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पीयू लीट व मीट परीक्षा मर्ज करने की उठी मांग, छात्र बोले- डिप्लोमा व डिग्री के इंजीनियरिंग के लिए हो एक परीक्षा
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से इंजीनियरिंग की डिग्री कोर्सेज में दाखिले के लिए आयोजित की जाने वाली पीयू लीट व पीयू मीट परीक्षा को मर्ज करने की मांग उठी है। विद्यार्थियों का कहना है कि एक परीक्षा होगी तो मेरिट के आधार पर दाखिले हो जाएंगे। साथ ही डिप्लोमा वाले विद्यार्थियों को भी दाखिले में मौका मिल जाएगा।
पीयू की ओर से पीयू लीट परीक्षा डिप्लोमा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में 10 फीसदी डिप्लोमा के विद्यार्थियों को दाखिले सीसीईटी डिग्री विंग में मिलते हैं। इस परीक्षा के जरिए कुछ ही विद्यार्थी डिग्री विंग तक दाखिले के लिए पहुंच पाते हैं। पीयू की ओर से दूसरी परीक्षा पीयू मीट आयोजित की जाती है। यह माइग्रेशन एग्जामिनेशन टेस्ट है जो दाखिले ले चुके विद्यार्थियों के लिए कोर्स बदलने के लिए आयोजित होता है। इसमें जेईई मेन्स के छात्र भी शामिल होते हैं। इस परीक्षा का उद्देश्य पीयू अपनी यूआईईटी व होशियारपुर रीजनल केंद्र के अलावा सीसीईटी में खाली सीटों को भरने के लिए करता है, क्योंकि पीयू ने रास्ता निकाला था कि कई कोर्स में हर साल उनकी सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में इस परीक्षा के जरिये विद्यार्थी आएंगे और सीटें भर जाएंगी। यदि यह विद्यार्थी नहीं पहुंचते हैं या पहुंचने के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं तो उन सीटों को फिर पीयू लीट की परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को शामिल कर लिया जाता है। यह नौबत बहुत ही कम आती है। पीयू लीट को यह लाभ नहीं मिल पाता।
ये हैं विद्यार्थियों के तर्क
छात्रों का कहना है कि पीयू लीट व पीयू मीट परीक्षा का पाठ्यक्रम जब 80 फीसदी एक है तो फिर दो परीक्षा क्यों करवाई जा रही है। संस्थानों का उद्देश्य खाली सीटों को भरने का है। ऐसे में एक ही परीक्षा आयोजित की जाए। उसमें जो भी मेरिट मे आए उसे दाखिला मिलना चाहिए। चाहे वह डिप्लोमा के छात्र हों या फिर डिग्री के। लेटरल एंट्री का लाभ जिस तरह मिल रहा है उस तरह जारी रखा जाना चाहिए यानी दस फीसदी कोटा बरकरार रहे। छात्र शुभम, विक्रम शर्मा, राजेश कुमार आदि ने यह मांग उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार देशभर में एक ही परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश कर रही है और यहां अलग-अलग हो रही हैं। ऐसे में पीयू को सुधार करना चाहिए। इस संबंध में सीसीईटी के प्राचार्य डॉ. एमएस गुजराल व पीयू के प्रभारी डीयूआई से संपर्क किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।
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इनसेट----
डिग्री विंग में बढ़ाई जाएं ट्रेड
सीसीईटी डिप्लोमा विंग के कई विद्यार्थियों ने यूटी प्रशासन से कहा है कि डिग्री विंग में महज चार ही ट्रेड संचालित हैं। कम से कम वह ट्रेड और बढ़ाई जाएं जो डिप्लोमा विंग में हैं। प्रोडक्शन व एक अन्य ट्रेड के विद्यार्थियों को इसके लिए परेशानी होती है। वह दूसरे संस्थानों में दाखिला लेने जाते हैं। यह ट्रेड बढ़ती हैं तो कुछ लाभ तो विद्यार्थियों को मिल सकेगा।
इनसेट---
इस तरह सीसीईटी डिप्लोमा विंग के छात्रों का कोटा घटा
वर्ष 2016 में लिटरेल एंट्री का 10 फीसदी कोटा सीसीईटी डिप्लोमा विंग व पॉलिटेक्निक वुमेन सेक्टर 10 के विद्यार्थियों को मिलता था। उसके बाद कोटा 20 फीसदी किया गया, लेकिन इसमें सीएसआईओ के विद्यार्थियों को भी शामिल कर दिया गया यानी जिन विद्यार्थियों के लिए कोटा शुरू किया गया था उनका लाभ यहां कम हो गया। यही नहीं आगे जाकर वर्ष 2019 में कोटा 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया। यानी पहले 10 फीसदी कोटे में दो संस्थानों के छात्र शामिल होते थे, लेकिन अब तीन संस्थानों के छात्र शामिल हो रहे हैं। डिप्लोमा छात्रों ने कहा है कि यह उनके साथ अन्याय है। यूटी प्रशासन इस पर काम करे।
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पीयू की ओर से पीयू लीट परीक्षा डिप्लोमा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में 10 फीसदी डिप्लोमा के विद्यार्थियों को दाखिले सीसीईटी डिग्री विंग में मिलते हैं। इस परीक्षा के जरिए कुछ ही विद्यार्थी डिग्री विंग तक दाखिले के लिए पहुंच पाते हैं। पीयू की ओर से दूसरी परीक्षा पीयू मीट आयोजित की जाती है। यह माइग्रेशन एग्जामिनेशन टेस्ट है जो दाखिले ले चुके विद्यार्थियों के लिए कोर्स बदलने के लिए आयोजित होता है। इसमें जेईई मेन्स के छात्र भी शामिल होते हैं। इस परीक्षा का उद्देश्य पीयू अपनी यूआईईटी व होशियारपुर रीजनल केंद्र के अलावा सीसीईटी में खाली सीटों को भरने के लिए करता है, क्योंकि पीयू ने रास्ता निकाला था कि कई कोर्स में हर साल उनकी सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में इस परीक्षा के जरिये विद्यार्थी आएंगे और सीटें भर जाएंगी। यदि यह विद्यार्थी नहीं पहुंचते हैं या पहुंचने के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं तो उन सीटों को फिर पीयू लीट की परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को शामिल कर लिया जाता है। यह नौबत बहुत ही कम आती है। पीयू लीट को यह लाभ नहीं मिल पाता।
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ये हैं विद्यार्थियों के तर्क
छात्रों का कहना है कि पीयू लीट व पीयू मीट परीक्षा का पाठ्यक्रम जब 80 फीसदी एक है तो फिर दो परीक्षा क्यों करवाई जा रही है। संस्थानों का उद्देश्य खाली सीटों को भरने का है। ऐसे में एक ही परीक्षा आयोजित की जाए। उसमें जो भी मेरिट मे आए उसे दाखिला मिलना चाहिए। चाहे वह डिप्लोमा के छात्र हों या फिर डिग्री के। लेटरल एंट्री का लाभ जिस तरह मिल रहा है उस तरह जारी रखा जाना चाहिए यानी दस फीसदी कोटा बरकरार रहे। छात्र शुभम, विक्रम शर्मा, राजेश कुमार आदि ने यह मांग उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार देशभर में एक ही परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश कर रही है और यहां अलग-अलग हो रही हैं। ऐसे में पीयू को सुधार करना चाहिए। इस संबंध में सीसीईटी के प्राचार्य डॉ. एमएस गुजराल व पीयू के प्रभारी डीयूआई से संपर्क किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।
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इनसेट----
डिग्री विंग में बढ़ाई जाएं ट्रेड
सीसीईटी डिप्लोमा विंग के कई विद्यार्थियों ने यूटी प्रशासन से कहा है कि डिग्री विंग में महज चार ही ट्रेड संचालित हैं। कम से कम वह ट्रेड और बढ़ाई जाएं जो डिप्लोमा विंग में हैं। प्रोडक्शन व एक अन्य ट्रेड के विद्यार्थियों को इसके लिए परेशानी होती है। वह दूसरे संस्थानों में दाखिला लेने जाते हैं। यह ट्रेड बढ़ती हैं तो कुछ लाभ तो विद्यार्थियों को मिल सकेगा।
इनसेट---
इस तरह सीसीईटी डिप्लोमा विंग के छात्रों का कोटा घटा
वर्ष 2016 में लिटरेल एंट्री का 10 फीसदी कोटा सीसीईटी डिप्लोमा विंग व पॉलिटेक्निक वुमेन सेक्टर 10 के विद्यार्थियों को मिलता था। उसके बाद कोटा 20 फीसदी किया गया, लेकिन इसमें सीएसआईओ के विद्यार्थियों को भी शामिल कर दिया गया यानी जिन विद्यार्थियों के लिए कोटा शुरू किया गया था उनका लाभ यहां कम हो गया। यही नहीं आगे जाकर वर्ष 2019 में कोटा 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया। यानी पहले 10 फीसदी कोटे में दो संस्थानों के छात्र शामिल होते थे, लेकिन अब तीन संस्थानों के छात्र शामिल हो रहे हैं। डिप्लोमा छात्रों ने कहा है कि यह उनके साथ अन्याय है। यूटी प्रशासन इस पर काम करे।