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Chandigarh News: उद्यमी बोले-इमारत में होगा बदलाव तो कैसे होगा काम
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चंडीगढ़। सिटी के उद्यमियों ने मास्टर प्लान 2031 में इंडस्ट्री को लेकर किए गए बदलावों पर अपना पक्ष रखना शुरू कर दिया है। उद्यमियों का कहना है कि प्रशासन ने एफएआर लेने के लिए जोनिंग का विकल्प दिया है। उद्यमियों का कहना है कि इसमें यह विकल्प भी दिया जाना चाहिए कि यदि कोई उद्यमी सीमित एफएआर पर भी काम करना चाहता है तो बिना तोड़फोड़ के काम कर सकें।
उद्यमियों का कहना है कि जोनिंग में जाने के लिए जरूरी है कि इमारत को तोड़ जाए और नए सिरे से बनाया जाए। ऐसे में उद्यमी का धंधा काफी समय तक खराब हो सकता है। एक ही प्रकार के अग्रभाग की कंडीशन भी प्रशासन की ओर से है जिससे कि इंडस्ट्री का स्वरूप बेहतर हो सकेगा पर समस्या यह है कि अग्रभाग के चक्कर में इमारत पर सीधा असर होगा। कुछ उद्यमियों का कहना है कि जोनिंग के लिए इंडस्ट्री भी शिफ्ट करनी पड़ेगी और इमारत को नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा।
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि इस मामले में उद्यमियों से चर्चा की जा चुकी है और प्रशासन को जल्द ही आपत्तियां सौंपी जाएंगी। उन्होंने कहा कि एफएआर के रेट्स को भी फाइनल किया जाना चाहिए, यह रेट ही पॉलिसी को कामयाब करेगी। इस मास्टर प्लान में एफएआर बढ़ाने के लिए रेट्स भी नहीं लिखे गए हैं।
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वहीं, चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरंजीव सिंह ने कहा कि अभी मामला आर्किटेक्चरल कंट्रोल पर निर्भर है। प्रशासन एफएआर को बढ़ाने के साथ ही कंट्रोल सिस्टम को लाएगी तो स्पष्ट होगा कि किस प्रकार से बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि फेज-3 में मिक्स लैंड यूज के विकल्प हैं तो फेज-1 और 2 में भी इसको लागू किया जाना चाहिए। जिससे प्रशासन को रेवेन्यू भी बढ़ेगा।
ॉ
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उद्यमियों का कहना है कि जोनिंग में जाने के लिए जरूरी है कि इमारत को तोड़ जाए और नए सिरे से बनाया जाए। ऐसे में उद्यमी का धंधा काफी समय तक खराब हो सकता है। एक ही प्रकार के अग्रभाग की कंडीशन भी प्रशासन की ओर से है जिससे कि इंडस्ट्री का स्वरूप बेहतर हो सकेगा पर समस्या यह है कि अग्रभाग के चक्कर में इमारत पर सीधा असर होगा। कुछ उद्यमियों का कहना है कि जोनिंग के लिए इंडस्ट्री भी शिफ्ट करनी पड़ेगी और इमारत को नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा।
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चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि इस मामले में उद्यमियों से चर्चा की जा चुकी है और प्रशासन को जल्द ही आपत्तियां सौंपी जाएंगी। उन्होंने कहा कि एफएआर के रेट्स को भी फाइनल किया जाना चाहिए, यह रेट ही पॉलिसी को कामयाब करेगी। इस मास्टर प्लान में एफएआर बढ़ाने के लिए रेट्स भी नहीं लिखे गए हैं।
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वहीं, चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरंजीव सिंह ने कहा कि अभी मामला आर्किटेक्चरल कंट्रोल पर निर्भर है। प्रशासन एफएआर को बढ़ाने के साथ ही कंट्रोल सिस्टम को लाएगी तो स्पष्ट होगा कि किस प्रकार से बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि फेज-3 में मिक्स लैंड यूज के विकल्प हैं तो फेज-1 और 2 में भी इसको लागू किया जाना चाहिए। जिससे प्रशासन को रेवेन्यू भी बढ़ेगा।
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