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मेघनाद का पुतला जलाने वाले एनआरआई समेत तीन को दबोचा
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चंडीगढ़। सेक्टर-34 थाना पुलिस ने दशहरे से एक दिन पहले सेक्टर-46 में मेघनाद का पुतला जलाने के आरोप में एक एनआरआई समेत तीन को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की फार्च्यूनर कार भी कब्जे में ले ली है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सन्नी एनक्लेव, खरड़ निवासी एनआरआई तेजिंदर सिंह (31), जसराज सिंह (19) और सेक्टर-68 मोहाली के रहने वाले आर्यन (31) के रूप में हुई है।
सेक्टर-46 में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के खड़े पुतलों में से मेघनाद के पुतले में किसी ने आग लगा दी थी। यह घटना दशहरे से एक दिन पहले मंगलवार आधी रात को हुई थी। हालांकि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया था, जिससे रावण और कुंभकर्ण के पुतले जलने से बच गए। उस दिन रात को लगभग एक बजे हवाई फायर या रॉकेट के जरिए यह आग लगाई गई थी। मेघनाद के पुतले को आग लगने की घटना की जानकारी मिलने के बाद फायर विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंची थीं।
मेघनाद का पुतला लगभग 80 फुट ऊंचा था। यहां पर रावण का 92 फुट ऊंचा पुतला बनाया गया था, जो चंडीगढ़ में सबसे ऊंचा रावण का पुतला था। आरोपी घटना के लगभग ढाई घंटे बाद फिर रात को रावण का पुतला जलाने आए थे, मगर मौका नहीं मिला तो भाग निकले।
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इन पुतलों को सेक्टर-46 की सनातन धर्म दशहरा कमेटी ने तैयार करवाया था। सनातन धर्म दशहरा कमेटी, सेक्टर-46 के प्रधान एनके भाटिया ने बताया कि इस घटना के पीछे कोई असामाजिक तत्व है। पहले मेघनाद के पुतले में आग लगने की घटना को शॉर्ट सर्किट मान लिया गया था। हालांकि इसके बाद देर रात 3.30 से पौने 4 बजे के बीच तीन से चार असामाजिक तत्व आए और दोबारा रॉकेट छोड़ने की कोशिश की। हालांकि उन्हें रोका गया और वह भाग गए। वह रावण को जलाने के लिए आए थे। आरोपी फॉर्च्यूनर गाड़ी में सवार थे और सेक्टर-45 की तरफ निकल गए थे।
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सेक्टर-46 में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के खड़े पुतलों में से मेघनाद के पुतले में किसी ने आग लगा दी थी। यह घटना दशहरे से एक दिन पहले मंगलवार आधी रात को हुई थी। हालांकि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया था, जिससे रावण और कुंभकर्ण के पुतले जलने से बच गए। उस दिन रात को लगभग एक बजे हवाई फायर या रॉकेट के जरिए यह आग लगाई गई थी। मेघनाद के पुतले को आग लगने की घटना की जानकारी मिलने के बाद फायर विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंची थीं।
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मेघनाद का पुतला लगभग 80 फुट ऊंचा था। यहां पर रावण का 92 फुट ऊंचा पुतला बनाया गया था, जो चंडीगढ़ में सबसे ऊंचा रावण का पुतला था। आरोपी घटना के लगभग ढाई घंटे बाद फिर रात को रावण का पुतला जलाने आए थे, मगर मौका नहीं मिला तो भाग निकले।
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इन पुतलों को सेक्टर-46 की सनातन धर्म दशहरा कमेटी ने तैयार करवाया था। सनातन धर्म दशहरा कमेटी, सेक्टर-46 के प्रधान एनके भाटिया ने बताया कि इस घटना के पीछे कोई असामाजिक तत्व है। पहले मेघनाद के पुतले में आग लगने की घटना को शॉर्ट सर्किट मान लिया गया था। हालांकि इसके बाद देर रात 3.30 से पौने 4 बजे के बीच तीन से चार असामाजिक तत्व आए और दोबारा रॉकेट छोड़ने की कोशिश की। हालांकि उन्हें रोका गया और वह भाग गए। वह रावण को जलाने के लिए आए थे। आरोपी फॉर्च्यूनर गाड़ी में सवार थे और सेक्टर-45 की तरफ निकल गए थे।