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विस चुनावः पंजाब में तिकोने मुकाबले ने बदले सियासी समीकरण, देखिए
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Wed, 01 Feb 2017 06:35 PM IST
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पंजाब विधानसभा चुनाव
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पंजाब विधानसभा चुनाव के सियासी दंगल में इस बार आम आदमी पार्टी के शामिल होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और सियासी समीकरण बदल गए। अभी तक सूबे में कांग्रेस और अकाली-भाजपा के उम्मीदवार ही मजबूती से आमने-सामने होते थे, लेकिन इस बार तिकोने मुकाबले से तस्वीर दूसरी है।बीते लोकसभा चुनाव में मालवा से चार सीटें जीत कर संसद पहुंची ‘आप’ का पूरा ध्यान 69 विधानसभा सीटों वाले मालवा क्षेत्र पर है।
लोकसभा चुनाव में संगरूर से भगवंत मान, फरीदकोट से प्रो. साधू सिंह, फतेहगढ़ साहिब से हरेंद्र खालसा और पटियाला सीट डॉ. धर्मबीर गांधी ‘आप’ उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। डॉ. गांधी और खालसा को ‘आप’ बर्खास्त कर चुकी है, जिसके बाद गांधी ने नया सियासी फ्रंट बनाया है और कुछ सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। सुच्चा सिंह छोटेपुर ने 80 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
गांधी और छोटेपुर जितने वोट ले जाएंगे, नुकसान ‘आप’ के खाते में ही जाएगा। ‘आप’ की वजह से कांग्रेस, शिअद-भाजपा को कितना नुकसान होगा अभी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में मनप्रीत बादल ने तीसरा मोर्चा खोलने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी पार्टी पंजाब में खाता भी नहीं खोल सकी।
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लोकसभा चुनाव में संगरूर से भगवंत मान, फरीदकोट से प्रो. साधू सिंह, फतेहगढ़ साहिब से हरेंद्र खालसा और पटियाला सीट डॉ. धर्मबीर गांधी ‘आप’ उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। डॉ. गांधी और खालसा को ‘आप’ बर्खास्त कर चुकी है, जिसके बाद गांधी ने नया सियासी फ्रंट बनाया है और कुछ सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। सुच्चा सिंह छोटेपुर ने 80 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
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गांधी और छोटेपुर जितने वोट ले जाएंगे, नुकसान ‘आप’ के खाते में ही जाएगा। ‘आप’ की वजह से कांग्रेस, शिअद-भाजपा को कितना नुकसान होगा अभी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में मनप्रीत बादल ने तीसरा मोर्चा खोलने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी पार्टी पंजाब में खाता भी नहीं खोल सकी।
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बादल को उनके ही घर में घेरने में जुटे विपक्षी
पंजाब विधानसभा चुनाव
दस साल पंजाब की सत्ता में रहने के बाद बादल परिवार को उनके ही घर में घेरने के लिए विपक्षी दलों ने पूरा जोर लगाया है। नवजोत सिंह सिद्धू का साथ कैप्टन अमरेंद्र को कितना भाएगा यह चुनाव बाद ही पता चलेगा।
फिलहाल कांग्रेस माझा में सिद्धू का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। दोआबा क्षेत्र में डेरा सचखंड बल्लां, डेरा ब्यास, नूरमहल जैसे डेरों का दबदबा है। यही वजह है कि नेता डेरों के सामने वोटों के लिए हाथ फैलाए खड़े नजर आ रहे हैं।
सियासी हवा तय करेगी तीन सीटें
लंबी, जलालाबाद और मजीठा पर पूरे प्रदेश के मतदाताओं की नजर है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के मुकाबले पूर्व सीएम कैप्टन अमरेंद्र हैं तो ‘आप’ के जरनैल सिंह भी ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। जलालाबाद से डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के मुकाबले ‘आप’ के भगवंत मान और कांग्रेस से रवनीत बिटटू हैं।
मजीठा सीट से बिक्रम सिंह मजीठिया के मुकाबले ‘आप’ के हिम्मत शेरगिल और कांग्रेस के लाली मजीठिया हैं। पटियाला से कैप्टन अमरेंद्र और अमृसर ईस्ट से नवजोत सिंह सिद्धू के कारण भी इन सीटों पर सबकी नजरें हैं।
फिलहाल कांग्रेस माझा में सिद्धू का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। दोआबा क्षेत्र में डेरा सचखंड बल्लां, डेरा ब्यास, नूरमहल जैसे डेरों का दबदबा है। यही वजह है कि नेता डेरों के सामने वोटों के लिए हाथ फैलाए खड़े नजर आ रहे हैं।
सियासी हवा तय करेगी तीन सीटें
लंबी, जलालाबाद और मजीठा पर पूरे प्रदेश के मतदाताओं की नजर है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के मुकाबले पूर्व सीएम कैप्टन अमरेंद्र हैं तो ‘आप’ के जरनैल सिंह भी ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। जलालाबाद से डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के मुकाबले ‘आप’ के भगवंत मान और कांग्रेस से रवनीत बिटटू हैं।
मजीठा सीट से बिक्रम सिंह मजीठिया के मुकाबले ‘आप’ के हिम्मत शेरगिल और कांग्रेस के लाली मजीठिया हैं। पटियाला से कैप्टन अमरेंद्र और अमृसर ईस्ट से नवजोत सिंह सिद्धू के कारण भी इन सीटों पर सबकी नजरें हैं।