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हरियाणा के स्कूलों में त्रिभाषा फार्मूला लागू: 9वीं व 10वीं में अब छह के बजाय पढ़ने होंगे सात विषय
Sat, 22 Feb 2025 08:55 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2025 08:55 PM IST
सार
पहले 9वीं व 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान अनिवार्य विषय था। 6वां विषय वैकल्पिक था। इनमें तीन भाषा संस्कृत, पंजाबी, उर्दू और शारीरिक शिक्षा, ड्राइंग, म्यूजिक और कंप्यूटर साइंस शामिल थे, इनमें से एक विषय चुनना होता था।
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- फोटो : adobe stock
विस्तार
हरियाणा में 9वीं व 10वीं के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब उनको संस्कृत, पंजाबी और उर्दू में एक विषय पढ़ना अनिवार्य होगा। वे तीनों में से एक विषय अपनी इच्छा के अनुसार ले सकते हैं। यानी नए सत्र से उनको छह के बजाय सात विषय पढ़ने होंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने इसके लिए त्रिभाषा फार्मूला लागू किया है। 9वीं के विद्यार्थियों के लिए यह फैसला इसी साल अप्रैल में शुरू होने वाले सत्र से लागू होगा जबकि 10वीं में अगले सत्र से।
विभाग के अनुसार, पाठ्यक्रम में 6वें विषय के तौर पर संस्कृत, पंजाबी और उर्दू को शारीरिक शिक्षा, ड्राइंग, म्यूजिक और कंप्यूटर साइंस के साथ वैकल्पिक किया गया था। इस कारण विद्यार्थी इन तीनों भाषाओं में कुछ खास रुचि नहीं दिखा रहे थे। वे वैकल्पिक विषय में शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर या ड्राइंग का ऑप्शन ही लेते थे। त्रिभाषा फार्मूले को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में लाने की मांग भी चल रही थी। इसी कारण सरकार ने इसे लागू करने का फैसला किया। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने इस फैसले को सराहनीय कदम बताया है।
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स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने इसके लिए त्रिभाषा फार्मूला लागू किया है। 9वीं के विद्यार्थियों के लिए यह फैसला इसी साल अप्रैल में शुरू होने वाले सत्र से लागू होगा जबकि 10वीं में अगले सत्र से।
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विभाग के अनुसार, पाठ्यक्रम में 6वें विषय के तौर पर संस्कृत, पंजाबी और उर्दू को शारीरिक शिक्षा, ड्राइंग, म्यूजिक और कंप्यूटर साइंस के साथ वैकल्पिक किया गया था। इस कारण विद्यार्थी इन तीनों भाषाओं में कुछ खास रुचि नहीं दिखा रहे थे। वे वैकल्पिक विषय में शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर या ड्राइंग का ऑप्शन ही लेते थे। त्रिभाषा फार्मूले को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में लाने की मांग भी चल रही थी। इसी कारण सरकार ने इसे लागू करने का फैसला किया। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने इस फैसले को सराहनीय कदम बताया है।
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