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550वां प्रकाश पर्वः जहां-जहां गए थे बाबा नानक, वहां की मिट्टी छूकर आए अमरजीत चावला
Tue, 12 Nov 2019 10:12 AM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 12 Nov 2019 10:12 AM IST
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पत्नी के साथ अमरजीत सिंह चावला
- फोटो : अमर उजाला
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550वें प्रकाश पर्व पर अमरजीत सिंह चावला ने पत्नी और सहयोगियों के साथ कार से 22 राज्यों सहित पांच देशों की यात्रा करके बाबा नानक की वाणी का प्रचार किया। दिल्ली के कारोबारी और प्रसिद्ध द टर्बन ट्रैवलर अमरजीत सिंह चावला ने श्री गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर चार जुलाई 2019 को एक अनूठी यात्रा शुरू की थी।
61 वर्षीय चावला अपनी पत्नी गुरशरण कौर और अपने कर्मचारियों के कार में होकर उन राज्यों एवं देशों में गए जहां गुरुनानक देव जी के चरण पड़े थे। भारत के 22 राज्यों सहित बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान, नेपाल के बाद पाकिस्तान पहुंचकर श्री करतारपुर साहिब में नतमस्तक होने के बाद अमरजीत सिंह चावला सोमवार देर शाम अटारी सीमा के माध्यम से अमृतसर पहुंचे।
इसके बाद उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। इस दौरान अमरजीत सिंह चावला ने कहा कि चार जुलाई को दिल्ली से उन्होंने यात्रा शुरू की थी। भारत के 22 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। अभी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, केरल, तमिलनाडु एवं मध्यप्रदेश की यात्रा बाकी है। इसके अलावा श्रीलंका की यात्रा भी शेष है।
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चावला ने कहा कि वह अब तक 33 हजार किलोमीटर की यात्रा कार से कर चुके हैं। 31 अक्तूबर को हम पाकिस्तान पहुंचे। श्री करतारपुर साहिब में नतमस्तक हुए और अब अमृतसर आए हैं।
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61 वर्षीय चावला अपनी पत्नी गुरशरण कौर और अपने कर्मचारियों के कार में होकर उन राज्यों एवं देशों में गए जहां गुरुनानक देव जी के चरण पड़े थे। भारत के 22 राज्यों सहित बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान, नेपाल के बाद पाकिस्तान पहुंचकर श्री करतारपुर साहिब में नतमस्तक होने के बाद अमरजीत सिंह चावला सोमवार देर शाम अटारी सीमा के माध्यम से अमृतसर पहुंचे।
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इसके बाद उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। इस दौरान अमरजीत सिंह चावला ने कहा कि चार जुलाई को दिल्ली से उन्होंने यात्रा शुरू की थी। भारत के 22 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। अभी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, केरल, तमिलनाडु एवं मध्यप्रदेश की यात्रा बाकी है। इसके अलावा श्रीलंका की यात्रा भी शेष है।
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चावला ने कहा कि वह अब तक 33 हजार किलोमीटर की यात्रा कार से कर चुके हैं। 31 अक्तूबर को हम पाकिस्तान पहुंचे। श्री करतारपुर साहिब में नतमस्तक हुए और अब अमृतसर आए हैं।
मार्च 2020 में शुरू होगा दूसरा पड़ाव
अमरजीत ने बताया कि विभिन्न देशों की यात्रा के लिए उन्हें विशेष अनुमति मिली हुई थी। पाकिस्तान जाने के लिए कारनेट दस्तावेज प्राप्त किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है, जिसके जरिए दूसरे देश की गाड़ी आ जा सकती है। यात्रा के दौरान हमें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। भारत सहित पड़ोसी मुल्कों के लोगों का उन्हें खूब प्यार एवं सहयोग मिला।
यात्रा में उनके साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर, डीओपी लुकमान मलिक और सहायक संतोष कुमार रहे। मार्च 2020 में उनकी यात्रा का अगला पड़ाव शुरू होगा। इसके तहत अमरजीत सिंह चावला अफगानिस्तान, ईरान, इराक, मक्का मदीना, बगदाद, चीन और रूस की यात्रा करेंगे। अमरजीत सिंह चावला कहते हैं कि यह यात्रा गुरू महाराज की शिक्षाओं का प्रचार एवं प्रसार करने के लिए की जा रही है।
उन्होंने कहा कि हम उन्हें अलग अंदाज में श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अमरजीत सिंह चावला को द टर्बन ट्रैवलर के नाम से जाना जाता है। उन्होंने हाल ही में अपने टोयोटा फॉर्च्यूनर कार से दिल्ली से लंदन तक की 40 हजार किमी की दूरी तय की है। वह कहते हैं कि श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं उनके जीवन में मार्गदर्शक रही हैं। गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान अपने दिव्य ज्ञान से अज्ञानता के अंधकार को दूर किया।
यात्रा में उनके साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर, डीओपी लुकमान मलिक और सहायक संतोष कुमार रहे। मार्च 2020 में उनकी यात्रा का अगला पड़ाव शुरू होगा। इसके तहत अमरजीत सिंह चावला अफगानिस्तान, ईरान, इराक, मक्का मदीना, बगदाद, चीन और रूस की यात्रा करेंगे। अमरजीत सिंह चावला कहते हैं कि यह यात्रा गुरू महाराज की शिक्षाओं का प्रचार एवं प्रसार करने के लिए की जा रही है।
उन्होंने कहा कि हम उन्हें अलग अंदाज में श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अमरजीत सिंह चावला को द टर्बन ट्रैवलर के नाम से जाना जाता है। उन्होंने हाल ही में अपने टोयोटा फॉर्च्यूनर कार से दिल्ली से लंदन तक की 40 हजार किमी की दूरी तय की है। वह कहते हैं कि श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं उनके जीवन में मार्गदर्शक रही हैं। गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान अपने दिव्य ज्ञान से अज्ञानता के अंधकार को दूर किया।