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फगवाड़ा: गलत खून चढ़ाने से बिगड़ी युवक की हालत, तीन अधिकारी निलंबित, ब्लड बैंक भी बंद

Sat, 08 Feb 2020 01:07 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 08 Feb 2020 01:07 AM IST
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Three officers Suspended and Phagwara blood bank closed
फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

सिविल अस्पताल फगवाड़ा के ब्लड बैंक में एक नौजवान को अलग ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाने और दो मरीजों को संक्रमित खून चढ़ाने संबंधी लापरवाही पर गंभीर नोटिस लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस घटना की विस्तृत जांच करवाने और राज्य के सभी ब्लड बैंकों का तुरंत निरीक्षण करने के आदेश जारी किए हैं। 

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यह आदेश फगवाड़ा में दो मरीजों को एचसीवी और एचबीएसएजी से संक्रमित खून की दो इकाइयां चढ़ाए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस घटना के बाद फगवाड़ा के ब्लड बैंक को बंद कर दिया गया है और संबंधित बीटीओ डॉ. हरदीप सिंह सेठी को निलंबित कर दिया गया है और एलटी रवि पॉल की सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। इसके साथ ही एसएमओ डॉ. कमल किशोर को भी निलंबित कर दिया गया है और सिविल सर्जन कपूरथला को इस आपराधिक लापरवाही के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया है।
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मुख्यमंत्री ने इस मामले पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए स्वास्थ्य विभाग को सभी ब्लड बैंकों की तुरंत जांच करवाने के निर्देश दिए, ताकि खून प्रबंधन के सही मापदंडों के पालन को यकीनी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कपूरथला जिले के सभी ब्लड बैंकों का अगले तीन दिनों के अंदर सिविल सर्जनों के नेतृत्व वाली डिस्ट्रिक्ट ब्लड ट्रांसफीयूजन कमेटी द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। 

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उन्होंने आगे कहा कि अन्य जांच प्रक्रियाओं के अलावा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, पंजाब ब्लड एंड ट्रांसफीयूजन कमेटी की टीमों द्वारा अगले 15 दिनों में सभी सरकारी ब्लड बैंक का निरीक्षण और 31 मार्च तक सभी प्राइवेट ब्लड बैंकों का निरीक्षण किया जाएगा। यह भी देखा गया है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफीयूजन कमेटियां समय-समय पर ब्लड बैंक का निरीक्षण नहीं कर रहीं। 

सिविल सर्जनों को अब समय-समय पर ब्लड बैंकों की जांच को यकीनी बनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं, जिससे मानक कार्यकारी प्रक्रियाओं का पालन किया जा सके और भविष्य में ऐसी गलतियां न हों। हर महीने इस संबंधी एक रिपोर्ट पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफीयूजन काउंसिल को भेजने का भी मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिए गए हैं।

30 जनवरी को उजागर हुआ लापरवाही का मामला
प्रवक्ता ने बताया कि फगवाड़ा में यह घटना 30 जनवरी को ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा ब्लड बैंक के साझे निरीक्षण के दौरान सामने आई। इस पर तुरंत कार्यवाही करते हुए सिविल सर्जन कपूरथला द्वारा जांच और तथ्यों की पड़ताल के लिए तुरंत एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था। जांच में सीएच फगवाड़ा के एसएमओ /ब्लड ट्रांसफ्यूजन अफसर /लैब टेक्नीशियन के बयानों के साथ-साथ रिकॉर्डों की पड़ताल करते समय पता चला कि खून की जांच एलीसा और रैपिड टेस्ट के साथ की गई थी। 

ब्लड यूनिट बैग नंबर 179, 24 जनवरी को एकत्रित किया गया और यूनिट नंबर 2922 को 15 अक्तूबर, 2019 को एकत्रित किया गया था। इन इकाइयों को एलीसा टेस्टिंग तकनीक के दौरान क्रियाशील पाया गया था। इसके बाद एलटी द्वारा किया रैपिड टैस्ट गैर-क्रियाशील पाया गया। इस तरह रैपिड टेस्ट के बाद एलीसा टेस्टिंग करना स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया का उल्लंघन है, जिसकी पुष्टी करना बहुत संवेदनशील और लाजिमी माना जाता है। 

खून का नमूना एलिसा के अनुसार क्रियाशील और रैपिड जांच द्वारा गैर-क्रियाशील पाए जाने पर भी ब्लड बैंक द्वारा मरीजों को खून जारी किया गया, जिसे सभी मानक ऑपरेटिंग प्रक्रियाओं के विरुद्ध पाया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह भी पता लगा कि एक मरीज जिसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है, को बी पॉजिटिव खून चढ़ाया गया, जो मरीज की जान के लिए बड़ा खतरा था। जिससे नौजवान रोगी की हालत बिगड़ गई।

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