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रामलाल के खिलाफ तीसरी एफआईआर, हत्या के केस में बरी कराने के लिए वसूले थे 1.10 करोड़
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चंडीगढ़। यूटी पुलिस ने रामलाल चौधरी के खिलाफ 85 लाख रुपये की धोखाधड़ी की एक और एफआईआर दर्ज की है। आरोपी रामलाल ने लुधियाना निवासी से उसके बेटे को हत्या के केस में बरी करवाने के लिए रुपये लिए थे, लेकिन उसे अदालत से सजा हो गई। रामलाल पर पहले से ही दो एफआईआर दर्ज हैं और अब यह तीसरी एफआईआर है।
पुलिस के अनुसार लुधियाना निवासी तेजा सिंह ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करते हैं। साल 2012 में उसके बेटे बरजिंदर सिंह को पुलिस ने हत्या के केस में गिरफ्तार किया था और अभी भी जेल में है। वर्ष 2014 में मुकदमे के दौरान वह जरनैल सिंह निवासी ग्राम बिरमी लुधियाना पंजाब के माध्यम से रामलाल चौधरी के संपर्क में आया। रामलाल चौधरी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनके बेटे को उक्त मामले से बरी करा देगा। इसके लिए आरोपी रामलाल ने 1 करोड़ 20 लाख रुपये की मांग की, लेकिन एक करोड़ 10 लाख में बात तय हुई। उन्होंने अपनी जमीन बेचकर पैसे इकट्ठे किए। तेजा सिंह ने 9 जनवरी 2014 को रामलाल को उसकी बेटी, लुधियाना के गांव हमब्रान निवासी रणजीत सिंह, लुधियाना के गांव कटारी निवासी करमजीत सिंह और लुधियाना के गांव ब्रिमी निवासी जरनैल सिंह की उपस्थित में एक करोड़ 10 लाख रुपये दिए। इसकी शिकायतकर्ता ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी की थी। इस वीडियो को तेजा सिंह ने पुलिस को सौंप दिया है। वीडियो में तेजा सिंह रामलाल को रुपये देते हुए दिख रहा है। इस दौरान रामलाल की बेटी भी वहां मौजूद थी। उसकी बेटी की तस्वीर भी वीडियो में कैद हो गई है।
शिकायतकर्ता बोला- रामलाल की कोठी और महंगी गाड़ियों से प्रभावित होकर रुपये दिए
शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी ने छह साल बीत जाने के बाद भी जब उनके बेटे को बरी नहीं करवाया तो उसने अपने रुपये वापस मांगे। इसके बाद रामलाल ने उसे 25 लाख रुपये वापस कर दिए, लेकिन उसके बाद जब रामलाल से वह रुपये मांगते थे तो वह उन्हें धमकियां देता था। तेजा सिंह ने आरोपी रामलाल के खिलाफ अखबारों में प्रकाशित हो रही धोखाधड़ी करने की खबरें पढ़ी। उसे पता चल चुका था कि अब उसके रुपये वापस नहीं आने वाले हैं। इसके बाद तेजा सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप चहल को लिखित में शिकायत दी। सेक्टर-34 थाना पुलिस को रामलाल के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर ली। इस थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की तीसरी एफआईआर दर्ज हुई है। तेजा सिंह ने पुलिस को बताया कि जब वह रामलाल से अपने बेटे को हत्या के केस में बरी करवाने के लिए रामलाल चौधरी से मुलाकात करने आये थे, तब उसके घर के बाहर खड़ी महंगी गाड़ियां और उसकी कोठी को देखकर वह प्रभावित हो गए। उन्हें लगा कि रामलाल उनके बेटे को बरी करवा देगा।
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यह है मामला
चंडीगढ़ पुलिस ने 11 नवंबर को गुड़गांव के अतुल्य शर्मा की 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत पर रामलाल चौधरी को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी की अलग-अलग जगहों पर करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये की संपत्तियां है। इन संपत्तियों में ज्यादातर उसके बड़े बेटे के नाम पर दर्ज हैं। पुलिस को रामलाल के बेटे और बेटी की भी तलाश है। इसके अलावा रामलाल पर पंचकूला के पूर्व जिला राजस्व अधिकारी नरेश कुमार के साथ 6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का भी आरोप है। नरेश कुमार ने 17 नवंबर को रामलाल के खिलाफ एसएसपी विंडो पर शिकायत दी थी। उसी दिन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की।
तीनों मामलों में एक एसआईटी कर रही जांच
एसएसपी कुलदीप चहल ने विशेष एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी में डीएसपी के नेतृत्व में जिला अपराध प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र पटियाल और सेक्टर-34 थाने के प्रभारी निरीक्षक दविंदर सिंह को शामिल किया था। वहीं सोमवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद एसएसपी ने तीसरे मामले में भी एसआईटी गठित कर दी है। इसमें पहले से जांच कर रही एसआईटी डीएसपी के नेतृत्व में निरीक्षक नरेंद्र पटियाल और सेक्टर-34 थाना प्रभारी दविंदर सिंह शामिल हैं।
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पुलिस के अनुसार लुधियाना निवासी तेजा सिंह ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करते हैं। साल 2012 में उसके बेटे बरजिंदर सिंह को पुलिस ने हत्या के केस में गिरफ्तार किया था और अभी भी जेल में है। वर्ष 2014 में मुकदमे के दौरान वह जरनैल सिंह निवासी ग्राम बिरमी लुधियाना पंजाब के माध्यम से रामलाल चौधरी के संपर्क में आया। रामलाल चौधरी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनके बेटे को उक्त मामले से बरी करा देगा। इसके लिए आरोपी रामलाल ने 1 करोड़ 20 लाख रुपये की मांग की, लेकिन एक करोड़ 10 लाख में बात तय हुई। उन्होंने अपनी जमीन बेचकर पैसे इकट्ठे किए। तेजा सिंह ने 9 जनवरी 2014 को रामलाल को उसकी बेटी, लुधियाना के गांव हमब्रान निवासी रणजीत सिंह, लुधियाना के गांव कटारी निवासी करमजीत सिंह और लुधियाना के गांव ब्रिमी निवासी जरनैल सिंह की उपस्थित में एक करोड़ 10 लाख रुपये दिए। इसकी शिकायतकर्ता ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी की थी। इस वीडियो को तेजा सिंह ने पुलिस को सौंप दिया है। वीडियो में तेजा सिंह रामलाल को रुपये देते हुए दिख रहा है। इस दौरान रामलाल की बेटी भी वहां मौजूद थी। उसकी बेटी की तस्वीर भी वीडियो में कैद हो गई है।
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शिकायतकर्ता बोला- रामलाल की कोठी और महंगी गाड़ियों से प्रभावित होकर रुपये दिए
शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी ने छह साल बीत जाने के बाद भी जब उनके बेटे को बरी नहीं करवाया तो उसने अपने रुपये वापस मांगे। इसके बाद रामलाल ने उसे 25 लाख रुपये वापस कर दिए, लेकिन उसके बाद जब रामलाल से वह रुपये मांगते थे तो वह उन्हें धमकियां देता था। तेजा सिंह ने आरोपी रामलाल के खिलाफ अखबारों में प्रकाशित हो रही धोखाधड़ी करने की खबरें पढ़ी। उसे पता चल चुका था कि अब उसके रुपये वापस नहीं आने वाले हैं। इसके बाद तेजा सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप चहल को लिखित में शिकायत दी। सेक्टर-34 थाना पुलिस को रामलाल के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर ली। इस थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की तीसरी एफआईआर दर्ज हुई है। तेजा सिंह ने पुलिस को बताया कि जब वह रामलाल से अपने बेटे को हत्या के केस में बरी करवाने के लिए रामलाल चौधरी से मुलाकात करने आये थे, तब उसके घर के बाहर खड़ी महंगी गाड़ियां और उसकी कोठी को देखकर वह प्रभावित हो गए। उन्हें लगा कि रामलाल उनके बेटे को बरी करवा देगा।
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यह है मामला
चंडीगढ़ पुलिस ने 11 नवंबर को गुड़गांव के अतुल्य शर्मा की 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत पर रामलाल चौधरी को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी की अलग-अलग जगहों पर करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये की संपत्तियां है। इन संपत्तियों में ज्यादातर उसके बड़े बेटे के नाम पर दर्ज हैं। पुलिस को रामलाल के बेटे और बेटी की भी तलाश है। इसके अलावा रामलाल पर पंचकूला के पूर्व जिला राजस्व अधिकारी नरेश कुमार के साथ 6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का भी आरोप है। नरेश कुमार ने 17 नवंबर को रामलाल के खिलाफ एसएसपी विंडो पर शिकायत दी थी। उसी दिन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की।
तीनों मामलों में एक एसआईटी कर रही जांच
एसएसपी कुलदीप चहल ने विशेष एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी में डीएसपी के नेतृत्व में जिला अपराध प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र पटियाल और सेक्टर-34 थाने के प्रभारी निरीक्षक दविंदर सिंह को शामिल किया था। वहीं सोमवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद एसएसपी ने तीसरे मामले में भी एसआईटी गठित कर दी है। इसमें पहले से जांच कर रही एसआईटी डीएसपी के नेतृत्व में निरीक्षक नरेंद्र पटियाल और सेक्टर-34 थाना प्रभारी दविंदर सिंह शामिल हैं।