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निशक्त महिला मरीजों के लिए राहत भरी खबर

Sun, 22 Jun 2014 11:31 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 22 Jun 2014 11:31 AM IST
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Treatment Facilitiy in PGI for Handicaped Females

पीजीआई में आने वाली निशक्त महिलाओं के स्त्री संबंधी रोगों का इलाज अब आसान हो जाएगा। पीजीआई के गायनी विभाग और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की ओर से इलाज के दौरान उनकी मदद की जाएगी। उनसे यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि पीजीआई में इलाज के दौरान क्या-क्या दिक्कतें आती हैं।

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ये भी जानकारी उनसे हासिल की जाएगी। इलाज में बाधक सभी कारणों की जानकारी कर पीजीआई निशक्त महिलाओं के इलाज के लिए एक मॉडल तैयार करेगा। इस मॉडल को पालिसी मेकर को भेजा जाएगा, ताकि इन महिलाओं के इलाज के लिए नीतियां बनाई जा सकें। इस मॉडल पर  अगले हफ्ते से काम शुरू हो जाएगा।
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दरअसल, गायनी डिपार्टमेंट और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ निशक्त महिलाओं पर एक रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। महिलाओं को मदद मुहैया करवाना इसी रिसर्च का हिस्सा होगा। इस तरह की रिसर्च अब तक देश में नहीं हुई है। इसका मकसद निजी व सरकारी हॉस्पिटलों को निशक्त महिलाओं के लिए उपयोगी बनाना है।
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रिसर्च के दौरान 300 महिलाओं से सीधे संवाद किया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डॉ. अमरजीत सिंह, गायनी विभाग की डॉ. डॉ. वनीता सूरी, डॉ. रवनीत, डॉ. रुचि शर्मा और डॉ. सुखपाल शामिल होंगी।

कमरा नंबर 2060 से लें मदद
डॉ. अमरजीत सिंह और डॉ. रुचि शर्मा ने बताया इस रिसर्च के तहत यदि कोई निशक्त महिला पीजीआई में आती हैं और वह डॉक्टर के सामने अपनी बात कहने पर अक्षम है या फिर वह डॉक्टर की बात समझ नहीं पा रही है तो वह न्यू ओपीडी के द्वितीय तल पर स्थित कमरा नंबर 2060 पर संपर्क कर सकती है। यदि कोई महिला इस बारे में सुझाव देना चाहती है तो वह इस कमरे आकर अपने विचार रख सकती है। इसमें 15 से 45 साल तक की महिलाओं को शामिल किया जाएगा।

निशक्त महिलाओं के साथ होता है भेदभाव
निशक्त महिलाओं को समाज का सबसे उपेक्षित वर्ग माना जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि जब वे इलाज के लिए आती हैं तो डॉक्टर उनसे सही से बात नहीं करते। इससे वे अपनी बात ठीक तरह से नहीं रख पाती हैं और उनकी दिक्कतें जस की तस बनी रहती हैं। इसी तरह से हास्पिटल के रैंप उनके मुताबिक नहीं बने होते।


बिना सहारे वे रैंप में चल नहीं सकतीं। इसी तरह से इन महिलाओं में यौन संबंधी कई बीमारियां होती हैं, लेकिन वे डॉक्टरों से बयां नहीं कर पातीं। डॉ. रुचि शर्मा ने बताया वे पहले भी इस वर्ग पर रिसर्च कर चुकी हैं। रिसर्च में सामने आया कि निशक्त महिलाओं के लिए रत्ती भर सुविधाएं नहीं होती। चाहे ट्रांसपोर्ट का सेक्टर हो या फिर हास्पिटल का।

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