग में बुजुर्ग का बेटा तैनात है, उस विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वह तय समय में खाते में पैसे जमा करवाना सुनिश्चित करे। यदि बेटे का दूसरी जगह तबादला हो जाता है तो इस बारे में भी विभाग द्वारा ट्रिब्यूनल को सूचित करना होगा। वहीं, डिवीजन कमिश्नर को यह आदेश लागू करवाने होंगे।
संपत्ति को बेच नहीं पाएंगे बेटे
ट्रिब्यूनल ने यह भी आदेश दिए हैं कि बुजुर्ग के बेटे संपत्ति को नहीं बेच पाएंगे। इसमें महिला का घर व अन्य कामर्शियल प्रॉपर्टी शामिल है। जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी की सचिव मोनिका लांबा ने बताया कि अथारिटी की तरफ से बुजुर्ग महिला का केस लड़ा गया था। उन्होंने कहा कि अब पैरेंट्स को इस संबंध में फैसला करना होगा।