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Punjab News: हाईकोर्ट ने कहा- समय पर सेवानिवृत्ति लाभ जरूरी, ताकि सम्मानजनक जीवन जी सके कर्मचारी

Thu, 14 Mar 2024 12:08 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 14 Mar 2024 12:08 AM IST
सार

समय पर सेवानिवृत्ति लाभ जारी नहीं करने पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि समय पर सेवानिवृत्ति लाभ के बिना कोई कर्मचारी सम्मानजनक जीवन नहीं जी सकता है। हाईकोर्ट ने सरकार को बकाया राशि जारी करने का आदेश दिया।

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Timely retirement benefits are necessary for a retired employee to live a respectable life says high court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए समय पर रिटायरमेंट लाभ जारी करना बेहद आवश्यक है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ चतुर्थ श्रेणी से सेवानिवृत्त कर्मचारी को बकाया राशि देने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है। साथ ही इस देरी के लिए सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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सफाई सेवक शकुंतला देवी ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह 35 वर्षों से अधिक समय तक विभाग की सेवा करने के बाद नगर परिषद तापा के कार्यालय से 2020 में सेवानिवृत्त हुईं लेकिन उसे सेवानिवृत्ति लाभ जारी नहीं किए गए। याची ने 2021 में हाईकोर्ट का भी रुख किया था और तब कोर्ट ने नगर परिषद को एक महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। आदेश के बावजूद सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
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याचिकाकर्ता ने तब अवमानना याचिका दायर की। उसके बाद सरकार ने स्वीकार किया गया कि याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के लिए 13,56,993 रुपये का भुगतान किया जाना है। सरकारी वकील ने इस आधार पर ब्याज देने के लिए याचिकाकर्ता की याचिका का विरोध किया कि नगर परिषद तपा की खराब वित्तीय स्थिति के कारण पेंशन बकाया जारी करने में देरी हुई है। 

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उन्होंने कहा कि नगर परिषद तपा पहले से ही वित्तीय संकट में है इसलिए ब्याज से नगर परिषद पर और बोझ पड़ेगा। इस वजह से ब्याज के लिए याचिकाकर्ता के दावे को अस्वीकार किया जा सकता है। कोर्ट ने नगर परिषद की इस दलील को खारिज कर दिया कि कमजोर वित्तीय स्थिति को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने से इन्कार करने का आधार माना जा सकता है। 

जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के पेंशन लाभ जारी करने में कोई बाधा नहीं है। याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित नहीं है, जो उसके पेंशन लाभ रोकने का अधिकार देती। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता प्रति वर्ष 9 प्रतिशत की दर से ब्याज की हकदार है।याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कोर्ट केस के खर्च की भी हकदार होगी, क्योंकि चतुर्थ श्रेणी सेवानिवृत्त कर्मचारी होने के नाते उसे अपने वैध बकाया का दावा करने के लिए तीन मामले दायर करने पड़े जिस पर 25,000 रुपये खर्च किया गया।

कोर्ट ने नगर परिषद को कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के छह सप्ताह की अवधि के भीतर भुगतान करने का भी आदेश जारी किया। जस्टिस नमित कुमार ने कहा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को केवल सेवानिवृत्ति लाभों पर अपना जीवन चलाना होता है। सेवानिवृत्ति लाभ जारी नहीं होने की स्थिति में कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी सम्मानजनक जीवन नहीं जी पाएगा।

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