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खुलासा : टोसिलिजुमैब इंजेक्शन गंभीर संक्रमितों के इलाज में कारगर नहीं
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चंडीगढ़। कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में टोसिलिजुमैब इंजेक्शन कारगर नहीं है। पीजीआई के विशेषज्ञों ने नेहरू एक्सटेंशन में बनाए गए कोविड-19 अस्पताल में भर्ती मरीजों पर इस इंजेक्शन का ट्रायल करयह साबित कर दिया है। ट्रायल करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि अगर आईसीयू में भर्ती मरीज को पहले 48 घंटे के दौरान इसकी डोज दे दी जाए तो उसकी हालत में कुछ हद तक सुधार हो सकता है, लेकिन इससे उस मरीज की जान बच जाए यह कहना सही नहीं होगा।
डॉक्टरों की टीम ने ऐसे किया ट्रायल
पीजीआई डीन एकेडमी व कोविड प्रबंधन के चेयरमैन प्रो. जीडी पुरी के नेतृत्व में ट्रायल करने वाली टीम में शामिल पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. करण सिंगला ने बताया कि इसके लिए कोविड अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 70 मरीजों पर इंजेक्शन का ट्रायल किया गया। उनमें से 35 मरीजों को यह इंजेक्शन दिया गया और 35 को नहीं। उसके कुछ दिनों बाद दोनों वर्ग में शामिल सभी मरीजों की स्थिति जांची गई, जिसमें कोई खास अंतर नहीं मिला। डॉ. करण ने बताया कि इस इंजेक्शन का उन मरीजों पर थोड़ा फायदा नजर आया जिन्हें आईसीयू में भर्ती होने के 48 घंटे के अंदर इसकी डोज दी गई। जिन 35 मरीजों को यह इंजेक्शन दिया गया, उनमें से 22 को 48 घंटे के दौरान आईसीयू में भर्ती किया गया था। उन पर कुछ सकारात्मक प्रभाव तो दिखाई दिया, लेकिन इसका दूरगामी परिणाम किसी पर सामने नहीं आया। इससे साबित होता है कि इस इंजेक्शन का कोविड-19 के इलाज में महत्वपूर्ण रोल नहीं है।
इन बीमारियों में उपयोगी
टोसिलिजुमैब का इस्तेमाल आंक्यलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस, रुमेटोयड ऑर्थराइटिस, त्वचा रोग (चांदीनुमा परतदार त्वचा लाल चकत्ते), अल्सरेटिव कोलाइटिस में किया जाता है।
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ऐसे करता है काम
टोसिलिजुमैब शरीर में उन रसायनों की गतिविधि को बाधित करता है जो जोड़ों की कुछ बीमारियों में पीड़ादायक सूजन तथा लालिमा पैदा करते हैं। टोसिलिजुमैब, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी नामक दवाओं की श्रेणी से संबंध रखता है। यह इंटरल्यूकिन-6 नामक विशिष्ट प्रोटीन के कार्य को अवरुद्ध करता है जो शरीर की सूजन संबंधी प्रक्रिया में शामिल रहता है।
खूब हुई कालाबाजारी
टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की दो डोज मरीजों को लगाई जाती है। इसके एक डोज की कीमत 35 हजार रुपये है। ऐसे में कई शहरों से ये शिकायत सामने आ चुकी है कि कोविड के गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए उनके परिजनों ने इस इंजेक्शन को मुंह मांगी कीमत देकर खरीदा है जबकि भारत सरकार के निर्देशानुसार इसकी खरीद बिक्री पर रोक है। सरकार की तरफ से स्वास्थ्य विभाग को सीधे इसकी आपूर्ति की जाती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
रेमडेसिविर व टोसिलिजुमैब इंजेक्शन कोरोना के सभी मरीजों पर कारगर नहीं है। यह पीजीआई ने कोविड-19 के बेहद गंभीर मरीजों पर ट्रायल कर साबित कर दिया है। ऐसी स्थिति में इन दोनों इंजेक्शन के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बिना जरूरत के अगर यह इंजेक्शन दिया गया तो मरीज को फायदे की बजाय नुकसान पहुंच सकता है।
-प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई डीन एकेडमी व कोविड प्रबंधन के चेयरमैन
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डॉक्टरों की टीम ने ऐसे किया ट्रायल
पीजीआई डीन एकेडमी व कोविड प्रबंधन के चेयरमैन प्रो. जीडी पुरी के नेतृत्व में ट्रायल करने वाली टीम में शामिल पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. करण सिंगला ने बताया कि इसके लिए कोविड अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 70 मरीजों पर इंजेक्शन का ट्रायल किया गया। उनमें से 35 मरीजों को यह इंजेक्शन दिया गया और 35 को नहीं। उसके कुछ दिनों बाद दोनों वर्ग में शामिल सभी मरीजों की स्थिति जांची गई, जिसमें कोई खास अंतर नहीं मिला। डॉ. करण ने बताया कि इस इंजेक्शन का उन मरीजों पर थोड़ा फायदा नजर आया जिन्हें आईसीयू में भर्ती होने के 48 घंटे के अंदर इसकी डोज दी गई। जिन 35 मरीजों को यह इंजेक्शन दिया गया, उनमें से 22 को 48 घंटे के दौरान आईसीयू में भर्ती किया गया था। उन पर कुछ सकारात्मक प्रभाव तो दिखाई दिया, लेकिन इसका दूरगामी परिणाम किसी पर सामने नहीं आया। इससे साबित होता है कि इस इंजेक्शन का कोविड-19 के इलाज में महत्वपूर्ण रोल नहीं है।
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इन बीमारियों में उपयोगी
टोसिलिजुमैब का इस्तेमाल आंक्यलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस, रुमेटोयड ऑर्थराइटिस, त्वचा रोग (चांदीनुमा परतदार त्वचा लाल चकत्ते), अल्सरेटिव कोलाइटिस में किया जाता है।
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ऐसे करता है काम
टोसिलिजुमैब शरीर में उन रसायनों की गतिविधि को बाधित करता है जो जोड़ों की कुछ बीमारियों में पीड़ादायक सूजन तथा लालिमा पैदा करते हैं। टोसिलिजुमैब, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी नामक दवाओं की श्रेणी से संबंध रखता है। यह इंटरल्यूकिन-6 नामक विशिष्ट प्रोटीन के कार्य को अवरुद्ध करता है जो शरीर की सूजन संबंधी प्रक्रिया में शामिल रहता है।
खूब हुई कालाबाजारी
टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की दो डोज मरीजों को लगाई जाती है। इसके एक डोज की कीमत 35 हजार रुपये है। ऐसे में कई शहरों से ये शिकायत सामने आ चुकी है कि कोविड के गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए उनके परिजनों ने इस इंजेक्शन को मुंह मांगी कीमत देकर खरीदा है जबकि भारत सरकार के निर्देशानुसार इसकी खरीद बिक्री पर रोक है। सरकार की तरफ से स्वास्थ्य विभाग को सीधे इसकी आपूर्ति की जाती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
रेमडेसिविर व टोसिलिजुमैब इंजेक्शन कोरोना के सभी मरीजों पर कारगर नहीं है। यह पीजीआई ने कोविड-19 के बेहद गंभीर मरीजों पर ट्रायल कर साबित कर दिया है। ऐसी स्थिति में इन दोनों इंजेक्शन के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बिना जरूरत के अगर यह इंजेक्शन दिया गया तो मरीज को फायदे की बजाय नुकसान पहुंच सकता है।
-प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई डीन एकेडमी व कोविड प्रबंधन के चेयरमैन