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महम कांडः इनेलो नेता अभय चौटाला सहित पांच आरोपियों को तीसरी बार जारी हुआ नोटिस

Sat, 02 Feb 2019 09:44 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 02 Feb 2019 09:44 AM IST
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third time Notice to 5 accused including Abhay Chautala in maham kand
अभय चौटाला - फोटो : फाइल फोटो

बहुचर्चित महम कांड के 28 साल बाद अदालत में फिर सुनवाई शुरू हो गई है। एडीजे कोर्ट ने शुक्रवार इनेलो नेता अभय चौटाला, पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, गांव दरियापुर के भूपेंद्र उर्फ भूपी और फतेहाबाद जिले के गांव गिल्लाखेड़ा निवासी अजीत सिंह को तीसरी बार नोटिस जारी किया। 

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सभी को 15 मार्च तक अदालत में रिपोर्ट करनी है। दो बार नोटिस न पहुंच पाने पर अदालत ने मृतक हरि सिंह के भाई रामफल की अपील पर फिर नोटिस जारी किया है। मामले में छठे आरोपी भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा का देहांत हो चुका है, जबकि सातवें आरोपी हिसार के गांव दौलतपुर निवासी सुरेंद्र उर्फ पप्पू की तरफ से उनके वकील विनोद अहलावत कोर्ट में पेश हुए। तय हुआ कि सभी आरोपियों को नोटिस मिलने के बाद एक साथ कोर्ट में जवाब दाखिल किया जाएगा।
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छह गवाही के बाद महम अदालत में खारिज हो गई थी याचिका 
बचाव पक्ष के वकील विनोद अहलावत ने बताया कि भिवानी जिले के गांव खरक जाटान निवासी रामफल ने महम की अदालत में 31 मार्च 2017 को याचिका दायर की थी, जिसमें बताया गया कि मार्च 1990 में महम उपचुनाव के दौरान भड़की हिंसा में उसके भाई मास्टर हरि सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में महम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन केस की नए सिरे से जांच कराने के लिए रामफल ने महम अदालत में याचिका दायर की।

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जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। मामले में अदालत में याचिकाकर्ता रामफल निवासी खरक, मृतक हरिसिंह के बेटे बिजेंद्र, खरक निवासी महेंद्र, महम से विधायक आनंद सिंह दांगी के भाई मदीना निवासी धर्मपाल, एसपी आफिस के रिकार्ड कीपर सत्यनारायण व महम थाने के एएसआई जगदीश की गवाही हुई। 

सुनवाई के बाद कोर्ट ने मार्च 2017 में याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जुलाई 2018 में रामफल ने इस फैसले को एडीजे फखरुद्दीन की अदालत में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट एसएस सांगवान ने बताया कि एडीजे की अदालत ने मामले में आरोपी अभय चौटाला सहित सात लोगों को नोटिस किए थे, लेकिन एक आरोपी डीएसपी सुखदेव राणा का देहांत हो चुका है, जबकि दूसरे आरोपी सुरेंद्र के वकील अदालत में पेश हुए।

पुलिस ने नहीं करवाया पोस्टमार्टम, खुद ही कर दिया अंतिम संस्कार

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसने महम पुलिस स्टेशन में 28 फरवरी 1990 को एफआईआर के लिए शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने 1 मार्च 1990 को एफआईआर दर्ज की। उसमें आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पुलिस ने उसके भाई हरी सिंह का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया। खुद ही पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था। 

ये था महम कांड
1989 में देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री थे। उनकी जगह चौधरी ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के सीएम बने। उस समय चौटाला विधानसभा के सदस्य नहीं थे। नियमों के तहत मुख्यमंत्री बने रहने के लिए छह माह के अंदर उनका विधानसभा का सदस्य होना अनिवार्य था। चौधरी देवीलाल ने सांसद बनने के बाद महम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था।

 ऐसे में विधानसभा की महम सीट खाली थी। जिसके बाद उपचुनाव 27 फरवरी 1990 हुआ। जहां से तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने चुनाव लड़े। उसी समय कांग्रेस के मौजूदा विधायक आनंद सिंह दांगी ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ा। चुनाव में धांधली की शिकायतों पर अगले ही दिन आठ मतदान केंद्रों बैंसी, चांदी, महम, भैणी महाराजपुर और खरैंटी में पुनर्मतदान कराने का फैसला किया। पुनर्मतदान के दिन हिंसा हो गई। हिंसा में 10 लोग मारे गए, जिसमें याचिकाकर्ता रामफल का भाई हरीसिंह भी शामिल था।

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