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एस्टेट ऑफिस के नए नियमों के खिलाफ व्यापारी और उद्योगपति हुए एकजुट

Sat, 16 Apr 2022 12:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 16 Apr 2022 12:33 AM IST
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Traders and industrialists united against the new rules of the Estate Office
चंडीगढ़। कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलेपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन के प्रस्ताव का शहरभर में विरोध हो रहा है। इस मुद्दे पर दुकानदार, व्यापारी और उद्योगपति एकजुट हो गए हैं। सभी ने एक सुर में इस प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही है। अब चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज ने भी प्रशासन को पत्र लिखकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
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चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा है कि कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलेपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन कर भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 400 गुना बढ़ाना उद्योगपतियों के साथ अन्याय है। इसके अलावा हर साल 5 फीसदी की वृद्धि का भी प्रावधान रखा गया है, जिसके पीछे कोई तर्क नहीं दिया गया है। कहा है कि पिछले 50 वर्षों से किसी आवश्यकता आधारित परिवर्तन (नीड बेस चेंज) की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि पड़ोसी राज्य व्यापारियों व उद्योगपतियों को इस पर कई रियायतें दे चुके हैं। प्रशासन को सबसे पहले परिवर्तनों की अनुमति देनी चाहिए और उसके बाद उल्लंघनों व दुरुपयोग को परिभाषित करना चाहिए।
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प्रशासन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नारे का पालन करना चाहिए और एमएसएमई के लिए बाधा उत्पन्न नहीं करनी चाहिए। प्रशासन को पहले मौजूदा उल्लंघन व दुरुपयोग नोटिस को माफ करना चाहिए, फिर आवश्यकता आधारित परिवर्तनों की अनुमति दें और उल्लंघन व दुरुपयोग को ठीक करने के लिए पर्याप्त समय दें। उसके बाद ही उसे संशोधित अधिनियम को लागू करना चाहिए।
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प्रशासन चाहता ही नहीं कि लोग आपत्तियां दर्ज करा पाएं
नवीन मंगलानी ने कहा कि आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कुल 10 दिन का समय दिया गया, जिसमें से पांच दिन छुट्टी रही। टिप्पणी दर्ज कराने के लिए न किसी ईमेल आईडी जिक्र है, न ही कोई ऑनलाइन व्यवस्था है। सिर्फ एक कमरे के पते का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य नीतियों पर सुझाव देने के लिए संबंधित विभाग लोगों को ई-मेल आईडी भी मुहैया कराता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सुझाव दे सकें लेकिन इस संशोधन के मामले में एस्टेट ऑफिस ने कुछ नहीं किया है। इससे जाहिर होता है कि प्रशासन नहीं चाहता कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस संशोधन पर आपत्तियां दर्ज करा सकें। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श करने और आपत्तियां जमा करने के लिए कम से कम 30 दिन का समय होना चाहिए।
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