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Chandigarh News: धनतेरस से पहले इस बार गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ योग
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चंडीगढ़। धनतेरस से पहले 24 अक्तूबर को गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ योग बन रहा है। ज्योतिष में इस योग का काफी महत्व है और इसे खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। शुभ कार्यों को करने के लिए भी यह नक्षत्र उत्तम माना जाता है। सेक्टर-18 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित बृज किशोर पांडेय ने बताया कि 24 अक्तूबर को सुबह 6.59 बजे से शुरू होकर अगले दिन 25 अक्तूबर की सुबह सूर्योदय तक गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ योग है। पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं, इसलिए पुष्य को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। कार्तिक माह में आने वाले पुष्य नक्षत्र को शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।
पंडित बृज किशोर ने कहा कि चंडीगढ़ की राशि मीन है। मीन का स्वामी गुरु बृहस्पति हैं। पुष्य नक्षत्र भी इस बार बृहस्पति यानी वीरवार को पड़ रहा है। ऐसे में शहर के लिए यह बहुत ही शुभ रहने वाला है। उन्होंने कहा कि पुष्य का अर्थ पोषण करनेवाला होता है इसलिए इस योग में सोना चांदी और बर्तन खरीदना बेहद ही शुभ होगा। धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस वर्ष त्र्योदशी 29 अक्तूबर की सुबह 10.31 बजे से शुरू होकर 30 अक्तूबर को दोपहर 1.16 बजे तक है। यह त्योहार सूर्योदय कालिक माना जाता है इसलिए शहर के पंडित व विद्वानों का कहना है कि धनतेरस का त्योहार इस बार 30 अक्तूबर को मनाया जाएगा। हालांकि कई जगह इसे 29 को भी मनाने की तैयारी है। सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि धनतेरस पर सबसे उत्तम मुहूर्त लाभ और अमृत की चौघड़िया है। लाभ की चौघड़िया 30 अक्तूबर को सुबह 8.04 बजे से लेकर 9.24 बजे तक है। अमृत की चौघड़िया सुबह 9.24 बजे से लेकर 10.45 बजे तक है। इसमें धनतेरस का पूजन करना शुभ रहेगा। दोपहर 1.28 बजे से 2.49 बजे तक रोग की चौघड़िया है। दोपहर बाद 2.49 बजे से शाम 4.10 बजे तक उद्वेग की चौघड़िया रहेगी। शाम 4.10 बजे से शाम 5.30 बजे तक चर की चौघड़िया रहेगी। दोपहर 12.06 से 1.28 बजे तक शुभ की चौघड़िया रहेगी जबकि राहुकाल दोपहर 12 बजे से लेकर डेढ़ बजे तक रहेगा। राहु काल में कोई भी कार्य करना अशुभ माना जाता है। वहीं, दोपहर 1.16 बजे के बाद भद्रा लगेगा। भ्रदा के कन्या राशि में होने के कारण इसका निवास पाताल में है। पाताल के भ्रदा में पूजा करने से धन का आगमन होता है। पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि नारद संहिता में ऐसा उल्लेख है कि बुधवार को शुभ की चौघड़िया और पाताल का भ्रदा हो तो राहुकाल में भी खरीदारी की जा सकती है।
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पंडित बृज किशोर ने कहा कि चंडीगढ़ की राशि मीन है। मीन का स्वामी गुरु बृहस्पति हैं। पुष्य नक्षत्र भी इस बार बृहस्पति यानी वीरवार को पड़ रहा है। ऐसे में शहर के लिए यह बहुत ही शुभ रहने वाला है। उन्होंने कहा कि पुष्य का अर्थ पोषण करनेवाला होता है इसलिए इस योग में सोना चांदी और बर्तन खरीदना बेहद ही शुभ होगा। धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस वर्ष त्र्योदशी 29 अक्तूबर की सुबह 10.31 बजे से शुरू होकर 30 अक्तूबर को दोपहर 1.16 बजे तक है। यह त्योहार सूर्योदय कालिक माना जाता है इसलिए शहर के पंडित व विद्वानों का कहना है कि धनतेरस का त्योहार इस बार 30 अक्तूबर को मनाया जाएगा। हालांकि कई जगह इसे 29 को भी मनाने की तैयारी है। सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि धनतेरस पर सबसे उत्तम मुहूर्त लाभ और अमृत की चौघड़िया है। लाभ की चौघड़िया 30 अक्तूबर को सुबह 8.04 बजे से लेकर 9.24 बजे तक है। अमृत की चौघड़िया सुबह 9.24 बजे से लेकर 10.45 बजे तक है। इसमें धनतेरस का पूजन करना शुभ रहेगा। दोपहर 1.28 बजे से 2.49 बजे तक रोग की चौघड़िया है। दोपहर बाद 2.49 बजे से शाम 4.10 बजे तक उद्वेग की चौघड़िया रहेगी। शाम 4.10 बजे से शाम 5.30 बजे तक चर की चौघड़िया रहेगी। दोपहर 12.06 से 1.28 बजे तक शुभ की चौघड़िया रहेगी जबकि राहुकाल दोपहर 12 बजे से लेकर डेढ़ बजे तक रहेगा। राहु काल में कोई भी कार्य करना अशुभ माना जाता है। वहीं, दोपहर 1.16 बजे के बाद भद्रा लगेगा। भ्रदा के कन्या राशि में होने के कारण इसका निवास पाताल में है। पाताल के भ्रदा में पूजा करने से धन का आगमन होता है। पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि नारद संहिता में ऐसा उल्लेख है कि बुधवार को शुभ की चौघड़िया और पाताल का भ्रदा हो तो राहुकाल में भी खरीदारी की जा सकती है।
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