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पीयू में कृषि के विशेषज्ञ नहीं, पर कॉलेजों को बांटी जा रही मान्यता
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में कृषि के विशेषज्ञ नहीं हैं, पर कॉलेजों को बीएससी (कृषि) की मान्यता दी जा रही है। जिन कॉलेजों में यह कोर्स संचालित हैं, वहां पर वे संसाधन ही नहीं हैं, जिनके आधार पर मान्यता मिलती है। मानकों की जांच करने वाली टीम पर सवाल खड़े हो गए हैं। बिना विशेषज्ञों के जांच कैसे पूरी हो रही है। इस पूरे प्रकरण के बारे में कुछ लोगों ने यूजीसी को बताया है। इससे जिम्मेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
बीएससी (कृषि) के लिए देश में गिनती के ही विश्वविद्यालय हैं, जहां दाखिला मिलना आसान नहीं। यदि दाखिल हो गया तो नौकरी भी पक्की समझिए। बीएससी (कृषि) की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय नहीं करवा रहा है। कैंपस में सभी कोर्स संचालित हैं, लेकिन कृषि नहीं। वहीं कॉलेजों को कृषि की मान्यता दी जा रही है। यह मान्यता होशियारपुर, फिरोजपुर, मुक्तसर, मोहलाकलां आदि जगहों पर दी गई है। किसी कॉलेज में 30 तो किसी में 40 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
ये हैं मानक
कृषि विशेषज्ञ मान्यता से पहले यह चेक करेंगे कि कृषि विषय पढ़ाने के लिए संकाय का हाल क्या है। 20 विद्यार्थियों पर शिक्षक होना चाहिए। साथ ही हर विषय का विशेषज्ञ होना चाहिए।
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कृषि के लिए प्रयोगशालाएं, खेत प्रदर्शन, मशीन, उपकरण आदि की व्यवस्था है या नहीं।
दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति नियमित है या नहीं।
पुस्तकालय में कृषि से जुड़ी पुस्तकों की स्थिति।
ये उठाए हैं सवाल
मुक्तसर के राजविंदर सिंह, कुलविंदर आदि ने यूजीसी को पत्र भेजा है। उन्होंने पंजाब के कुछ कॉलेजों का जिक्र किया है। कहा है कि कॉलेजों में दाखिले कृषि की पढ़ाई के लिए हुए हैं, लेकिन वहां विद्यार्थी नहीं आते और न ही शिक्षक। पीयू से जांच को बनाई गई कमेटी भी कागजी कोरम पूरा करके चली जाती है। पूरे मामले में खेल चल रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई अमल में लाएं। उन्होंने कुछ कॉलेजों के शिक्षण कक्षों की फोटो भी शिकायती पत्र के साथ दी है।
कृषि में पढ़ाई से आसानी से मिल जाता है कनाडा का वीजा
सूत्रों का कहना है कि पंजाब की युवा आबादी लगातार विदेशों में जा रही है। अधिकांश लोग कनाडा जा रहे हैं। बीएससी एग्रीकल्चर से पढ़ाई करनेे वाले युवाओं को आसानी से वहां की सरकार वीजा दे देती है। वहां ऐसे युवाओं की आवश्यकता महसूस होती है। जानकारों का कहना है कि पीयू को अपनी जांच कमेटी में विशेषज्ञों को स्थान देना चाहिए। कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को जांच के लिए कॉलेजों में भेजना चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी
पीयू की ओर से कॉलेजों को कृषि विषय की मान्यता दी जाती है। इसकी जांच के लिए विशेषज्ञों को ही लगाया जाता है। बाहर से विशेषज्ञ बुलाए जाते हैं जो पीयू की टीम के साथ जाकर कॉलेजों में जांच करते हैं। -प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई
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बीएससी (कृषि) के लिए देश में गिनती के ही विश्वविद्यालय हैं, जहां दाखिला मिलना आसान नहीं। यदि दाखिल हो गया तो नौकरी भी पक्की समझिए। बीएससी (कृषि) की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय नहीं करवा रहा है। कैंपस में सभी कोर्स संचालित हैं, लेकिन कृषि नहीं। वहीं कॉलेजों को कृषि की मान्यता दी जा रही है। यह मान्यता होशियारपुर, फिरोजपुर, मुक्तसर, मोहलाकलां आदि जगहों पर दी गई है। किसी कॉलेज में 30 तो किसी में 40 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
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ये हैं मानक
कृषि विशेषज्ञ मान्यता से पहले यह चेक करेंगे कि कृषि विषय पढ़ाने के लिए संकाय का हाल क्या है। 20 विद्यार्थियों पर शिक्षक होना चाहिए। साथ ही हर विषय का विशेषज्ञ होना चाहिए।
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कृषि के लिए प्रयोगशालाएं, खेत प्रदर्शन, मशीन, उपकरण आदि की व्यवस्था है या नहीं।
दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति नियमित है या नहीं।
पुस्तकालय में कृषि से जुड़ी पुस्तकों की स्थिति।
ये उठाए हैं सवाल
मुक्तसर के राजविंदर सिंह, कुलविंदर आदि ने यूजीसी को पत्र भेजा है। उन्होंने पंजाब के कुछ कॉलेजों का जिक्र किया है। कहा है कि कॉलेजों में दाखिले कृषि की पढ़ाई के लिए हुए हैं, लेकिन वहां विद्यार्थी नहीं आते और न ही शिक्षक। पीयू से जांच को बनाई गई कमेटी भी कागजी कोरम पूरा करके चली जाती है। पूरे मामले में खेल चल रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई अमल में लाएं। उन्होंने कुछ कॉलेजों के शिक्षण कक्षों की फोटो भी शिकायती पत्र के साथ दी है।
कृषि में पढ़ाई से आसानी से मिल जाता है कनाडा का वीजा
सूत्रों का कहना है कि पंजाब की युवा आबादी लगातार विदेशों में जा रही है। अधिकांश लोग कनाडा जा रहे हैं। बीएससी एग्रीकल्चर से पढ़ाई करनेे वाले युवाओं को आसानी से वहां की सरकार वीजा दे देती है। वहां ऐसे युवाओं की आवश्यकता महसूस होती है। जानकारों का कहना है कि पीयू को अपनी जांच कमेटी में विशेषज्ञों को स्थान देना चाहिए। कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को जांच के लिए कॉलेजों में भेजना चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी
पीयू की ओर से कॉलेजों को कृषि विषय की मान्यता दी जाती है। इसकी जांच के लिए विशेषज्ञों को ही लगाया जाता है। बाहर से विशेषज्ञ बुलाए जाते हैं जो पीयू की टीम के साथ जाकर कॉलेजों में जांच करते हैं। -प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई