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Chandigarh News: खेतों से खनन में न हो गड़बड़ी, सरकार तय करेगी मानक

Mon, 08 Sep 2025 09:11 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 09:11 PM IST
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There should be no irregularities in mining from the fields, the government will fix the standards
फोटो समाचार
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-खनन विभाग तैयार करेगा एसओपी, जिले के अफसर रखेंगे निगरानी
-किसानों के लिए मिट्टी को निकालना और बेचना बड़ी चुनाैती से कम नहीं
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मोहित धुपड़ चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने जिसका खेत-उसकी रेत नीति के जरिये किसानों को बड़ी राहत देने का काम किया है। नि:संदेह यह नीति किसानों के हित में है लेकिन इस नीति का दुरुपयोग न हो, सरकार इसे लेकर भी गंभीर है। लिहाजा इस नीति को लागू करने के साथ-साथ इसकी संचालन प्रक्रिया के मानक (एसओपी) भी तय किए जाएंगे। खनन विभाग इस संदर्भ में एसओपी तैयार करेगा जिसके अंतर्गत खनन का काम संबंधित जिला अधिकारियों की निगरानी में होगा।
पीड़ित किसान को खनन की सूचना इसके लिए जिलों में नियुक्त किए नोडल अथवा संबंधित विभाग के अधिकारी को देनी होगी। कितनी जमीन पर बाढ़ की वजह से फसल बर्बाद हुई है और कितने क्षेत्र में कितनी फीट गाद जमा है। इसकी जानकारी भी देनी होगी। हालांकि खनन के लिए किसी एनओसी व अनुमति की जरूरत तो नहीं होगी लेकिन यह कार्य प्रशासनिक अमले की निगरानी में ही होगा।
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किसानों के लिए आफत बढ़ाएगी गाद
दरअसल खेतों में जमा गाद को निकालना और उसे बेचना बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पंजाब में बाढ़ के दौरान जो जिले पहाड़ी तलहटी में बसे हुए हैं, वहां मलबे के साथ-साथ काफी मात्रा में कंकर भी आए हैं जबकि अन्य जिलों में मिट्टी के साथ दरियाओं की बहुत ज्यादा रेत मिलने से मिट्टी काफी दलदली हो गई है। खेतों में 2 से 5 फीट तक गाद जमा है। इस गाद को बिना जेसीबी खेतों से निकालना और फिर उन्हें ट्रॉलियों में लादकर बेचना आसान नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मिट्टी कैसी है और किस काम आ सकती है, यह देखना होगा। मिट्टी की स्थिति देखकर ही तय हो पाएगा कि यह किस काम आ सकती है क्योंकि अत्यधिक दलदली और कंकर युक्त होने के कारण इसका इस्तेमाल निर्माण कार्य में होना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। इस गाद की किसानों को क्या कीमत मिलेगी और इसे उठाने में कितना खर्च आएगा, इसे लेकर भी किसान सोच में पड़े हैं।
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मिट्टी में घटेगी जल धारण क्षमता
पंजाब में खेतों में जमी गाद की वजह निश्चित तौर पर उर्वरक शक्ति को तो नुकसान होगा। साथ ही मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता भी कम हो जाएगी। इससे पौधा सूखा पड़ सकता है। ऐसे में अगली फसल पर संकट तय है। साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए सॉयल मैनेजमेंट करना पड़ेगा, जोकि लंबी प्रक्रिया है। अधिक रेत मिट्टी में पोषण तत्वों का स्तर कम कर सकती है, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। यदि मिट्टी और रेत का सही अनुपात हो और अन्य पोषक तत्वों की भरपाई की जाए, तो मिश्रण खेती के लिए उपयुक्त हो सकता है मगर यहां बाढ़ की स्थिति में ऐसा नहीं दिख रहा है।
-डॉ. प्यारा सिंह, वरिष्ठ मृदा विशेषज्ञ, आईसीआरआईएसएटी
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