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Chandigarh News: इक दौर था कतरे को तरसते थे, मगर आज सागर भी है मीना भी, मगर प्यास नहीं...
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चंडीगढ़। इक दौर था कतरे को तरसते थे, मगर आज सागर भी है मीना भी, मगर प्यास नहीं... जैसे ही नदीम अनवर ने अपना यह कलाम पेश किया तो सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। मौका था सेक्टर- 25 स्थित पीयू के साउथ कैंपस के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में रविवार को इबारत लेखक कला मंच चंडीगढ़ की ओर से आने वाले साल को सलाम थीम पर ऑल इंडिया मुशायरे के आयोजन का। मंच के अध्यक्ष कवि और शायर नवीन नीर ने बताया कि दर्शकों में काफी उत्साह रहा। उन्होंने कहा कि कई नामी शायरों ने अपनी रचनाओं पर वाहवाही के साथ तालियां बटोरी।
जावेद आसी ने ये तू नहीं जो सदा बद जबान बोलता है तिरी जबां से तिरा खानदान बोलता है...पेश कर खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद गुलदार जिगर ने हैं फूल भी हमारे, खुशबू भी हमारी है, हिंदी भी हमारी है, उर्दू भी हमारी है... पेश कर वाहवाही लूटी। नवीन नीर ने डुबोने में बहुत माहिर यहां के लोग हैं प्यारे, इशारों पे कभी दरिया किसी के पार मत करना पेश किया। डॉ. तिलक सेठी ने वक्त ने जिसको देर तलक आजमाया है, कुछ करने के तब काबिल हो पाया है... सुनाकर वाहवाही लूटी। नवीन गुप्ता नवी ने दुनिया का सबसे अमीर शख्स हूं मैं, मैंने बटुए में बेटी की तस्वीर लगा रखी है... सुनाकर सबका दिल जीत लिया। कवि सुरेश ने मैं इश्क में दीवानों सा ही चाहूंगा, मैं मोहब्बत हूं, न मौसम जो बदल जाऊंगा... पेश कर वाहवाही के साथ तालियां बटोरी। गुरदीप गुल ने कितने ही ख्वाबों को नजरों में बसा रखा है...पेश किया। अल्लाहरखा ने लौ चिरागों की मद्धम हुई जाती है, लगता है जिंदगी अब कम हुई जाती है पेश किया। अनुष्का त्यागी ने जी चाहता है संभाल कर रख लूं इस सांझ ढलते सूरज को, बस इसलिए कि जीवन में कभी अंधेरा न हो... पेश कर तालियां बटोरी।
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जावेद आसी ने ये तू नहीं जो सदा बद जबान बोलता है तिरी जबां से तिरा खानदान बोलता है...पेश कर खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद गुलदार जिगर ने हैं फूल भी हमारे, खुशबू भी हमारी है, हिंदी भी हमारी है, उर्दू भी हमारी है... पेश कर वाहवाही लूटी। नवीन नीर ने डुबोने में बहुत माहिर यहां के लोग हैं प्यारे, इशारों पे कभी दरिया किसी के पार मत करना पेश किया। डॉ. तिलक सेठी ने वक्त ने जिसको देर तलक आजमाया है, कुछ करने के तब काबिल हो पाया है... सुनाकर वाहवाही लूटी। नवीन गुप्ता नवी ने दुनिया का सबसे अमीर शख्स हूं मैं, मैंने बटुए में बेटी की तस्वीर लगा रखी है... सुनाकर सबका दिल जीत लिया। कवि सुरेश ने मैं इश्क में दीवानों सा ही चाहूंगा, मैं मोहब्बत हूं, न मौसम जो बदल जाऊंगा... पेश कर वाहवाही के साथ तालियां बटोरी। गुरदीप गुल ने कितने ही ख्वाबों को नजरों में बसा रखा है...पेश किया। अल्लाहरखा ने लौ चिरागों की मद्धम हुई जाती है, लगता है जिंदगी अब कम हुई जाती है पेश किया। अनुष्का त्यागी ने जी चाहता है संभाल कर रख लूं इस सांझ ढलते सूरज को, बस इसलिए कि जीवन में कभी अंधेरा न हो... पेश कर तालियां बटोरी।
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