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‘रिश्वत लेने या समझौता कराने की नहीं थी जानकारी’
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चंडीगढ़। चोरी के केस में आरोपियों को छोड़ने के एवज में दस हजार रिश्वत लेने के मामले में जिला अदालत में सोमवार को अभियोजन पक्ष की गवाह इंस्पेक्टर गुरजीत कौर के बयान दर्ज किए गए। गुरजीत कौर सेक्टर-26 पुलिस लाइन में इंस्पेक्टर केरूप में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने राजबीर से जो पैसा वसूल किया, वह उसके बारे में निश्चित रूप से नहीं बता सकती कि वह पैसे रिश्वत के थे या समझौते के। उसने बयान में बताया कि अक्तूबर 2018 को हल्लोमाजरा निवासी मीनू से उसे शिकायत मिली थी। शिकायत को उच्च अधिकारियों ने चिन्हित किया गया था। इसके बाद उसने कार्रवाई करके रिपोर्ट के लिए एसआई राजबीर को मामला सौंप दिया। 28 दिसंबर 2018 को राजबीर सिंह ने उन्हें बताया कि दोनों पक्ष के बीच समझौता हो गया है। इस दौरान एसआई ने कहा कि शिकायतकर्ता का परिवार उनसे मिलना चाहता है। उसने अदालत में कहा कि उनकी मीटिंग कुछ ही देर की थी और उन्हें पता नहीं था कि उनके नाम पर रिश्वत मांगी जा रही है। 4 जनवरी, 2019 को उसे सीबीआई से रिश्वत राशि के बारे में पता चला।
राजबीर सिंह के वकील एडवोकेट हरीश भारद्वाज ने जब उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मीनू और उसके परिवार वाले मुआवजा लेकर मामले को निपटाने के लिए आपस में बातचीत कर रहे थे। इस दौरान समझौता के लिए पैसों की बात सामने आई। इसके बाद सीबीआई ने दोबारा जांच की। गुरजीत ने कहा कि उसे रिश्वत के रूप में ली राशि या समझौते के लिए ली राशि की कोई जानकारी नहीं है।
गुरजीत कौर को सीबीआई दे चुकी है क्लीन चिट
पिछले साल सेक्टर-31 थाने के सब-इंस्पेक्टर राजबीर सिंह के खिलाफ 10 हजार रुपए की रिश्वत के आरोप में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। इस केस में सेक्टर-31 थाने की पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर गुरजीत कौर का भी नाम आया था। सीबीआई उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है। सीबीआई ने राजबीर के खिलाफ चार्जशीट दायर कर गुरजीत कौर को गवाह बना दिया था। सीबीआई ने चार्जशीट में गुरजीत कौर की स्टेटमेंट भी लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें राजबीर के रिश्वत मांगने की जानकारी नहीं थी।
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सीता राम ने राजबीर के खिलाफ सीबीआई को शिकायत दी थी। सीबीआई ने ट्रैप लगाया और 4 जनवरी को 10 हजार रुपए देकर सीता राम को राजबीर के पास जाने को कहा। जैसे ही राजबीर ने रकम लेने की कोशिश की, सीबीआई की टीम ने राजबीर को पकड़ना चाहा। लेकिन राजबीर मौके से फरार हो गया। उसने सीबीआई की टीम पर गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। लेकिन 5 दिनों बाद राजबीर ने सरेंडर कर दिया था।
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राजबीर सिंह के वकील एडवोकेट हरीश भारद्वाज ने जब उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मीनू और उसके परिवार वाले मुआवजा लेकर मामले को निपटाने के लिए आपस में बातचीत कर रहे थे। इस दौरान समझौता के लिए पैसों की बात सामने आई। इसके बाद सीबीआई ने दोबारा जांच की। गुरजीत ने कहा कि उसे रिश्वत के रूप में ली राशि या समझौते के लिए ली राशि की कोई जानकारी नहीं है।
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गुरजीत कौर को सीबीआई दे चुकी है क्लीन चिट
पिछले साल सेक्टर-31 थाने के सब-इंस्पेक्टर राजबीर सिंह के खिलाफ 10 हजार रुपए की रिश्वत के आरोप में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। इस केस में सेक्टर-31 थाने की पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर गुरजीत कौर का भी नाम आया था। सीबीआई उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है। सीबीआई ने राजबीर के खिलाफ चार्जशीट दायर कर गुरजीत कौर को गवाह बना दिया था। सीबीआई ने चार्जशीट में गुरजीत कौर की स्टेटमेंट भी लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें राजबीर के रिश्वत मांगने की जानकारी नहीं थी।
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सीता राम ने राजबीर के खिलाफ सीबीआई को शिकायत दी थी। सीबीआई ने ट्रैप लगाया और 4 जनवरी को 10 हजार रुपए देकर सीता राम को राजबीर के पास जाने को कहा। जैसे ही राजबीर ने रकम लेने की कोशिश की, सीबीआई की टीम ने राजबीर को पकड़ना चाहा। लेकिन राजबीर मौके से फरार हो गया। उसने सीबीआई की टीम पर गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। लेकिन 5 दिनों बाद राजबीर ने सरेंडर कर दिया था।