{"_id":"5e03c8538ebc3e87f03070e2","slug":"tragedy-of-parents-seen-in-sandhya-chhaya-chandigarh-news-pkl3611229198","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘संध्या छाया’ में दिखी माता-पिता की त्रासदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘संध्या छाया’ में दिखी माता-पिता की त्रासदी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। परंपरा आर्ट्स की ओर से आयोजित थियेटर फेस्टिवल के आखिरी दिन बुधवार को नाटक ‘संध्या छाया’ का मंचन किया गया। इस फेस्टिवल का आयोजन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी और नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला के सहयोग से किया गया था। पंजाब कला भवन में मंचित इस नाटक का निर्देशन सुदेश शर्मा ने किया।
‘संध्या छाया’ एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसमें दिखाया गया है कि आज के युवा अपने माता-पिता की जरा भी फिक्र नहीं करते हैं। इस नाटक में 8 कलाकारों ने बेहतरीन मंचन किया। नाटक में दिखाया गया कि लोग अपने को सु़खी रखने के लिए माता-पिता को भी छोड़ देते हैं। 90 मिनट का नाटक देखकर लोग भावुक हो गए। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने पेश किया किएक नाना नाम के व्यक्ति के पास दो बेटे हैं। नाटक के माध्यम से आज के युवाओं का अपने पैरेंट्स पर ध्यान नहीं देने पर कटाक्ष किया गया है।
नाना का बड़ा बेटा फौज में रहता है। वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हो जाता है। छोटा बेटा श्याम अमेरिका चला जाता है। वह वहीं सेटल हो जाता है। श्याम के माता-पिता उसे कई बार वहां से बुलाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह वापस नहीं आता।
विज्ञापन
वे बहुत बूढ़े हो जाते हैं। इन हालात में उनकी देखरेख उनका नौकर महाटू करता है। वह कई बार अकेले होने से परेशान रहते हैं। आपसी झगड़ों से परेशान होने के बाद श्याम के मां-बाप एक दिन जहर खाने की कोशिश करते हैं।
एक दिन अचानक उनके दरवाजे की घंटी बजती है और एक आदमी अपने बच्चे के साथ काम मिल जाएगा पूछता है। इस पर वह उससे पूछते हैं कि तुम्हे काम चाहिए, तो वह व्यक्ति हां कह देता है। इस पर बूढे मां-बाप उसे अपने घर में रख लेते हैं। उस छोटे बच्चे से बातचीत के सहारे वह अपना बचा हुआ जीवन जीने की सोचते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति देखने के बाद पूरा पंजाब कला भवन का ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस नाटक में सुदेश शर्मा ने शानदार कैरेक्टर किया, जिसकी सभी ने काफी तारीफ की।
विज्ञापन
‘संध्या छाया’ एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसमें दिखाया गया है कि आज के युवा अपने माता-पिता की जरा भी फिक्र नहीं करते हैं। इस नाटक में 8 कलाकारों ने बेहतरीन मंचन किया। नाटक में दिखाया गया कि लोग अपने को सु़खी रखने के लिए माता-पिता को भी छोड़ देते हैं। 90 मिनट का नाटक देखकर लोग भावुक हो गए। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने पेश किया किएक नाना नाम के व्यक्ति के पास दो बेटे हैं। नाटक के माध्यम से आज के युवाओं का अपने पैरेंट्स पर ध्यान नहीं देने पर कटाक्ष किया गया है।
विज्ञापन
नाना का बड़ा बेटा फौज में रहता है। वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हो जाता है। छोटा बेटा श्याम अमेरिका चला जाता है। वह वहीं सेटल हो जाता है। श्याम के माता-पिता उसे कई बार वहां से बुलाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह वापस नहीं आता।
विज्ञापन
वे बहुत बूढ़े हो जाते हैं। इन हालात में उनकी देखरेख उनका नौकर महाटू करता है। वह कई बार अकेले होने से परेशान रहते हैं। आपसी झगड़ों से परेशान होने के बाद श्याम के मां-बाप एक दिन जहर खाने की कोशिश करते हैं।
एक दिन अचानक उनके दरवाजे की घंटी बजती है और एक आदमी अपने बच्चे के साथ काम मिल जाएगा पूछता है। इस पर वह उससे पूछते हैं कि तुम्हे काम चाहिए, तो वह व्यक्ति हां कह देता है। इस पर बूढे मां-बाप उसे अपने घर में रख लेते हैं। उस छोटे बच्चे से बातचीत के सहारे वह अपना बचा हुआ जीवन जीने की सोचते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति देखने के बाद पूरा पंजाब कला भवन का ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस नाटक में सुदेश शर्मा ने शानदार कैरेक्टर किया, जिसकी सभी ने काफी तारीफ की।