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ऑपरेशन ब्लू स्टार के 31 साल: हिंसा, ब्रिटेन और बवाल

Fri, 05 Jun 2015 04:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 Jun 2015 04:50 PM IST
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thirty one years of opration blue star, all inside exclusive story

ऑपरेशन ब्लू स्टार को जानने से पहले उन परिस्थतियों को जानना जरूरी है, जिसके कारण ये हालात पैदा हुए। पंजाब में हिंसा की शुरुआत 1978 में हुई थी। उसी समय सिख धर्म प्रचार संस्था के प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले का नाम चर्चा में आया।

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1981 के बाद जब पंजाब में हिंसक गतिविधियां बढ़ने लगीं तो भिंडरांवाले के ख़िलाफ लगातार हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगने लगे, लेकिन पुलिस का कहना था कि उनके ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
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अप्रैल 1983 में पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक एएस अटवाल की दिन दिहाड़े हरमंदिर साहिब परिसर में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस का मनोबल लगातार गिरता चला गया।
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लोगों का नरसंहार होता देखकर इंदिरा गांधी सरकार ने पंजाब में दरबारा सिंह की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। पंजाब में स्थिति बिगड़ती चली गई। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार से तीन महीने पहले तक हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 298 हो चुकी थी।
(साभार: विकिपिडिया)

एक जून 1984 से हो गई थी शुरुआत

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ऑपरेशन ब्लू स्टार के हालात एक जून से ही बनने शुरू हो गए थे। एक जून को स्वर्ण मंदिर परिसर और उसके बाहर तैनात केंद्र रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के बीच गोलीबारी हुई थी। स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियारों से लैस संत जरनैल सिंह, कोर्ट मार्शल किए गए मेजर जनरल सुभेग सिंह और सिख स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के लड़ाकों ने चारों तरफ़ खासी मोर्चाबंदी कर रखी थी।

तीन जून को गुरु अर्जुन देव के शहीदी दिवस को लेकर हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जमा थे। उधर, तीन जून तक ही भारतीय सेना अमृतसर में प्रवेश कर गई थी और स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर चुकी थी। शाम में कर्फ़्यू लगा दिया गया था।
चार जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी ताकि चरमपंथियों के हथियारों और असले का अंदाज़ा लगाया जा सके।
(साभार:विकिपिडिया)

5 जून 1984 का काला दिन

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स्वर्ण मंदिर परिसर को बाहर से सेना ने चारों ओर से घेर रखा था। उधर, स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियारों से लैस संत जरनैल सिंह, कोर्ट मार्शल किए गए मेजर जनरल सुभेग सिंह और सिख स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के लड़ाकों ने मोर्चाबंदी कर रखी थी।

इंदिरा गांधी ने सेना को स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसने और ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाने का आदेश दे दिया। जिसके बाद वहां परिसर में भीषण खून-खराबा हुआ।

सैन्य कमांडर केएस बराड़ ने माना कि चरमपंथियों की ओर से भी काफी तीखा जवाब मिला। अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया। स्वर्ण मंदिर पर भी गोलियां चलीं। कई सदियों में पहली बार वहां छह, सात और आठ जून को पाठ नहीं हो पाया। सिख पुस्तकालय जल गया।
(साभार: विकिपिडिया)

ऑपरेशन ब्लूस्टार में 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल

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भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार में 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया, लेकिन इन सब आंकड़ों को लेकर अब तक विवाद चल रहा है।
सिख संगठनों का कहना है कि हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हज़ारों में है। इसका भारत सरकार खंडन करती आई है।

इस कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंची। कई प्रमुख सिख बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाए कि स्थिति को इतना ख़राब क्यों होने दिया गया कि ऐसी कार्रवाई करने की ज़रूरत पड़ी? सरकार की इस ब‌र्बर कार्रवाई से खफा कई प्रमुख सिखों ने या तो अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया या फिर सरकार द्वारा दिए गए सम्मान लौटा दिए।

सिखों और कांग्रेस पार्टी के बीच दरार उस समय और गहरा गई जब दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने कुछ ही महीने बाद 31 अक्तूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से कांग्रेस और सिखों की बीच की खाई और गहरा गई।
(साभार: विकिपिडिया)

ऑपरेशन ब्लू स्टार का ब्रिटेन कनेक्शन

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तीस वर्ष पुराने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार पर ब्रिटेन के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट ‌थ्रैचर ने स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी आतंकियों से मुक्त कराने की सैन्य कार्रवाई में भारत की मदद की।

हालांकि ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने ब्रिटेन की किसी भूमिका से इंकार किया है, लेकिन 30 वर्षों की अवधि के बाद गोपनीयता कानून से बाहर आए इन साक्ष्यों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती।

भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के पूर्व अधिकारी बी. रमन की पुस्तक ‘द काउबायेज ऑफ आर एंड डब्लू’ से उद्घाटित हो चुका है कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तत्कालीन सलाहकार आरएन काव के अनुरोध पर ब्रिटिश सुरक्षा सेवा के दो अधिकारियों ने पर्यटक के तौर पर स्वर्ण मंदिर का दौरा किया था।

ब्रिटेन कनेक्शन से गरमा गई थी सियासत

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ब्रिटेन के लोकप्रिय समाचार पत्र ‘गार्जियन’ का कहना है कि अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के पूरा होने के बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट ‌थ्रैचर ने इंदिरा गांधी के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए एक निजी नोट भेजा था।

इस नोट में कहा गया है कि पृथक सिख राष्ट्र की मांग की पृष्ठभूमि में ब्रिटेन भारत की अखंडता का पूरा समर्थन करता है। यह नोट 20 जून 1984 को भेजा गया था, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन के विशेष सुरक्षा बल की भूमिका से इनकार किया है।

उनका कहना है कि अभी तक इसका पुख्ता सबूत नहीं मिला है, लेकिन चूंकि ब्रिटेन में सिख समुदाय की भारी आबादी है और विपक्षी दल चुनाव में इस मसले को चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं लिहाजा उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट ‌थ्रैचर की भूमिका की जांच का आदेश दे दिया है। इस खुलासे से भारत और ब्रिटेन की सियासत गरमा गई।

'उत्तराखंड में जाकर छिप गए थे बादल'

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ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की भूमिका के खुलासे से बैकफुट पर गई पंजाब कांग्रेस ने अकाली दल पर आक्रामक मोर्चा खोला। कैप्टन अमरिंदर ने आरोप लगाया है कि स्वर्ण मंदिर में जब आपरेशन ब्लू स्टार हुआ, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल उत्तराखंड में अपने फार्म हाउस में जाकर छिप गए थे।

कैप्टन ने सवाल किया कि पंजाब में आतंकवाद के दौरान 35 हजार बेकसूर लोगों की हत्या के मुद्दे पर बादल एक शब्द भी नहीं बोलते। बसों और ट्रेनों से खींच-खींचकर मारे गए लोगों के साथ इतना पक्षपात क्यों किया जा रहा है?

अमरिंदर ने कहा कि 26 मई, 1984 को दिल्ली गेस्ट हाउस में मीटिंग में बादल अपने दो साथियों सहित केंद्रीय मंत्रियों से मिले थे। मीटिंग के बाद बादल के दोनों साथी पंजाब के लिए रवाना हो गए, जबकि बादल बाजपुर में जाकर छिप गए। सब कुछ खत्म होने के बाद ही वह बाहर आए।

कैप्टन ने कहा कि बादल राहुल गांधी से ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए माफी मांगने को नहीं कह सकते। जिस तरह उनकी गलतियों के लिए सुखबीर को आरोपी नहीं ठहराया सकता, क्योंकि वह ऑपरेशन ब्लू स्टार के वक्त युवा थे और विदेश में पढ़ रहे थे, उसी तरह उस राहुल भी उस समय 13 साल के थे।

‘भागा था, तो 16 साल जेल में क्यों रखा’

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स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह आरोपों पर तीखा प्रहार करते हुए शिअद नेता प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर के आरोपों में कुछ भी सच नहीं है।

‘अगर मैं संघर्ष से भाग गया होता तो फिर क्यों कांग्रेस सरकार मुझे 16 वर्ष तक जेलों में रखा?’ उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें डरपोक होने के चलते 16 साल तक जेल में रखा गया? उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने तो उनके खिलाफ ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद देशद्रोह तक के गंभीर मामले दर्ज किए थे, क्योंकि उन्होंने उसका डटकर विरोध किया था।

उन्होंने कहा कि असल बात यह है कि इस तरह की बयानबाजी करके कैप्टन लोगों का ध्यान ऑपरेशन ब्लू स्टार के संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा ब्रिटेन सरकार से ली गई मदद से संबंधित खुलासे से हटाना चाहते हैं। बादल ने कहा कि ब्रिटिश खुलासे और सिख विरोधी दंगों के मुद्दों पर कांग्रेस उलझी हुई है और कैप्टन इस तरह से अपने नेताओं को बचाने का रास्ता ढूंढ रहे हैं।

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