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पीजीआई के 153 प्रोफेसरों से परिवहन भत्ते की होगी वसूली

Fri, 08 Apr 2022 09:51 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 09:51 PM IST
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Transport allowance will be recovered from 153 professors of PGI
चंडीगढ़। पीजीआई प्रशासन को अपने अधिकारियों पर मेहरबानी करना भारी पड़ गया है। केंद्र सरकार ने स्वीकृति के बिना परिवहन भत्ता दिए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर लगभग ढाई करोड़ वसूलने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने आनन-फानन में 153 अधिकारियों से भुगतान के वसूली का आदेश जारी कर दिया है। इस सूची में सभी वरिष्ठ संकाय व संकाय शामिल हैं।
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वसूली के लिए जारी संकाय के नामों की सूची में ज्यादातर विभाग प्रमुख शामिल हैं। पीजीआई की मनमानी पर रोक लगाते हुए मंत्रालय ने कार्यरत अधिकारियों के साथ सेवानिवृत्त संकाय से भी वसूली का दिशा-निर्देश जारी किया है। उधर, इस आदेश पर पीजीआई प्रशासन का कहना है कि परिवहन भत्ता की स्वीकृति लंबित होने की जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी। अगर उसे अस्वीकृत कर दिया गया है तो भुगतान की राशि वापस ले ली जाएगी। दूसरी ओर संकाय का कहना है कि पीजीआई प्रशासन ने जिस आदेश की मंजूरी दी थी हमने उसी का लाभ लिया है। अब मंत्रालय उसे स्वीकृति नहीं दे रहा तो इसमें हमारी क्या गलती है जबकि इस सुविधा से वंचित डॉक्टरों का कहना है कि बिना मंजूरी के भुगतान करना गलत है।
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मंजूरी मिले बिना ही किया जा रहा था भुगतान
पीजीआई प्रशासन ने 23 अगस्त 2013 को एक आदेश जारी किया था जिसमें संस्थान के अधिकारियों के लिए ग्रेड पे के अनुसार 10 हजार और 12 हजार रुपये प्रतिमाह परिवहन भत्ता की स्वीकृति दी गई थी लेकिन उसमें यह शर्त रखी गई थी कि यह योजना अभी भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की मंजूरी के अधीन होगी। इस मामले की जानकारी होने पर मंत्रालय ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर भुगतान की गई रकम की वसूली का आदेश जारी किया है, जिसके बाद पीजीआई प्रशासन ने अपने आदेश को वापस ले लिया है। इसके बाद 2013 से 2015 के दौरान भुगतान किए गए परिवहन भत्ते को वसूलने का निर्णय लिया गया है।
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सेवानिवृत्तों से भी होगी वसूली
मंत्रालय ने परिवहन भत्ता लेने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिसमें उनकी ओर से दिए गए जवाब को अस्वीकार कर दिया गया है। वहीं मंत्रालय के आदेश के अनुसार कार्यरत अधिकारियों समेत सेवानिवृत्त हो चुके संकाय सदस्यों से भी उस रकम की वसूली की जाएगी। सेवानिवृत्त संकाय व अधिकारियों से इसकी वसूली उनके पेंशन/पारिवारिक पेंशन के महंगाई राहत भाग से होगी जबकि कार्यरत अधिकारियों के वेतन से 10 समान किस्तों में वसूली की जाएगी।

टीए डीए पर ऑडिट पहले ही जता चुका है आपत्ति
परिवहन भत्ता की ही तरह पीजीआई में इससे पहले टीए-डीए के भुगतान को लेकर भी गड़बड़ी सामने आ चुकी है। पीजीआई प्रशासन की ओर से 2019-20 में अपने फैकल्टी को टीए-डीए के नाम पर 31.97 लाख रुपये का भुगतान किए जाने पर ऑडिट विभाग आपत्ति उठा चुका है। पीजीआई ने यह भुगतान सार्क देशों में हुए कॉन्फ्रेंस को राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की श्रेणी में रखकर किया है, जिस पर ऑडिट विभाग ने पीजीआई को उसके 18 फरवरी 2009 को जारी आदेश का हवाला देकर जवाब को गलत ठहराया है, जिसमें पीजीआई प्रशासन ने सार्क देशों को अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में रखने की बात कही है।
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