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रूस-यूक्रेन युद्ध: दुनिया भर में बढ़ी गेहूं की मांग, पंजाब के आढ़तियों और किसानों के चेहरों पर आई रौनक

Mon, 28 Mar 2022 11:34 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 28 Mar 2022 11:34 AM IST
सार

स्थानीय अनाज व्यापारियों ने बताया कि युद्ध के कारण उन्हें दूसरे देशों से कई बड़े ऑर्डर मिले हैं, उम्मीद है कि यदि युद्ध लंबा चलता है तो और भी नए ऑर्डर मिलेंगे।

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Traders of Punjab excited by the demand for wheat across the world
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रूस-यूक्रेन युद्ध से पंजाब की वीरान पड़ी मंडियां उम्मीदों से गुलजार होने लगी हैं। पंजाब के आढ़तियों और किसानों के चेहरों पर रौनक है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की बढ़ी मांग के बीच पंजाब को भी विदेश से ऑर्डर मिलने लगे हैं। आईटीसी और अडाणी जैसी बड़ी कंपनियों ने भी पंजाब की अनाज मंडियों का रुख कर दिया है।

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रूस और यूक्रेन दुनिया में प्रमुख गेहूं निर्यातक देश हैं। चूंकि दोनों में युद्ध चल रहा है इसलिए वहां से गेहूं निर्यात की संभावनाएं धूमिल हैं। इसका लाभ भारत को मिलने की संभावना से खासतौर पर पंजाब के आढ़तियों और किसानों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। उसका असर भी दिखने लगा है। खन्ना में एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी है।
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इस सीजन में गेहूं की कटाई नहीं होती इसलिए मंडी अमूमन वीरान रहती है लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण देश-विदेश के प्रमुख गेहूं निर्यातकों ने पंजाब का रुख कर लिया है। इनमें आईटीसी और अडाणी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जिसके चलते पंजाब के अनाज व्यापारी खासे उत्साह में हैं, खासकर खन्ना मंडी के। इस समय खन्ना मंडी में लगभग 4 मिलियन टन (40 लाख क्विंटल) गेहूं का भंडारण है।
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अभी यहां के अनाज व्यापारी गेहूं की नई फसल के मंडियों में आने के बाद खन्ना मंडी में ही 200 मिलियन टन भंडारण की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय अनाज व्यापारियों ने बताया कि युद्ध के कारण उन्हें दूसरे देशों से कई बड़े ऑर्डर मिले हैं, उम्मीद है कि यदि युद्ध लंबा चलता है तो और भी नए ऑर्डर मिलेंगे। जबकि कृषि विशेषज्ञों की राय है कि गेहूं का निर्यात बढ़ने से किसान बढ़े मूल्य पर सीधे निर्यातों को गेहूं बेच सकते हैं।
 
कर कमी को लेकर मान से मिलेंगे व्यापारी
गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में गेहूं सस्ता है, इसकी वजह वहां कर कम है। पंजाब के व्यापारी सूबे में लगने वाले कर को कम किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलने की योजना बना रहे हैं। अनाज व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि नए मुख्यमंत्री करों में कटौती करेंगे ताकि निजी व्यापारी भी सही दरों पर बिक्री कर सकें। हरवंश सिंह रोशा, अध्यक्ष खन्ना व्हीट ट्रेडर्स एसोसिएशन

रूस-यूक्रेन युद्ध से बने हालात का फायदा अनाज व्यापारियों को तो हो सकता है लेकिन किसानों को कोई खास लाभ होने वाला नहीं है। किसानों को तब लाभ हो सकता है जब एमएसपी को और बेहतर किया जाए। बलबीर सिंह राजेवाल, अध्यक्ष, संयुक्त समाज मोर्चा

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