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Chandigarh News: पीडियाट्रिक वार्ड से किलकारी नहीं आती है हथौड़ों की आवाज

Sun, 14 Dec 2025 02:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Dec 2025 02:22 AM IST
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There are no sounds of children's laughter coming from the pediatric ward, only the sound of hammers
मोहाली। फेज-6 स्थित एम्स में 50 बेड का नया पीडियाट्रिक वार्ड उद्घाटन के एक माह बाद भी अधूरा है। डेट पर डेट मिलने के बाद इस वार्ड का बाल दिवस 14 नवंबर को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने उद्घाटन किया था। आज भी उस वार्ड में बच्चों की किलकारी, डॉक्टरों व नर्सों की चहलकदमी की जगह हथौड़ों की आवाज सुनाई देती है। मजदूर मजदूर पार्टीशन और शीशे लगाने में जुटे हैं। वार्ड पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है जबकि बच्चों के लिए पुराने वार्ड में जगह की किल्लत जारी है।
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शुरू से लेकर आज तक, टूटती रही समय सीमा
यह नया वार्ड ‘पफ पैनल टेक्नोलॉजी’ से बनाया गया है। इसमें कम समय लगना चाहिए था। इसका काम अगस्त 2024 में शुरू हुआ और पहली डेडलाइन 26 जनवरी 2025 थी। फिर मार्च, जून और अगस्त की तारीखें निकाली गईं। आखिरकार 14 नवंबर को अधूरे वार्ड का उद्घाटन कर दिया गया। एक माह बाद भी स्थिति यह है कि वार्ड का अभी पार्टीशन हो रहा है। फ्रंट डेस्क पर शीशे चढ़ाए जा रहे हैं, बच्चों के लिए प्ले एरिया को अलग किया जा रहा है। एग्जॉस्ट व नलकों का काम पूरा हो रहा है।
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सोमवार तक ऑपरेशनल होने का आश्वासन
रविवार को निरीक्षण के लिए पहुंचे एसडीओ दिनेश कुमार ने बताया कि वार्ड सोमवार तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि मुख्य काम पहले ही पूरा हो चुका था। फिलहाल कुछ ‘एड-ऑन’ कार्य कराए जा रहे हैं। जमीनी हकीकत यह बताती है कि यह महज एड ऑन वर्क नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे का अधूरापन है।
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देरी के कारण : फंड, बारिश और असुविधाएं
ठेकेदार विकास मित्तल ने बताया कि काम में देरी की कई वजहें रहीं। इसमें फंड की कमी मुख्य कारण था। बीच में करीब छह माह फंड नहीं आया था। फिर कभी बारिश के कारण काम रुका क्योंकि काम सबसे ऊपरी मंजिल पर होना था। अस्पताल में रोजाना लोगों का आना-जाना चला रहता है इससे भी दिक्कत आती है। भारी मशीनें और सामान सिर्फ रविवार को लाने की अनुमति है। अस्पताल में पार्किंग की कमी है और गाड़ियां इतनी खड़ी होती है कि जगह ही नहीं होती।



भीड़भाड़ और तनाव का बनता है माहौल
फिलहाल मदर एंड चाइल्ड बिल्डिंग की पहली और दूसरी मंजिल पर पुराने पीडियाट्रिक वार्ड चल रहे हैं। यहां एक वार्ड में 22 और दूसरे में 18 बेड हैं। इनमें बच्चों के साथ-साथ बड़े भी रहते हैं। इससे भीड़भाड़ और तनाव का माहौल बना रहता है। नया वार्ड बनने से बेड की क्षमता बढ़नी थी और बच्चों को बेहतर माहौल मिलना था, लेकिन नौकरशाही और निर्माण में लगातार देरी ने यह उम्मीद धूमिल कर दी है।
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