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पीयू में कृषि विषय है ही नहीं, मान्यता कॉलेजों को दी जा रही
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) में कृषि की पढ़ाई नहीं होती, लेकिन कॉलेजों को यह मान्यता दे रही है। हैरत की बात तो यह है कि कॉलेजों के पास न कृषि विषय संचालन के लिए जमीन है और न फैकल्टी। जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी है, लेकिन वह कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि इस प्रकरण में खेल चल रहा है। पीयू के उच्चाधिकारियों को इस प्रकरण को संज्ञान में लेना चाहिए।
पंजाब के होशियारपुर के बलविंदर सिंह, अमरजीत ने चांसलर को पत्र भेजा है और उसमें पूरा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि होशियारपुर के दो, बुंगा का एक कॉलेज, फिरोजपुर, मलोठ, मालपुर, मोगा आदि क्षेत्रों में संचालित एक दर्जन कॉलेज बीएससी कृषि की पढ़ाई करवा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि नाम के दाखिले यहां लिए जा रहे हैं। कृषि संचालन के लिए कॉलेज के पास पर्याप्त जमीन होनी चाहिए ताकि खेती प्रदर्शन विद्यार्थियों को करके दिखाया जा सके। इसके अलावा पर्याप्त फैकल्टी होनी चाहिए। आरोप हैं कि अधिकांश कॉलेजों के पास यह मानक पूरे नहीं हैं। यही नहीं कुछ अधिकारी निरीक्षण के लिए भी जाते हैं, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं होती है। उन्होंने चांसलर से कहा है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लें और पूरे प्रकरण की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें। कहा कि कई के पास केवल जिम्मेदार पद हैं लेकिन वे काम नहीं कर पा रहे हैं। डीसीडीसी प्रो. संजय कौशिक से संपर्क किया गया, लेकिन नहीं हो सका।
अन्य कॉलेजों के मानकों की भी जांच हो
चांसलर को भेजे पत्र में कहा है कि पंजाब के आधे से अधिक कॉलेज ऐसे हैं जो मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। पंजाब विश्वविद्यालय ने भी आंखें मूंद रखी हैं। उन्होंने जिक्र किया है कि कुछ कॉलेज तो ऐसे हैं जो केवल दाखिले करते हैं और वहां विद्यार्थी आते ही नहीं हैं। केवल पैसे के उद्देश्य से ऐसा कर रहे हैं। इस प्रकरण को गंभीरता से लिया जाए और कार्रवाई हो।
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पंजाब के होशियारपुर के बलविंदर सिंह, अमरजीत ने चांसलर को पत्र भेजा है और उसमें पूरा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि होशियारपुर के दो, बुंगा का एक कॉलेज, फिरोजपुर, मलोठ, मालपुर, मोगा आदि क्षेत्रों में संचालित एक दर्जन कॉलेज बीएससी कृषि की पढ़ाई करवा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि नाम के दाखिले यहां लिए जा रहे हैं। कृषि संचालन के लिए कॉलेज के पास पर्याप्त जमीन होनी चाहिए ताकि खेती प्रदर्शन विद्यार्थियों को करके दिखाया जा सके। इसके अलावा पर्याप्त फैकल्टी होनी चाहिए। आरोप हैं कि अधिकांश कॉलेजों के पास यह मानक पूरे नहीं हैं। यही नहीं कुछ अधिकारी निरीक्षण के लिए भी जाते हैं, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं होती है। उन्होंने चांसलर से कहा है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लें और पूरे प्रकरण की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें। कहा कि कई के पास केवल जिम्मेदार पद हैं लेकिन वे काम नहीं कर पा रहे हैं। डीसीडीसी प्रो. संजय कौशिक से संपर्क किया गया, लेकिन नहीं हो सका।
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अन्य कॉलेजों के मानकों की भी जांच हो
चांसलर को भेजे पत्र में कहा है कि पंजाब के आधे से अधिक कॉलेज ऐसे हैं जो मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। पंजाब विश्वविद्यालय ने भी आंखें मूंद रखी हैं। उन्होंने जिक्र किया है कि कुछ कॉलेज तो ऐसे हैं जो केवल दाखिले करते हैं और वहां विद्यार्थी आते ही नहीं हैं। केवल पैसे के उद्देश्य से ऐसा कर रहे हैं। इस प्रकरण को गंभीरता से लिया जाए और कार्रवाई हो।
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