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लापरवाहीः कुवैत से तीन लोग पहुंचे चंडीगढ़, एक रात घर में ही सोए, फिर अधिकारियों की नींद खुली

Mon, 20 Jul 2020 01:52 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 20 Jul 2020 01:52 PM IST
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Three people arrived from Kuwait in Chandigarh, careless administration
सांकेतिक तस्वीर
यूटी प्रशासन कोरोना का संक्रमण रोकने के लाख दावे करे, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। चंडीगढ़ के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले तीन लोग 14 जुलाई को कुवैत से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। चंडीगढ़ की तरफ से उन्हें रिसीव करने कोई नहीं गया था तो तीनों टैक्सी कर चंडीगढ़ पहुंचे और खुद जीएमएसएच-16 जाकर जांच करवाई, पुलिस को भी जानकारी दी, लेकिन लापरवाही ऐसी कि कुछ पुलिसकर्मियों ने उन्हें घर जाने के लिए कह दिया।
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कुवैत से लौटे प्रदीप ने बताया कि वह 14 जुलाई को शाम करीब 7 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। उनके साथ शहर के दो अन्य लोग भी थे। शाम को पहुंचने के बाद वह एयरपोर्ट पर चंडीगढ़ के काउंटर पर गए, लेकिन वहां पर कोई नहीं था। उन्होंने पूरी रात एयरपोर्ट पर बिताई। सुबह एयरपोर्ट पर बैठे किसी अधिकारी ने उन्हें किसी को अपनी सारी जानकारी ई-मेल करने के लिए कहा। इसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद सीआईएसएफ के जवानों ने उन्हें वहां से जाने दिया। वह सभी टैक्सी कर हल्लोमाजरा चौक पहुंचे।
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प्रदीप ने बताया कि तुरंत हल्लोमाजरा के बीट बॉक्स पर गए। वहां मौजूद पुलिस वालों को बताया कि वह कुवैत से आए हैं। इस पर पुलिस कर्मियों ने जीएमसीएच-32 में जाकर अपनी जांच कराने को कहा। वह सभी जीएमसीएच-32 गए, जहां से उन्हें जीएमएसएच-16 भेज दिया गया। जांच कराने के बाद तीनों वापस हल्लोमाजरा पहुंचे और पुलिस को रिपोर्ट दिखाई। इस पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें 14 दिन के लिए घर में रहने को कह दिया।
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खुद पुलिस के पास गए, फिर भी पुलिस ने किया दुर्व्यवहार

प्रदीप ने बताया कि 15 जुलाई की रात घर पर रहे। अगले दिन दोपहर में उनके पास किसी पुलिस अधिकारी का फोन आया और पंचायत भवन में शिफ्ट होने को कहा। वह अपना सामान लेकर खुद पंचायत भवन गए। प्रदीप ने बताया कि वह कुवैत में हेल्पर का काम करते थे।

पंचायत भवन में एक रात का 600 रुपये प्रशासन की तरफ से लिया जा रहा है, जो वह नहीं दे सकते हैं। इसके अलावा यहां पर न तो कोई सफाई करने वाला आता है, न ही समय पर खाना मिल रहा है। यह रेट बहुत ज्यादा है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ पहुंचने के बाद वह खुद पुलिस के पास गए, इसके बावजूद उन्हें पंचायत भवन में पुलिस कर्मियों की ओर से दुर्व्यवहार किया गया।

जो भी व्यक्ति विदेश से आ रहे हैं, सरकार की तरफ से चंडीगढ़ को उनकी लिस्ट सौंपी जाती है। इस मामले में हो सकता है कि प्रशासन को लिस्ट न मिली हो। इसके अलावा अगर कोई पंचायत भवन में पैसे देने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें हम शहर के किसी कम्यूनिटी सेंटर में क्वारंटीन कर सकते हैं।
- मनोज परिदा, एडवाइजर
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